
सैंटियागो/जिनेवा,
सार्वजनिक स्वास्थ्य के इतिहास में 4 मार्च 2026 की तारीख एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आधिकारिक तौर पर दक्षिण अमेरिकी देश चिली को कुष्ठ रोग (Leprosy) के उन्मूलन की मान्यता प्रदान की है। इस घोषणा के साथ ही चिली संपूर्ण अमेरिका महाद्वीप (उत्तर और दक्षिण अमेरिका) का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने इस प्राचीन और कलंकित बीमारी को अपनी सीमाओं से पूरी तरह खदेड़ दिया है।
तीन दशकों का कड़ा संघर्ष और शून्य मामले
WHO की रिपोर्ट के अनुसार, चिली ने पिछले 30 वर्षों में स्थानीय स्तर पर कुष्ठ रोग का एक भी नया मामला दर्ज नहीं किया है। किसी भी देश को ‘रोग मुक्त’ घोषित करने के लिए WHO के कड़े मानक होते हैं, जिनमें संक्रमण की दर का नगण्य होना और स्वास्थ्य प्रणाली की निगरानी क्षमता का मजबूत होना अनिवार्य है।
चिली ने न केवल इन मानकों को पूरा किया, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि सही राजनीतिक इच्छाशक्ति और जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की मेहनत से सदियों पुरानी बीमारियों को खत्म किया जा सकता है। चिली के स्वास्थ्य मंत्री ने इस अवसर पर कहा, “यह जीत उन हजारों स्वास्थ्य नायकों की है जिन्होंने दुर्गम एंडीज पर्वतमाला से लेकर अटाकामा रेगिस्तान के सुदूर गांवों तक पहुंचकर जांच और उपचार सुनिश्चित किया।”
कुष्ठ रोग: एक प्राचीन चुनौती और सामाजिक कलंक
कुष्ठ रोग, जिसे ‘हैनसेन रोग’ (Hansen’s Disease) भी कहा जाता है, माइकोबैक्टीरियम लेप्री नामक जीवाणु के कारण होता है। यह मुख्य रूप से त्वचा, नसों और आंखों को प्रभावित करता है। इतिहास में इस बीमारी को न केवल एक शारीरिक कष्ट, बल्कि एक ‘सामाजिक अभिशाप’ माना जाता था, जिसके कारण मरीजों को समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता था।
चिली की सफलता के मुख्य स्तंभ:
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शीघ्र पहचान (Early Detection): चिली ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कुष्ठ रोग के लक्षणों की पहचान के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए।
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निःशुल्क एमडीटी (MDT): मल्टी-ड्रग थेरेपी (MDT) को देश के कोने-कोने में मुफ्त उपलब्ध कराया गया।
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कलंक मिटाओ अभियान: सरकार ने व्यापक स्तर पर जागरूकता फैलाकर समाज में फैले इस भ्रम को तोड़ा कि यह बीमारी छूने से फैलती है या लाइलाज है।
वैश्विक स्वास्थ्य लक्ष्यों के लिए एक मिसाल
WHO के महानिदेशक ने चिली को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि दुनिया के अन्य देशों, विशेषकर दक्षिण पूर्व एशिया और अफ्रीका के देशों के लिए एक प्रेरणा है, जहाँ कुष्ठ रोग अभी भी एक चुनौती बना हुआ है।
चिली की यह सफलता WHO के ‘ग्लोबल लेप्रोसी स्ट्रैटेजी 2021-2030’ के लक्ष्यों के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य 2030 तक 120 देशों में कुष्ठ रोग के स्थानीय संचरण को शून्य तक लाना है। चिली ने इस लक्ष्य को समय से पहले प्राप्त कर दुनिया को एक रोडमैप दिखाया है।
भविष्य की चुनौतियां: निगरानी बरकरार रखना
भले ही चिली को ‘मुक्त’ घोषित कर दिया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सतर्कता कम नहीं होनी चाहिए। आज की वैश्विक दुनिया में लोग एक देश से दूसरे देश की यात्रा करते हैं, जिससे ‘इंपोर्टेड’ (बाहर से आए) मामलों का खतरा बना रहता है। चिली की स्वास्थ्य प्रणाली अब अपनी निगरानी (Surveillance) प्रणाली को और मजबूत करेगी ताकि भविष्य में यदि कोई मामला बाहर से आता है, तो उसे तुरंत नियंत्रित किया जा सके।
निष्कर्ष
चिली द्वारा कुष्ठ रोग पर पाई गई यह विजय विज्ञान और मानवीय करुणा के संगम का परिणाम है। यह इस बात का प्रमाण है कि जब विज्ञान को सही संसाधन और सामाजिक सहयोग मिलता है, तो सबसे कठिन बाधाओं को भी पार किया जा सकता है। आज चिली का हर नागरिक गर्व से कह सकता है कि उन्होंने एक ऐसी बीमारी को मात दी है जिसने सदियों तक मानवता को डराया था।