
नई दिल्ली: कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा और मनोरंजन के लिए स्क्रीन पर बढ़ती निर्भरता ने बच्चों के स्वास्थ्य पर एक गहरा, लेकिन अक्सर अनदेखा प्रभाव डाला है: ‘डिजिटल आई सिंड्रोम’ (Digital Eye Syndrome) या कंप्यूटर विजन सिंड्रोम। बाल स्वास्थ्य और नेत्र विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बच्चों और किशोरों में इस सिंड्रोम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो उनकी आँखों के साथ-साथ उनके सीखने की क्षमता को भी प्रभावित कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप जैसी डिजिटल स्क्रीनों से निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) और घंटों तक नज़दीक से देखने की आदत इस समस्या का मुख्य कारण है।
डिजिटल आई सिंड्रोम के प्रमुख लक्षण:
लगातार बढ़ती स्क्रीन टाइमिंग के कारण बच्चों में निम्नलिखित शिकायतें आम हो गई हैं:
- आँखों में सूखापन और जलन: स्क्रीन देखते समय बच्चे पलकें कम झपकाते हैं, जिससे आँखों में नमी कम हो जाती है।
- धुंधला दिखाई देना: आंखों की मांसपेशियों पर लगातार तनाव से अस्थायी रूप से दूर की वस्तुओं को देखने में कठिनाई होती है।
- सिरदर्द और थकान: आँख की मांसपेशियों पर तनाव के कारण लगातार सिरदर्द और गर्दन व कंधों में दर्द की शिकायत होती है।
- नींद में बाधा: रात में सोने से ठीक पहले स्क्रीन देखने से नीली रोशनी मेलाटोनिन (Melatonin) हार्मोन के उत्पादन को बाधित करती है, जिससे नींद आने में परेशानी होती है।
पेरेंट्स के लिए विशेषज्ञों के महत्वपूर्ण सुझाव:
नेत्र विशेषज्ञों ने बच्चों को इस सिंड्रोम से बचाने के लिए माता-पिता को कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपाय अपनाने की सलाह दी है:
- ’20-20-20 नियम’ का पालन: बच्चों को हर 20 मिनट के बाद, कम से कम 20 सेकंड के लिए, 20 फीट (लगभग 6 मीटर) दूर किसी वस्तु को देखने के लिए प्रेरित करें। यह आँखों की मांसपेशियों को आराम देने में मदद करता है।
- स्क्रीन टाइम सीमित करें: गैर-शैक्षणिक गतिविधियों (जैसे गेम्स और वीडियो) के लिए स्क्रीन टाइम को सख्ती से सीमित करें। मनोरंजन के लिए इनडोर या आउटडोर शारीरिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करें।
- सोने से पहले गैजेट्स दूर करें: बच्चों को सोने से कम से कम एक घंटा पहले सभी डिजिटल गैजेट्स (मोबाइल, टैबलेट) दूर रखने के लिए कहें, ताकि उनकी नींद का पैटर्न सुरक्षित रहे।
- सही दूरी और रोशनी: सुनिश्चित करें कि स्क्रीन और आँखों के बीच कम से कम 25 इंच की दूरी हो। कमरे में रोशनी पर्याप्त हो, और स्क्रीन की चमक बहुत अधिक या बहुत कम न हो।
- नियमित आँख की जाँच: बच्चों को किसी भी समस्या से बचने के लिए नियमित रूप से नेत्र विशेषज्ञ से आँखों की जांच करवानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सरल उपायों को अपनाकर, पेरेंट्स अपने बच्चों की आँखों को डिजिटल युग के बढ़ते खतरे से बचा सकते हैं और उनके समग्र स्वास्थ्य को सुनिश्चित कर सकते हैं।