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मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए खुशखबरी: क्या हाई-फैट डेयरी उत्पाद बचा सकते हैं डिमेंशिया से?

आमतौर पर स्वास्थ्य संबंधी सलाहों में ‘हाई-फैट’ (उच्च वसा) वाले भोजन से बचने की बात कही जाती है, विशेषकर हृदय स्वास्थ्य के संदर्भ में। लेकिन स्वीडन के वैज्ञानिकों द्वारा हाल ही में किए गए एक व्यापक अध्ययन ने इस धारणा को चुनौती दी है। इस शोध में दावा किया गया है कि हाई-फैट चीज़ (Cheese) और क्रीम जैसे डेयरी उत्पादों का सेवन करने वाले वयस्कों में डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) का खतरा काफी कम पाया गया है।

यह अध्ययन उन लाखों लोगों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है जो बुढ़ापे में संज्ञानात्मक गिरावट (Cognitive decline) से बचना चाहते हैं।


शोध के मुख्य परिणाम: क्या कहते हैं आंकड़े?

स्वीडिश शोधकर्ताओं ने हजारों वयस्कों के खान-पान और उनके मस्तिष्क के स्वास्थ्य का कई वर्षों तक विश्लेषण किया। इस रिसर्च के परिणाम चौंकाने वाले थे:

  • खतरे में कमी: जो लोग नियमित रूप से लेकिन संतुलित मात्रा में हाई-फैट डेयरी उत्पादों का सेवन कर रहे थे, उनमें डिमेंशिया विकसित होने का खतरा 16% से 24% तक कम देखा गया।

  • मस्तिष्क की सुरक्षा: अध्ययन के अनुसार, डेयरी उत्पादों में पाए जाने वाले कुछ विशिष्ट ‘फैटी एसिड’ मस्तिष्क की कोशिकाओं (Neurons) की रक्षा करने में सहायक हो सकते हैं।

  • लो-फैट बनाम हाई-फैट: दिलचस्प बात यह है कि लो-फैट डेयरी उत्पादों (जैसे स्किम्ड मिल्क) का सेवन करने वालों में ऐसा कोई विशेष सुरक्षात्मक प्रभाव नहीं देखा गया, जो यह दर्शाता है कि यह लाभ डेयरी के ‘फैट’ में ही छिपा है।


डेयरी फैट और मस्तिष्क का संबंध: वैज्ञानिक कारण

वैज्ञानिकों का मानना है कि डेयरी वसा में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो मस्तिष्क के लिए “सुपरफूड” की तरह काम करते हैं:

  1. न्यूरोप्रोटेक्टिव गुण: डेयरी उत्पादों में मौजूद वसा, विशेष रूप से ‘ब्यूटिरेट’ और ‘कंजुगेटेड लिनोलिक एसिड’ (CLA), मस्तिष्क की सूजन (Inflammation) को कम करने में मदद कर सकते हैं। डिमेंशिया और अल्जाइमर का एक बड़ा कारण मस्तिष्क में होने वाली सूजन ही है।

  2. मायलिन शीथ का रख-रखाव: हमारे मस्तिष्क की नसों पर एक सुरक्षात्मक परत होती है जिसे ‘मायलिन शीथ’ कहते हैं। यह परत वसा से बनी होती है। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि उच्च गुणवत्ता वाला डेयरी फैट इस परत की मरम्मत और मजबूती में मदद कर सकता है।

  3. विटामिन का अवशोषण: विटामिन A, D, और K2 वसा में घुलनशील (Fat-soluble) होते हैं। हाई-फैट डेयरी का सेवन इन विटामिन्स के अवशोषण को बढ़ाता है, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य हैं।


सावधानी: संतुलन है सबसे जरूरी

भले ही यह रिसर्च हाई-फैट डेयरी के पक्ष में हो, लेकिन वैज्ञानिकों ने ‘संतुलन’ (Moderation) पर सबसे अधिक जोर दिया है।

  • कैलोरी का ध्यान: चीज़ और क्रीम में कैलोरी की मात्रा बहुत अधिक होती है। इनका अत्यधिक सेवन मोटापे और हृदय संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है, जो खुद डिमेंशिया के जोखिम कारक हैं।

  • गुणवत्ता: शोधकर्ताओं ने प्राकृतिक और कम प्रोसेस्ड चीज़ (जैसे चेडर या गौडा) को प्रोसेस्ड चीज़ स्लाइस की तुलना में अधिक प्रभावी बताया है।

  • जीवनशैली: केवल चीज़ खाने से डिमेंशिया नहीं रुकेगा; इसके साथ नियमित व्यायाम और मानसिक रूप से सक्रिय रहना भी अनिवार्य है।


निष्कर्ष

स्वीडन का यह अध्ययन पोषण विज्ञान में एक नया दृष्टिकोण प्रदान करता है। यह हमें सिखाता है कि “वसा” हमेशा दुश्मन नहीं होती। यदि सही स्रोत (जैसे उच्च गुणवत्ता वाली डेयरी) से और सही मात्रा में ली जाए, तो यह हमारे मस्तिष्क को उम्र के साथ होने वाली बीमारियों से बचाने में एक ढाल का काम कर सकती है। यह शोध भविष्य में डिमेंशिया के मरीजों के लिए डाइट चार्ट तैयार करने में मददगार साबित होगा।

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