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भारत में ‘फेक रेबीज वैक्सीन’ का साया: स्वास्थ्य मंत्रालय और WHO की बड़ी चेतावनी

नई दिल्ली। भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। केंद्र सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने संयुक्त रूप से देश में नकली रेबीज वैक्सीन के संभावित प्रसार को लेकर हाई अलर्ट जारी किया है। यह चेतावनी विशेष रूप से रेबीज के इलाज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन ‘अभयराब’ (Abhayrab) के कुछ संदिग्ध बैचों को लेकर दी गई है। चूंकि रेबीज एक शत-प्रतिशत जानलेवा बीमारी है, इसलिए नकली वैक्सीन का बाजार में होना सीधे तौर पर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है।

‘अभयराब’ के संदिग्ध बैच और WHO की रिपोर्ट

स्वास्थ्य मंत्रालय को मिली हालिया रिपोर्टों के अनुसार, देश के कुछ राज्यों में ‘अभयराब’ नाम से बिकने वाली वैक्सीन के लेबल और पैकेजिंग में विसंगतियां पाई गई हैं। WHO ने अपनी वैश्विक निगरानी प्रणाली (Global Surveillance System) के जरिए सूचित किया है कि इन संदिग्ध वैक्सीन के नमूनों में वह सक्रिय तत्व (Active Ingredients) मौजूद नहीं हैं, जो रेबीज वायरस से लड़ने के लिए जरूरी होते हैं।

संदिग्ध वैक्सीन की पहचान कैसे हुई?

  • असली ‘अभयराब’ वैक्सीन का निर्माण ह्यूमन बायोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (HBI) द्वारा किया जाता है।

  • संदिग्ध बैचों की छपाई और लोगो (Logo) असली वैक्सीन से मामूली रूप से अलग पाए गए हैं।

  • वैक्सीन की शीशी (Vial) पर दिए गए बैच नंबर और एक्सपायरी डेट कंपनी के आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे हैं।


सरकार की कार्रवाई: सप्लाई चेन की सघन जांच

इस गंभीर खतरे को देखते हुए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने सभी राज्यों के ड्रग कंट्रोलर्स को सख्त निर्देश जारी किए हैं:

  1. स्टॉक की जांच: सभी सरकारी अस्पतालों और निजी फार्मेसी में रखे गए ‘अभयराब’ के स्टॉक की तत्काल जांच की जाए।

  2. संदिग्ध बैच की जब्ती: यदि किसी बैच नंबर पर संदेह होता है, तो उसे तुरंत बाजार से वापस (Recall) लिया जाए और प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजा जाए।

  3. सप्लाई चेन पर नजर: दवा वितरकों और होलसेलर्स के बिलों का मिलान सीधे निर्माता कंपनी के डेटा से किया जा रहा है।


रेबीज: जोखिम और विशेषज्ञों की राय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रेबीज अन्य बीमारियों की तरह नहीं है। यदि किसी व्यक्ति को रेबीज संक्रमित जानवर ने काटा है और उसे समय पर प्रभावी वैक्सीन नहीं मिली, तो लक्षण उभरने के बाद मौत लगभग निश्चित है।

“नकली वैक्सीन का मतलब है शून्य सुरक्षा। मरीज को लगता है कि उसने टीका लगवा लिया है और वह सुरक्षित है, लेकिन असल में उसका शरीर वायरस से लड़ने के लिए तैयार ही नहीं होता। यह ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम करता है।” – डॉ. आर. के. शर्मा, वरिष्ठ वायरोलॉजिस्ट


आम जनता के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय

नकली दवाओं के इस खतरे से बचने के लिए नागरिकों को निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए:

  • प्रमाणित केंद्रों का चुनाव: रेबीज का टीका हमेशा सरकारी अस्पतालों या बड़े और प्रतिष्ठित निजी अस्पतालों से ही लगवाएं। गली-मोहल्ले की छोटी फार्मेसी से वैक्सीन खरीदकर लगवाने से बचें।

  • पक्का बिल मांगें: वैक्सीन खरीदते समय हमेशा ‘कम्प्यूटराइज्ड बिल’ मांगें, जिसमें बैच नंबर और कंपनी का नाम साफ लिखा हो।

  • पैकेजिंग की जांच: यदि वैक्सीन के डिब्बे की प्रिंटिंग धुंधली हो या सील टूटी हुई लगे, तो उसे तुरंत अस्वीकार कर दें और अधिकारियों को सूचित करें।

  • QR कोड स्कैन करें: आजकल अधिकांश नई वैक्सीन के पत्तों पर QR कोड होता है, जिसे स्कैन करके आप उसकी प्रमाणिकता की जांच कर सकते हैं।

निष्कर्ष

भारत जैसे विशाल देश में जहां आवारा कुत्तों के काटने के मामले अधिक हैं, वहां रेबीज वैक्सीन की गुणवत्ता से समझौता एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट बन सकता है। सरकार और जनता के बीच साझा जागरूकता ही इस ‘फेक मेडिसिन माफिया’ पर लगाम लगा सकती है।

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