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भारत में कैंसर के विरुद्ध डिजिटल क्रांति: AI आधारित निदान के लिए केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन्स

नई दिल्ली। भारत सरकार ने देश की स्वास्थ्य प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव लाते हुए कैंसर की शुरुआती पहचान और निदान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सॉफ्टवेयर के उपयोग पर व्यापक दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किए हैं। यह कदम न केवल चिकित्सा जगत में तकनीक के समावेश को बढ़ावा देगा, बल्कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के खिलाफ भारत की जंग को एक नई शक्ति प्रदान करेगा।


AI अब एक ‘मेडिकल डिवाइस’: क्या है नई गाइडलाइन?

केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी इन दिशानिर्देशों के तहत, अब एआई-आधारित नैदानिक उपकरणों (Diagnostic Tools) को आधिकारिक तौर पर ‘चिकित्सा उपकरणों’ (Medical Devices) की श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। इसका मतलब है कि अब इन सॉफ्टवेयरों को भी उन्हीं कड़े मानकों और गुणवत्ता परीक्षणों से गुजरना होगा जिनसे एक एमआरआई मशीन या पेसमेकर गुजरता है।

मुख्य प्रावधान:

  • सटीकता का मानक: एआई सॉफ्टवेयर को एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई छवियों का विश्लेषण करने के लिए न्यूनतम सटीकता बेंचमार्क को पूरा करना होगा।

  • डेटा सुरक्षा: मरीजों के मेडिकल डेटा और स्कैन रिपोर्ट की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए ‘डाटा एन्क्रिप्शन’ को अनिवार्य बनाया गया है।

  • मानवीय निगरानी: गाइडलाइन स्पष्ट करती है कि एआई केवल डॉक्टर की मदद करेगा, अंतिम निर्णय (Final Diagnosis) हमेशा एक योग्य रेडियोलॉजिस्ट या ऑन्कोलॉजिस्ट का ही होगा।


ग्रामीण भारत के लिए वरदान: विशेषज्ञ की कमी होगी दूर

भारत में कैंसर के इलाज में सबसे बड़ी बाधा ‘समय पर पहचान’ (Early Detection) की कमी है। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) और रेडियोलॉजिस्ट की भारी कमी है।

एआई तकनीक इस अंतर को पाटने में सेतु का काम करेगी:

  1. प्राइमरी हेल्थ सेंटर (PHC) में सुविधा: अब गांवों के छोटे अस्पतालों में भी एक्स-रे मशीन के साथ एआई सॉफ्टवेयर जोड़ा जा सकेगा।

  2. त्वरित विश्लेषण: एआई सॉफ्टवेयर सेकंडों में हजारों स्कैन का विश्लेषण कर सकता है और संदिग्ध गांठ या ट्यूमर की पहचान कर सकता है, जिसे मानवीय आंखों से शायद पहली बार में पहचानना मुश्किल हो।

  3. समय की बचत: रिपोर्ट तैयार होने में लगने वाला समय कम होगा, जिससे इलाज तुरंत शुरू किया जा सकेगा।


सटीकता और दक्षता में सुधार

कैंसर के शुरुआती चरणों (Stage 1 & 2) में ट्यूमर बहुत छोटा होता है। एआई एल्गोरिदम लाखों मेडिकल छवियों पर प्रशिक्षित होते हैं, जिससे वे सूक्ष्म से सूक्ष्म असामान्यताओं को भी पकड़ सकते हैं। केंद्र सरकार की ये गाइडलाइन्स यह सुनिश्चित करेंगी कि केवल उच्च गुणवत्ता वाले और प्रमाणित एआई टूल्स ही भारतीय अस्पतालों में उपयोग किए जाएं, जिससे गलत रिपोर्ट (False Positive/Negative) की संभावना कम से कम हो।


भविष्य की राह: ‘आयुष्मान भारत’ के साथ एकीकरण

सरकार की योजना इन एआई उपकरणों को ‘डिजिटल हेल्थ मिशन’ और ‘आयुष्मान भारत’ के साथ एकीकृत करने की है। इससे सरकारी अस्पतालों में आने वाले गरीब मरीजों को भी विश्वस्तरीय कैंसर स्क्रीनिंग की सुविधा मिल सकेगी।

[Image: Digital healthcare concept showing AI scanning a human body for cancer detection]


निष्कर्ष

कैंसर के निदान के लिए एआई गाइडलाइन्स का आना भारत की स्वास्थ्य सेवा में एक ‘गेम-चेंजर’ साबित होगा। तकनीक और विशेषज्ञता का यह संगम कैंसर के कारण होने वाली मृत्यु दर को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत इस तकनीक को प्रभावी ढंग से लागू करता है, तो अगले पांच वर्षों में कैंसर की समय पर पहचान की दर में 40% से 50% तक का सुधार देखा जा सकता है।

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