
नई दिल्ली। भारत अब केवल अपनी तकनीकी प्रगति या आर्थिक विकास के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया के ‘औषधालय’ और ‘अस्पताल’ के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। ‘मेडिकल वैल्यू ट्रैवल’ (MVT) के क्षेत्र में भारत की बढ़ती शक्ति को रेखांकित करते हुए सरकार ने इसे एक रणनीतिक प्राथमिकता घोषित किया है।
1. आधुनिक चिकित्सा और आयुष (AYUSH) का अनूठा संगम
भारत की सबसे बड़ी ताकत इसकी एकीकृत स्वास्थ्य सेवा (Integrated Healthcare) प्रणाली है। जहाँ दुनिया के विकसित देश केवल एलोपैथी पर निर्भर हैं, वहीं भारत:
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विश्व स्तरीय एलोपैथी: जटिल कार्डियक सर्जरी, ऑन्कोलॉजी (कैंसर उपचार), और ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए भारत में अत्याधुनिक तकनीक और कुशल सर्जन उपलब्ध हैं।
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पारंपरिक आयुष प्रणाली: आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी के माध्यम से भारत ‘वेलनेस’ और ‘क्रोनिक डिजीज’ के प्रबंधन में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। मंत्री नड्डा के अनुसार, विदेशी मरीज अब केवल सर्जरी के लिए नहीं, बल्कि सर्जरी के बाद ‘आयुर्वेदिक रिकवरी’ और ‘योग आधारित पुनर्वास’ के लिए भी भारत को चुन रहे हैं।
2. लागत प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण उपचार
भारत में इलाज की लागत अमेरिका या यूरोप की तुलना में 60% से 80% तक कम है। उदाहरण के तौर पर, अमेरिका में जिस हार्ट बाईपास सर्जरी की लागत $100,000 से अधिक हो सकती है, वही भारत के शीर्ष अस्पतालों में $5,000 से $8,000 के बीच उच्च गुणवत्ता के साथ उपलब्ध है। यही कारण है कि अफ्रीकी, एशियाई और अब खाड़ी देशों के मरीज बड़ी संख्या में भारत आ रहे हैं।
3. ‘हील इन इंडिया’ पहल और सरकारी प्रयास
सरकार ने विदेशी मरीजों के अनुभव को सुगम बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
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मेडिकल वीजा का सरलीकरण: अब 160 से अधिक देशों के नागरिकों के लिए ‘ई-मेडिकल वीजा’ की सुविधा उपलब्ध है, जिससे इलाज के लिए भारत आना बहुत आसान हो गया है।
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वन-स्टॉप पोर्टल: ‘हील इन इंडिया’ (Heal in India) पोर्टल के माध्यम से विदेशी मरीज अस्पतालों की साख, इलाज की लागत और वीजा प्रक्रिया की जानकारी एक ही स्थान पर प्राप्त कर सकते हैं।
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नियामक सुधार: अस्पतालों के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NABH) और अंतरराष्ट्रीय (JCI) मानकों को अनिवार्य किया जा रहा है ताकि गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।
4. अर्थव्यवस्था पर प्रभाव और रोजगार सृजन
मेडिकल वैल्यू ट्रैवल न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करता है, बल्कि यह विदेशी मुद्रा भंडार और पर्यटन क्षेत्र के लिए भी एक बड़ा प्रोत्साहन है। इसके विस्तार से:
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स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में लाखों नए रोजगार (डॉक्टर्स, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, और अनुवादक) पैदा हो रहे हैं।
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हॉस्पिटैलिटी और एविएशन सेक्टर को भी इससे सीधा लाभ मिल रहा है।
5. चुनौतियाँ और भविष्य की राह
विस्तार के साथ-साथ कुछ चुनौतियाँ भी हैं, जैसे अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों के साथ समन्वय और मरीजों की सुरक्षा के लिए कड़े कानूनी ढाँचे की आवश्यकता। केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार इन मुद्दों पर राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि भारत को ‘विश्व गुरु’ के साथ-साथ ‘विश्व का आरोग्य केंद्र’ बनाया जा सके।
निष्कर्ष: ‘एडवांटेज हेल्थ केयर – इंडिया 2026’ इस बात का प्रमाण है कि भारत अपनी प्राचीन विरासत और आधुनिक विज्ञान के संगम से मानवता की सेवा के लिए तैयार है। ‘हील इन इंडिया’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सेवा के लोकतांत्रिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।