
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग अब केवल डेटा प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गंभीर बीमारियों के निदान और सटीक उपचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी क्षमता को सुव्यवस्थित करने के लिए सरकार ने यह नया रोडमैप तैयार किया है।
1. SAHI (Strategy for AI in Healthcare for India)
SAHI एक व्यापक रणनीतिक ढांचा है जिसे भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के भीतर AI को सुरक्षित और नैतिक रूप से लागू करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
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नैतिक उपयोग और गोपनीयता: SAHI का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि AI का उपयोग करते समय मरीजों के डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो। यह ‘प्राइवेसी बाय डिज़ाइन’ (Privacy by Design) के सिद्धांत पर काम करेगा।
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समान पहुँच: यह रणनीति सुनिश्चित करेगी कि AI के लाभ केवल बड़े शहरी अस्पतालों तक सीमित न रहें, बल्कि दूर-दराज के गाँवों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) तक भी पहुँचें।
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मानकीकरण: SAHI स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, टेक कंपनियों और शोधकर्ताओं के लिए एक मानक दिशा-निर्देश (Guidelines) प्रदान करेगा, ताकि AI टूल्स की विश्वसनीयता बनी रहे।
2. BODH (Benchmarking Open Data Platform for Health AI)
BODH एक तकनीकी प्लेटफॉर्म है जो भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए AI मॉडल के विकास और परीक्षण के तरीके को बदल देगा।
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सुरक्षित डेटा मूल्यांकन: BODH की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह ‘प्राइवेसी-प्रिजर्विंग’ तकनीकों का उपयोग करता है। यह डेवलपर्स को संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा साझा किए बिना अपने AI मॉडल की सटीकता का परीक्षण और मूल्यांकन करने की अनुमति देता है।
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ओपन डेटा इकोसिस्टम: यह प्लेटफॉर्म शोधकर्ताओं के लिए एक बेंचमार्क (मानक) सेट करेगा, जिससे यह पता लगाया जा सके कि कौन सा AI मॉडल वास्तविक भारतीय परिस्थितियों में सबसे बेहतर काम कर रहा है।
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इनोवेशन को बढ़ावा: BODH के माध्यम से स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों को उच्च गुणवत्ता वाले डेटा तक पहुँच मिलेगी, जिससे वे भारत-विशिष्ट बीमारियों (जैसे सिकल सेल एनीमिया या टीबी) के लिए एआई समाधान विकसित कर सकेंगे।
भारत के लिए इसके मायने
इन पहलों के लॉन्च होने से आम नागरिक के जीवन में कई बदलाव आएंगे:
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सटीक निदान: एआई की मदद से कैंसर या हृदय रोगों का पता शुरुआती चरणों में ही लगाया जा सकेगा, जिससे मृत्यु दर में कमी आएगी।
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लागत में कमी: एआई द्वारा संचालित स्वचालन (Automation) से डायग्नोस्टिक्स की लागत कम होगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती होंगी।
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डॉक्टरों का बोझ कम होगा: प्रशासनिक कार्यों और शुरुआती स्कैनिंग में एआई की मदद मिलने से डॉक्टर अपना अधिक समय मरीजों के वास्तविक उपचार में बिता सकेंगे।
मंत्री का संबोधन
लॉन्च के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “भारत ने डिजिटल भुगतान (UPI) में दुनिया का नेतृत्व किया है, और अब हम SAHI और BODH के माध्यम से ‘AI-फर्स्ट’ स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में विश्व का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। हमारा लक्ष्य ‘अंत्योदय’ है—यानी कतार में खड़े आखिरी व्यक्ति तक आधुनिक तकनीक का लाभ पहुंचाना।”
निष्कर्ष: SAHI और BODH केवल तकनीकी शब्द नहीं हैं, बल्कि ये एक स्वस्थ भारत के निर्माण की नींव हैं। ये पहल भारत की विशाल आबादी के लिए स्वास्थ्य सेवा को अधिक सुलभ, विश्वसनीय और आधुनिक बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी।