
फरवरी का आधा महीना बीतते-बीतते उत्तर भारत, विशेषकर राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में मौसम ने करवट बदल ली है। जहाँ एक ओर कड़ाके की ठंड विदा हो रही है, वहीं दूसरी ओर ‘सीजन ट्रांजिशन’ (ऋतु परिवर्तन) ने स्वास्थ्य संबंधी नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। वर्तमान में दिन का तापमान 28°C तक जा रहा है, जबकि रातें अब भी ठंडी हैं। मौसम का यह दोहरा मिजाज मानव शरीर के लिए अनुकूल नहीं होता, जिसके कारण घर-घर में लोग सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार और गले के संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं।
तापमान का उतार-चढ़ाव और शरीर की प्रतिक्रिया
जब हम ठंड से गर्मी की ओर बढ़ते हैं, तो हमारा शरीर तापमान को संतुलित करने (Thermoregulation) की कोशिश करता है। दोपहर की तेज धूप में शरीर की नसें फैलती हैं और पसीना आता है, लेकिन शाम होते ही तापमान गिर जाता है। ऐसे में अचानक ठंडी हवा के संपर्क में आने से प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) क्षणिक रूप से कमजोर पड़ जाती है। यही वह समय होता है जब राइनोवायरस और इन्फ्लुएंजा जैसे वायरस सबसे अधिक सक्रिय होते हैं।
अस्पतालों में बढ़ती भीड़: वायरल और फ्लू का प्रकोप
श्रीगंगानगर के स्थानीय अस्पतालों और निजी क्लीनिकों की ओपीडी में पिछले एक हफ्ते में मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। डॉक्टरों के अनुसार, गले में खराश, सूखी खांसी और बदन दर्द के साथ तेज बुखार के मामले सबसे ज्यादा आ रहे हैं।
वरिष्ठ चिकित्सकों का कहना है:
“इस मौसम में लोग अक्सर दोपहर की धूप देखकर गरम कपड़े पहनना छोड़ देते हैं या ठंडा पानी पीना शुरू कर देते हैं। यही लापरवाही बीमारियों का मुख्य कारण बनती है। विशेषकर दमा (Asthma) और एलर्जी के मरीजों के लिए यह समय काफी संवेदनशील होता है।”
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की ‘सुरक्षा गाइड’ और बचाव के उपाय
1. खान-पान और हाइड्रेशन (डिहाइड्रेशन से बचाव): बदलते मौसम में शरीर में पानी की कमी (Dehydration) जल्दी होती है। भले ही आपको प्यास न लगे, लेकिन दिन भर में 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं। गुनगुना पानी पीना इस समय गले के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प है।
2. प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टर्स: विशेषज्ञों ने डाइट में तीन जादुई चीजों को शामिल करने पर जोर दिया है:
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अदरक: इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो श्वसन तंत्र को साफ रखते हैं।
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तुलसी: तुलसी के पत्तों का सेवन फेफड़ों के संक्रमण से लड़ने में मदद करता है।
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शहद: यह गले की परत पर एक सुरक्षा कवच बनाता है और खांसी में तुरंत राहत देता है।
3. लेयरिंग (कपड़ों का सही चुनाव): एकदम से भारी ऊनी कपड़े न छोड़ें। इसके बजाय ‘लेयरिंग’ करें। यानी अंदर एक सूती टी-शर्ट और ऊपर से एक जैकेट या स्वेटर पहनें, जिसे गर्मी लगने पर उतारा जा सके और ठंड लगने पर वापस पहना जा सके।
4. व्यक्तिगत स्वच्छता (Personal Hygiene): वायरल संक्रमण से बचने के लिए नियमित रूप से हाथ धोना और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए। यदि परिवार में कोई एक व्यक्ति बीमार है, तो उसके बर्तन और तौलिया अलग रखें ताकि संक्रमण न फैले।
जीवनशैली में जरूरी बदलाव
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योग और प्राणायाम: अनुलोम-विलोम और भस्त्रिका प्राणायाम फेफड़ों की क्षमता बढ़ाते हैं, जिससे बदलते मौसम का असर कम होता है।
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नींद: शरीर को रिकवर करने के लिए 7-8 घंटे की गहरी नींद बहुत जरूरी है।
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बाहर का खाना: सड़क किनारे मिलने वाले कटे हुए फल या ठंडे पेय पदार्थों से परहेज करें।
निष्कर्ष: बदलता मौसम वसंत के स्वागत का समय है, लेकिन यह अपनी सेहत के प्रति लापरवाह होने का समय नहीं है। श्रीगंगानगर के निवासियों को सलाह दी जाती है कि वे धूप का आनंद लें लेकिन ठंड की वापसी से भी सतर्क रहें। यदि बुखार 2-3 दिन से ज्यादा रहे, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें और खुद से दवाइयां (Self-medication) न लें।