
आगामी 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले, देश के स्वास्थ्य गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है। मेडिकल एक्सपर्ट्स, नीति निर्माताओं और प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘लांसेट कमीशन’ (The Lancet Commission) ने भारत सरकार से इस बार स्वास्थ्य बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी करने की पुरजोर सिफारिश की है।
आज, 25 जनवरी 2026 को जारी विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, विशेषज्ञों का एक ही सुर में कहना है कि यदि भारत को ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करना है, तो उसे अपनी आबादी की शारीरिक और मानसिक सेहत पर निवेश बढ़ाना ही होगा।
जीडीपी का 2.5% खर्च करने का लक्ष्य
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (NHP) 2017 में यह लक्ष्य रखा गया था कि सरकार स्वास्थ्य पर होने वाले सार्वजनिक खर्च को जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के 2.5% तक ले जाएगी। हालांकि, वर्तमान में यह आंकड़ा लगभग 1.6% से 1.9% के बीच झूल रहा है।
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आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च (OOPE): भारत में आज भी स्वास्थ्य पर होने वाले कुल खर्च का लगभग 45-50% हिस्सा आम आदमी को अपनी जेब से देना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बजट में 2.5% की वृद्धि होती है, तो यह बोझ कम होकर 30% से नीचे आ सकता है।
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शहरीकरण का दबाव: तेजी से बढ़ते शहरों में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे (Infrastrucure) की भारी कमी है। मलिन बस्तियों और शहरी निम्न-मध्यम वर्ग के लिए सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है।
लांसेट कमीशन की सिफारिशें: तीन प्रमुख स्तंभ
लांसेट की हालिया रिपोर्ट में बजट 2026 के लिए तीन मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है:
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) का सुदृढ़ीकरण: ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में स्थित प्राथमिक केंद्रों को ‘हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स’ में बदलने के लिए अधिक फंड की आवश्यकता है।
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जीवन प्रत्याशा और गैर-संचारी रोग (NCDs): भारत में औसत आयु (Life Expectancy) बढ़ रही है, जिसके कारण मधुमेह (Diabetes), कैंसर और हृदय रोगों के मामलों में उछाल आया है। इनके दीर्घकालिक इलाज के लिए एक विशेष ‘क्रोनिक केयर फंड’ की मांग की गई है।
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डिजिटल हेल्थ मिशन: ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी निवेश की जरूरत है, ताकि हर नागरिक का स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल हो और इलाज में देरी न हो।
स्वास्थ्य क्षेत्र की अन्य प्रमुख मांगें
मेडिकल एसोसिएशन और उद्योग जगत ने सरकार के सामने कुछ और महत्वपूर्ण बिंदु रखे हैं:
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मेडिकल उपकरणों पर GST में कमी: कैंसर और डायलिसिस जैसी गंभीर बीमारियों के उपकरणों पर टैक्स कम करने की मांग की गई है ताकि निजी अस्पतालों में भी इलाज सस्ता हो सके।
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अनुसंधान और विकास (R&D): नई दवाओं और टीकों की खोज के लिए फार्मा सेक्टर को विशेष टैक्स छूट और प्रोत्साहन देने की जरूरत है।
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नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा: डॉक्टरों के साथ-साथ नर्सिंग स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए नए शिक्षण संस्थानों के लिए बजट आवंटन।
विशेषज्ञ की राय: “स्वास्थ्य पर किया गया खर्च ‘व्यय’ नहीं, बल्कि ‘निवेश’ है। एक स्वस्थ कार्यबल ही देश की अर्थव्यवस्था को गति दे सकता है। बजट 2026 में हमें केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि ठोस क्रियान्वयन (Execution) की उम्मीद है।”
निष्कर्ष
बजट 2026 भारत के स्वास्थ्य भविष्य के लिए एक ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हो सकता है। बढ़ती जीवन प्रत्याशा और नई महामारियों के खतरों के बीच, सरकार के सामने चुनौती है कि वह राजकोषीय घाटे को संतुलित करते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र की इन वाजिब मांगों को कैसे पूरा करती है।