
नई दिल्ली। भारत सरकार द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026 ने देश की स्वास्थ्य प्रणाली को एक नई दिशा देने का प्रयास किया है। वित्त मंत्री द्वारा घोषित प्रावधानों में सबसे अधिक ध्यान ‘सस्ती स्वास्थ्य सेवा’ (Affordable Healthcare) पर दिया गया है। सरकार ने इस वर्ष के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र का कुल बजट बढ़ाकर 1.06 लाख करोड़ रुपये कर दिया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12% अधिक है। इस बजट की सबसे बड़ी घोषणा कैंसर और दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आई है।
कैंसर की दवाओं पर सीमा शुल्क (Customs Duty) समाप्त
कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज न केवल शारीरिक बल्कि आर्थिक रूप से भी परिवारों को तोड़ देता है। बजट 2026 में सरकार ने 17 प्रमुख कैंसर रोधी दवाओं पर लगने वाले सीमा शुल्क को पूरी तरह से माफ करने का निर्णय लिया है।
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मरीजों को लाभ: इन दवाओं में से कई दवाएं विदेशों से आयात की जाती थीं, जिन पर भारी टैक्स लगने के कारण उनकी कीमत आम आदमी की पहुँच से बाहर थी। टैक्स हटने से इन जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों में 15% से 25% तक की कमी आने की संभावना है।
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प्रमुख दवाएं: इनमें मुख्य रूप से ब्रेस्ट कैंसर, लंग कैंसर और ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक ‘इम्यूनोथेरेपी’ दवाएं शामिल हैं।
दुर्लभ बीमारियों (Rare Diseases) के लिए विशेष प्रावधान
भारत में लाखों लोग ऐसी दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित हैं जिनके इलाज के लिए एक-एक इंजेक्शन की कीमत करोड़ों में होती है। बजट में 7 ऐसी दुर्लभ बीमारियों की दवाओं पर भी सीमा शुल्क हटा दिया गया है।
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स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) और डचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी बीमारियों के इंजेक्शन अब कम कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगे।
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इससे उन परिवारों को संबल मिलेगा जो धन के अभाव में अपने बच्चों का इलाज नहीं करवा पा रहे थे।
स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे पर निवेश
1.06 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट का उपयोग केवल दवाओं की छूट तक सीमित नहीं है। सरकार ने निम्नलिखित क्षेत्रों में भी निवेश की योजना बनाई है:
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नए मेडिकल कॉलेज: टियर-2 और टियर-3 शहरों में चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नए संस्थानों की स्थापना।
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आयुष्मान भारत का विस्तार: आयुष्मान भारत योजना के तहत अब गंभीर बीमारियों के पैकेज में और अधिक प्रक्रियाओं को जोड़ा जाएगा, जिससे गरीब परिवारों का कवरेज बढ़ेगा।
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डिजिटल हेल्थ मिशन: ‘आभा’ (ABHA) आईडी और डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड के प्रबंधन के लिए तकनीकी ढांचे को मजबूत किया जाएगा।
दवा उद्योग (Pharma Industry) पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि कस्टम ड्यूटी में छूट से घरेलू दवा कंपनियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। दवाओं के कच्चे माल (API) के आयात पर भी कुछ रियायतें दी गई हैं, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ के तहत सस्ती जेनेरिक दवाओं का उत्पादन बढ़ेगा। इससे भारत के ग्लोबल ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ होने का दर्जा और मजबूत होगा।
निष्कर्ष
बजट 2026 स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक समावेशी बजट है। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के इलाज को सस्ता करना सरकार की एक बड़ी मानवीय पहल है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बजट आवंटन के साथ-साथ जमीनी स्तर पर इन सुविधाओं को पहुँचाना और अस्पतालों की गुणवत्ता में सुधार करना असली चुनौती होगी।