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‘प्रिवेंटिव हेल्थकेयर’ 2026 की नई क्रांति: इलाज से बेहतर अब बचाव पर जोर

नई दिल्ली। चिकित्सा जगत में एक पुरानी कहावत है—”बचाव उपचार से बेहतर है” (Prevention is better than cure)। वर्ष 2026 में यह कहावत केवल एक विचार नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की जीवनशैली का हिस्सा बन चुकी है। स्वास्थ्य मंत्रालय की नवीनतम रिपोर्ट और विशेषज्ञों के सुझावों से स्पष्ट है कि भारत अब निवारक स्वास्थ्य सेवा (Preventive Healthcare) की दिशा में एक बड़े बदलाव का साक्षी बन रहा है।


आंकड़ों में स्वास्थ्य सुधार: 495 करोड़ का आंकड़ा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी हालिया आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। देश भर में स्थापित आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों (HWC) में अब तक 495 करोड़ से अधिक फुटफॉल (मरीजों का आगमन) दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि लोग अब केवल बीमार होने पर अस्पताल नहीं जा रहे, बल्कि अपनी सेहत की नियमित निगरानी के लिए इन केंद्रों का रुख कर रहे हैं।

इन केंद्रों पर उच्च रक्तचाप (Hypertension), मधुमेह (Diabetes) और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की शुरुआती स्क्रीनिंग पर जोर दिया जा रहा है। समय रहते बीमारी का पता चलने से न केवल इलाज का खर्च कम हो रहा है, बल्कि मृत्यु दर में भी बड़ी गिरावट आई है।

उपचार से ‘जागरूकता’ की ओर पलायन

2026 में भारतीय नागरिकों के व्यवहार में एक सकारात्मक बदलाव देखा गया है। लोग अब गंभीर बीमारियों के महंगे इलाज के बजाय निम्नलिखित निवारक उपायों को प्राथमिकता दे रहे हैं:

  1. नियमित स्वास्थ्य जांच: अब लोग साल में कम से कम एक बार ‘फुल बॉडी चेकअप’ को अपने वार्षिक खर्चों में शामिल कर रहे हैं।

  2. टीकाकरण का महत्व: कोविड-19 के बाद से वयस्कों में इन्फ्लुएंजा, निमोनिया और सर्वाइकल कैंसर के टीकों के प्रति जागरूकता बढ़ी है।

  3. डिजिटल हेल्थ मॉनिटरिंग: स्मार्टवॉच और हेल्थ ऐप्स के जरिए लोग अपने हार्ट रेट, ऑक्सीजन और स्लीप साइकिल पर खुद नजर रख रहे हैं।

विशेषज्ञों का नया मंत्र: ‘7-7-7 का नियम’

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने वर्ष 2026 के लिए एक बेहद सरल लेकिन प्रभावशाली फॉर्मूला पेश किया है, जिसे ‘7-7-7 का नियम’ कहा जा रहा है। जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों (Lifestyle Diseases) को दूर रखने के लिए यह नियम एक ‘हेल्थ रिवोल्यूशन’ साबित हो सकता है:

  • 7 घंटे की नींद: मानसिक स्वास्थ्य और शरीर की रिकवरी के लिए कम से कम 7 घंटे की गहरी नींद अनिवार्य है।

  • 7000 कदम पैदल: प्रतिदिन कम से कम 7000 कदम चलना हृदय रोगों और मोटापे के खतरे को 50% तक कम कर देता है।

  • शाम 7 बजे के बाद भोजन नहीं: सूर्यास्त के आसपास या शाम 7 बजे तक भोजन कर लेने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और मेटाबॉलिज्म सुधरता है।


भविष्य की राह

भारत सरकार का लक्ष्य ‘हेल्थ फॉर ऑल’ के तहत प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को गांव-गांव तक पहुंचाना है। टेली-कंसल्टेशन और ई-संजीवनी जैसी सेवाओं ने दूर-दराज के इलाकों में भी विशेषज्ञों की सलाह सुलभ करा दी है। 2026 में प्रिवेंटिव हेल्थकेयर का यह बढ़ता चलन न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को बेहतर बना रहा है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर स्वास्थ्य खर्च के बोझ को भी कम कर रहा है।

निष्कर्ष: आज का समाज अब ‘बीमारी के प्रबंधन’ (Disease Management) से हटकर ‘स्वास्थ्य के प्रबंधन’ (Health Management) की ओर बढ़ रहा है। यदि हम ‘7-7-7’ जैसे सरल संकल्पों को अपनाते हैं, तो 2026 वास्तव में भारत के लिए एक स्वस्थ भविष्य की नींव रखेगा।

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