
नई दिल्ली में आयोजित दूसरे वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन (Global Traditional Medicine Summit) ने एक ऐतिहासिक क्षण देखा जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आधिकारिक तौर पर ‘ट्रेडिशनल मेडिसिन ग्लोबल लाइब्रेरी’ (TMGL) को लॉन्च किया। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच एक सेतु का काम करेगा, जो सदियों पुराने उपचारों को 21वीं सदी की वैज्ञानिक कसौटी पर पेश करेगा।
इस लाइब्रेरी का शुभारंभ भारत के लिए विशेष गौरव का विषय है, क्योंकि इसकी नींव में भारत की ‘आयुष’ (AYUSH) प्रणालियों का गहरा योगदान है।
क्या है ट्रेडिशनल मेडिसिन ग्लोबल लाइब्रेरी?
यह एक विशाल डिजिटल भंडार है जहाँ दुनिया भर की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध होगी। इस लाइब्रेरी की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
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ज्ञान का एकीकरण: इसमें भारत की प्राचीन प्रणालियों—आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी—के दुर्लभ पांडुलिपियों, जड़ी-बूटियों के विवरण और उपचार विधियों को संग्रहित किया गया है।
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वैज्ञानिक साक्ष्य (Scientific Evidence): केवल प्राचीन उपचार ही नहीं, बल्कि उन पर हुए आधुनिक क्लिनिकल ट्रायल और शोध पत्रों को भी यहाँ जगह दी गई है। यह दुनिया भर के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करेगा कि ये पद्धतियां वैज्ञानिक रूप से कैसे काम करती हैं।
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बौद्धिक संपदा का संरक्षण: यह लाइब्रेरी पारंपरिक ज्ञान की चोरी (Bio-piracy) को रोकने में मदद करेगी। अब कोई भी विदेशी संस्था भारत के प्राचीन ज्ञान को अपना नया आविष्कार बताकर पेटेंट नहीं करा सकेगी।
भारत की ‘आयुष’ प्रणालियों को वैश्विक पहचान
इस ग्लोबल लाइब्रेरी के माध्यम से भारत की चिकित्सा विरासत को विश्व स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी:
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आयुर्वेद: जड़ी-बूटियों और आहार के माध्यम से शरीर के असंतुलन को ठीक करने की इस पद्धति को अब वैश्विक स्तर पर एक प्रामाणिक उपचार माना जाएगा।
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योग: केवल शारीरिक व्यायाम के बजाय, योग के मानसिक और आध्यात्मिक लाभों पर उपलब्ध शोध अब दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए उपलब्ध होंगे।
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सिद्ध और यूनानी: इन प्रणालियों के पास पुरानी बीमारियों (Chronic diseases) का जो अनूठा समाधान है, उसे वैश्विक स्वास्थ्य नीतियों में शामिल होने का मौका मिलेगा।
वैश्विक स्वास्थ्य पर प्रभाव
WHO के महानिदेशक के अनुसार, दुनिया की लगभग 80% आबादी किसी न किसी रूप में पारंपरिक चिकित्सा का उपयोग करती है। ऐसे में इस लाइब्रेरी का महत्व और बढ़ जाता है:
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एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल (Integrative Healthcare): यह लाइब्रेरी एलोपैथी के साथ-साथ पारंपरिक उपचारों को अपनाने के लिए डॉक्टरों को प्रोत्साहित करेगी, जिससे ‘होलिस्टिक वेलनेस’ (संपूर्ण स्वास्थ्य) का लक्ष्य प्राप्त हो सके।
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सस्ती चिकित्सा: पारंपरिक उपचार अक्सर किफायती होते हैं। वैश्विक स्तर पर इनकी पहुंच बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाला खर्च कम होगा।
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डेटा-आधारित निर्णय: शोधकर्ता इस लाइब्रेरी के डेटा का उपयोग करके नई दवाएं विकसित कर सकेंगे, जो सुरक्षित और प्रभावी होंगी।
निष्कर्ष
‘ट्रेडिशनल मेडिसिन ग्लोबल लाइब्रेरी’ का लॉन्च होना इस बात का प्रमाण है कि भविष्य की चिकित्सा पद्धति केवल आधुनिक मशीनों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें हमारी जड़ों का ज्ञान भी शामिल होगा। भारत की आयुष प्रणालियों को इस वैश्विक मंच पर स्थान मिलना न केवल देश की सांस्कृतिक जीत है, बल्कि यह मानवता के लिए एक स्वस्थ कल की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अब आयुर्वेद का ‘काढ़ा’ हो या योग का ‘प्राणायाम’, इन्हें अंधविश्वास नहीं बल्कि प्रमाणित विज्ञान के रूप में दुनिया अपनाएगी।