
कोलकाता/नई दिल्ली। देश में एक बार फिर वायरस का खतरा मंडराने लगा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों में निपाह वायरस (NiV) के 5 पुष्ट मामले सामने आने के बाद राज्य में ‘हाई अलर्ट’ जारी कर दिया है। यह वायरस अपनी उच्च मृत्यु दर और तेजी से फैलने की क्षमता के कारण बेहद खतरनाक माना जाता है। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संक्रमितों के संपर्क में आए लगभग 100 लोगों को चिन्हित कर उन्हें क्वारंटाइन कर दिया है, ताकि संक्रमण की श्रृंखला (Chain) को तोड़ा जा सके।
क्या है निपाह वायरस और यह कितना घातक है?
निपाह वायरस एक ‘ज़ूनोटिक’ (Zoonotic) वायरस है, जिसका अर्थ है कि यह जानवरों से इंसानों में फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इस वायरस की मृत्यु दर 40% से 75% के बीच होती है, जो इसे कोरोना वायरस से भी कहीं अधिक जानलेवा बनाती है।
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प्राकृतिक स्रोत: यह मुख्य रूप से ‘फ्रूट बैट्स’ (फल खाने वाले चमगादड़) और सुअरों के जरिए फैलता है।
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फैलने का तरीका: यदि कोई व्यक्ति ऐसे फल खाता है जिसे संक्रमित चमगादड़ ने चखा हो या वह संक्रमित सुअरों के सीधे संपर्क में आता है, तो वह इसकी चपेट में आ सकता है। इसके अलावा, संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थ (थूक या पसीना) के संपर्क में आने से भी यह एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है।
पश्चिम बंगाल में वर्तमान स्थिति
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, संक्रमित पाए गए पांचों मरीज बंगाल के सीमावर्ती जिलों से हैं। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में रैपिड रिस्पांस टीमें (RRT) तैनात की हैं।
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निगरानी: प्रभावित गांवों के 3 किलोमीटर के दायरे को ‘कंटेनमेंट जोन’ की तरह मॉनिटर किया जा रहा है।
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क्वारंटाइन: जिन 100 लोगों को आइसोलेशन में रखा गया है, उनमें मरीजों के परिवार के सदस्य और इलाज करने वाले कुछ स्वास्थ्य कर्मी भी शामिल हैं।
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नमूना जांच: संदिग्ध मरीजों के नमूने पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजे गए हैं।
लक्षण और उपचार
निपाह वायरस के लक्षण शुरुआत में सामान्य फ्लू जैसे लगते हैं, जो भ्रम पैदा कर सकते हैं:
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तेज बुखार और सिरदर्द।
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सांस लेने में तकलीफ और खांसी।
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गंभीर मामलों में दिमागी सूजन (Encephalitis), जिससे मरीज को दौरे पड़ सकते हैं या वह कोमा में जा सकता है। महत्वपूर्ण: वर्तमान में निपाह वायरस के लिए कोई विशेष टीका (Vaccine) या दवा उपलब्ध नहीं है। इसका इलाज केवल ‘सपोर्टिव केयर’ और लक्षणों के आधार पर किया जाता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी: क्या करें और क्या न करें?
सरकार ने जनता से घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की है:
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फलों की सावधानी: पेड़ों से गिरे हुए फल बिल्कुल न खाएं। बाजार से लाए गए फलों को अच्छी तरह धोकर और छीलकर ही खाएं।
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पेय पदार्थ: खजूर का कच्चा रस (ताड़ी) पीने से बचें, क्योंकि चमगादड़ अक्सर इन पेड़ों पर डेरा डालते हैं।
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दूरी बनाए रखें: बीमार जानवरों (विशेषकर सुअर और चमगादड़) के संपर्क में आने से बचें।
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स्वच्छता: नियमित रूप से साबुन से हाथ धोएं और भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क का प्रयोग करें।
निष्कर्ष
पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र मिलकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते पहचान और आइसोलेशन ही इस वायरस को रोकने का एकमात्र तरीका है। यदि आपको या आपके आस-पास किसी को तेज बुखार के साथ भ्रम की स्थिति महसूस हो, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।