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पश्चिम बंगाल में ‘निपाह’ का साया: स्वास्थ्य विभाग का हाई अलर्ट और बचाव की तैयारी

आज, 25 जनवरी 2026, पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य गलियारों में हड़कंप मच गया है। कोलकाता और विशेष रूप से बारासात (उत्तर 24 परगना) क्षेत्र में निपाह वायरस (NiV) के 5 पुष्ट मामलों की पुष्टि होने के बाद राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से ‘पब्लिक हेल्थ अलर्ट’ जारी कर दिया है। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब संक्रमितों में एक निजी अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मी भी शामिल पाए गए।


संक्रमण की शुरुआत और वर्तमान स्थिति

रिपोर्ट्स के अनुसार, संक्रमण का पहला मामला पिछले सप्ताह सामने आया था, जिसे शुरुआत में सामान्य वायरल बुखार समझा गया। हालांकि, मरीज की स्थिति तेजी से बिगड़ने और न्यूरोलॉजिकल लक्षण (दिमागी बुखार) दिखने के बाद जब नमूनों की जांच पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) में की गई, तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

  • क्वारंटाइन का दायरा: संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आए लगभग 100 लोगों की पहचान कर उन्हें आइसोलेशन में रखा गया है।

  • अस्पताल अलर्ट: कोलकाता के प्रमुख अस्पतालों में ‘निपाह वार्ड’ आरक्षित कर दिए गए हैं और स्वास्थ्य कर्मियों को PPE किट अनिवार्य रूप से पहनने के निर्देश दिए गए हैं।


निपाह वायरस: क्यों है यह खतरनाक?

निपाह एक ज़ूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों (मुख्यतः फ्रूट बैट या फल खाने वाले चमगादड़) से इंसानों में फैलता है। इसकी गंभीरता को इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  1. उच्च मृत्यु दर: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, निपाह की मृत्यु दर 40% से 75% तक हो सकती है, जो इसे कोविड-19 से कहीं अधिक घातक बनाती है।

  2. लक्षण: शुरुआत में बुखार, सिरदर्द, और खांसी जैसे लक्षण दिखते हैं, लेकिन 24-48 घंटों के भीतर यह गंभीर एन्सेफलाइटिस (दिमाग में सूजन) और कोमा में बदल सकता है।

  3. इलाज का अभाव: वर्तमान में इस वायरस के लिए कोई विशिष्ट टीका (Vaccine) या दवा उपलब्ध नहीं है; केवल लक्षणों का उपचार (Supportive Care) ही संभव है।


केंद्र सरकार की एडवाइजरी

केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल की स्थिति को देखते हुए पड़ोसी राज्यों (ओडिशा, बिहार और झारखंड) को भी सतर्क रहने को कहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम’ (AES) के संदिग्ध मामलों की गहन निगरानी के निर्देश दिए हैं। डॉक्टरों को सलाह दी गई है कि यदि किसी मरीज में सांस की तकलीफ के साथ मानसिक भ्रम के लक्षण दिखें, तो तत्काल उसकी ट्रैवल हिस्ट्री चेक की जाए।


बचाव के लिए महत्वपूर्ण उपाय

प्रशासन ने आम जनता के लिए निम्नलिखित दिशानिर्देश जारी किए हैं:

  • फलों की जांच: जमीन पर गिरे हुए फल या ऐसे फल जिन पर दांतों के निशान हों, उन्हें बिल्कुल न खाएं।

  • खजूर का रस: कच्चे खजूर के रस (ताड़ी) के सेवन से बचें, क्योंकि चमगादड़ अक्सर इसे दूषित कर देते हैं।

  • हाथों की सफाई: संक्रमित व्यक्ति की देखभाल करते समय ग्लव्स और मास्क का प्रयोग करें और नियमित रूप से हाथ धोएं।

विशेषज्ञ की राय: “निपाह से डरने की नहीं, बल्कि अत्यधिक सावधानी की जरूरत है। यदि समय रहते मरीज को आइसोलेट कर दिया जाए, तो इसके प्रसार को रोका जा सकता है।”


निष्कर्ष

पश्चिम बंगाल में निपाह की दस्तक ने एक बार फिर वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा की संवेदनशीलता को उजागर किया है। अगले 72 घंटे राज्य के स्वास्थ्य विभाग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इसी दौरान अन्य संदिग्धों की टेस्ट रिपोर्ट आने वाली है।

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