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निपाह वायरस का साया: बंगाल में सतर्कता और WHO का आश्वासन

कोलकाता/बारासात: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बारासात क्षेत्र में दो स्वास्थ्य कर्मियों के निपाह वायरस (NiV) से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। इसके तुरंत बाद राज्य सरकार ने जिला प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। निपाह एक ‘जूनोटिक’ (Zoonotic) वायरस है, जो जानवरों से इंसानों में और फिर इंसानों से इंसानों में फैलता है।

1. संक्रमण का स्रोत और वर्तमान स्थिति

संक्रमित पाए गए दोनों व्यक्ति स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र से जुड़े हैं, जो प्राथमिक स्तर पर मरीजों के संपर्क में आए थे।

  • सर्विलांस: स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ‘कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग’ शुरू की। अब तक 190 से अधिक लोगों की पहचान की गई है जो इन मरीजों के संपर्क में आए थे।

  • राहत की खबर: राहत की बात यह है कि इन 190 लोगों में से अभी तक किसी में भी वायरस के लक्षण नहीं पाए गए हैं। सभी को आइसोलेशन में रखा गया है और उनकी निगरानी की जा रही है।

2. निपाह वायरस कैसे फैलता है?

निपाह वायरस का मुख्य स्रोत ‘फ्रूट बैट्स’ (फल खाने वाले चमगादड़) होते हैं।

  • यह चमगादड़ों के मूत्र, लार या मल से दूषित फलों (जैसे खजूर का रस) के सेवन से फैलता है।

  • इसके अलावा, यह संक्रमित सूअरों या संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से भी फैल सकता है।

3. WHO का दृष्टिकोण: क्यों घबराने की जरूरत नहीं है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यद्यपि निपाह वायरस की मृत्यु दर (Case Fatality Rate) 40% से 75% के बीच होती है, लेकिन भारत में वर्तमान बुनियादी ढांचा और त्वरित सर्विलांस प्रणाली इसे महामारी बनने से रोकने में सक्षम है।

  • सीमित प्रसार: WHO के अनुसार, निपाह वायरस आमतौर पर स्थानीय स्तर (Localized) पर ही फैलता है और यह हवा से फैलने वाला (Airborne) वायरस नहीं है।

  • तैयारी: भारत ने पिछले कुछ वर्षों में (विशेषकर केरल में) निपाह के प्रकोप को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है, जिससे हमारा स्वास्थ्य तंत्र अब इस तरह के खतरों के लिए अधिक तैयार है।

4. लक्षण और बचाव के उपाय

निपाह के लक्षण सामान्य इन्फ्लूएंजा जैसे हो सकते हैं, जो बाद में गंभीर रूप ले लेते हैं:

  • शुरुआती लक्षण: बुखार, सिरदर्द, खांसी और गले में खराश।

  • गंभीर लक्षण: सांस लेने में तकलीफ (Acute Respiratory Distress) और एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क में सूजन), जिससे मरीज कोमा में जा सकता है।

बचाव के लिए सावधानियां:

  1. जमीन पर गिरे हुए फल न खाएं।

  2. खजूर के कच्चे रस के सेवन से बचें।

  3. बीमार जानवरों (विशेषकर सूअर और चमगादड़) के संपर्क से दूर रहें।

  4. संक्रमित व्यक्तियों की देखभाल करते समय मास्क और ग्लव्स का प्रयोग करें।


निष्कर्ष: सतर्कता ही सुरक्षा है

पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमों की तैनाती कर दी है और लैब टेस्टिंग की गति बढ़ा दी है। हालांकि WHO ने जोखिम को कम बताया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य नियमों का पालन करना ही इस घातक वायरस से बचने का एकमात्र तरीका है।

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