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दिल्ली-NCR में ‘सांसों का संकट’: प्रदूषण और कड़ाके की ठंड ने बढ़ाई मुसीबत

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली और पूरे एनसीआर (NCR) क्षेत्र में सर्दियों के सितम के साथ-साथ ‘स्मॉग’ के जानलेवा मिश्रण ने स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर दी है। 30 दिसंबर 2025 तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के प्रमुख सरकारी और निजी अस्पतालों में सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में 20 से 30 प्रतिशत तक का भारी उछाल दर्ज किया गया है। कड़ाके की ठंड और जहरीली हवा के इस ‘डबल अटैक’ ने विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए जीवन कठिन बना दिया है।

प्रदूषण और ठंड का ‘घातक कॉकटेल’

दिसंबर के अंतिम सप्ताह में उत्तर भारत में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही हवा की गति धीमी होने के कारण वायु प्रदूषक कण, विशेषकर $PM_{2.5}$, जमीन के करीब एक मोटी परत (Inversion Layer) बना रहे हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि जब हवा बहुत ठंडी और भारी होती है, तो प्रदूषक कण वातावरण में ऊपर नहीं जा पाते। जब लोग इस ठंडी और प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं, तो ये सूक्ष्म कण फेफड़ों की गहराई तक जाकर सूजन पैदा कर देते हैं। यही कारण है कि इस समय अस्थमा (Asthma) और सीओपीडी (COPD) के मरीजों को सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है।


अस्पतालों में बढ़ता दबाव: नेबुलाइजर और ऑक्सीजन की बढ़ती मांग

दिल्ली के एम्स (AIIMS), सफदरजंग और आरएमएल जैसे बड़े अस्पतालों की ओपीडी (OPD) में हर तीसरा मरीज फेफड़ों के संक्रमण या पुरानी सांस की बीमारी बिगड़ने की शिकायत लेकर आ रहा है।

  • इमरजेंसी वार्ड की स्थिति: कई अस्पतालों के इमरजेंसी वार्डों में बेड की कमी देखी जा रही है। ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है जिन्हें तत्काल नेबुलाइजेशन (Nebulization) या शॉर्ट-टर्म ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता है।

  • बच्चों पर असर: बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों में ‘ब्रोंकाइटिस’ और लगातार खांसी के मामले बढ़े हैं। बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं, इसलिए प्रदूषित हवा उनके लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है।

  • बुजुर्गों के लिए खतरा: 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में सांस फूलने के साथ-साथ हृदय संबंधी समस्याएं भी देखी जा रही हैं, क्योंकि फेफड़ों पर दबाव पड़ने से दिल पर भी बोझ बढ़ जाता है।


$PM_{2.5}$ का कहर: सामान्य से 15-20 गुना अधिक स्तर

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों की तुलना में दिल्ली-NCR के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में बना हुआ है। कई हॉटस्पॉट्स पर $PM_{2.5}$ का स्तर 400 से 500 के पार पहुंच गया है। यह स्तर धूम्रपान न करने वाले व्यक्ति के लिए भी प्रतिदिन 15-20 सिगरेट पीने के बराबर नुकसानदेह है।

विशेषज्ञों की सलाह और बचाव के उपाय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस स्थिति से बचने के लिए “हेल्थ एडवाइजरी” जारी की है:

  1. बाहर जाने से बचें: विशेषकर सुबह और शाम के समय जब प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक होता है, घर से बाहर न निकलें।

  2. N-95 मास्क का प्रयोग: यदि बाहर जाना अनिवार्य हो, तो साधारण कपड़े के मास्क के बजाय N-95 मास्क का ही उपयोग करें।

  3. एयर प्यूरीफायर और वेंटिलेशन: घर के अंदर हवा को साफ रखने की कोशिश करें और अगर संभव हो तो एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।

  4. खान-पान: शरीर को हाइड्रेटेड रखें और विटामिन-सी युक्त फलों का सेवन करें ताकि इम्यूनिटी बनी रहे।


निष्कर्ष

प्रदूषण का यह संकट केवल एक मौसमी समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन गया है। जब तक मौसम में बड़ा बदलाव नहीं आता या प्रदूषण के स्रोतों पर कड़ी लगाम नहीं लगती, तब तक सांस के मरीजों के लिए यह ‘विंटर पीक’ जानलेवा बना रहेगा।

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