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दिल्ली में WHO ग्लोबल समिट: पारंपरिक चिकित्सा और अश्वगंधा के वैश्विक उदय का नया अध्याय

नई दिल्ली में आयोजित दूसरे WHO ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन का समापन एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। यह शिखर सम्मेलन न केवल भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है, बल्कि यह आधुनिक विज्ञान और परंपरा के मेल से एक ‘समग्र स्वास्थ्य मॉडल’ (Holistic Health Model) तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

अश्वगंधा: आधुनिक चिकित्सा में एक नया मानक

शिखर सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों के बीच चर्चा का मुख्य केंद्र अश्वगंधा जैसी औषधियाँ रहीं। पारंपरिक रूप से तनाव कम करने और ऊर्जा बढ़ाने के लिए उपयोग की जाने वाली इस जड़ी-बूटी को अब वैज्ञानिक कसौटी पर परखा जा रहा है। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि अश्वगंधा को केवल एक घरेलू नुस्खे के रूप में नहीं, बल्कि साक्ष्य-आधारित (Evidence-based) दवा के रूप में आधुनिक प्रिस्क्रिप्शन में शामिल किया जाना चाहिए। इसके ‘एडाप्टोजेनिक’ गुणों पर शोध की मांग बढ़ी है ताकि वैश्विक स्तर पर इसके सुरक्षित और प्रभावी उपयोग को बढ़ावा मिल सके।

कूटनीतिक सफलता और वैश्विक विस्तार

भारत ने इस मंच का उपयोग न केवल ज्ञान साझा करने के लिए, बल्कि स्वास्थ्य कूटनीति को मजबूत करने के लिए भी किया। सम्मेलन के दौरान:

  • 16 देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता: भारत ने दुनिया के विभिन्न देशों के साथ पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को साझा करने पर चर्चा की।

  • क्यूबा के साथ समझौता (MoU): एक प्रमुख उपलब्धि के रूप में, भारत और क्यूबा के बीच समझौता हुआ। इसके तहत क्यूबा में आयुर्वेद और पंचकर्म केंद्रों की स्थापना की जाएगी। यह दर्शाता है कि आयुर्वेद अब केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों में भी अपनी जड़ें जमा रहा है।

साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण की आवश्यकता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारत सरकार दोनों ने इस बात पर स्पष्टता व्यक्त की कि पारंपरिक चिकित्सा की वैश्विक पहुंच के लिए ‘डेटा और एविडेंस’ सबसे महत्वपूर्ण हैं। जब तक इन दवाओं का नैदानिक परीक्षण (Clinical Trials) और मानकीकरण नहीं होगा, तब तक इन्हें आधुनिक एलोपैथिक चिकित्सा के साथ एकीकृत करना चुनौतीपूर्ण होगा। शिखर सम्मेलन में इस बात पर सहमति बनी कि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक और अनुसंधान के साथ जोड़ा जाए ताकि रोगियों को सबसे सुरक्षित उपचार मिल सके।

भविष्य की राह

इस सम्मेलन का निष्कर्ष यह है कि भविष्य की स्वास्थ्य प्रणाली एकीकृत (Integrated) होगी। इसमें योग, आयुर्वेद और यूनानी पद्धतियाँ आधुनिक सर्जिकल और नैदानिक तकनीकों के साथ मिलकर काम करेंगी। ‘वन अर्थ, वन हेल्थ’ के मंत्र के साथ, यह समिट पारंपरिक दवाओं को मुख्यधारा में लाने का एक मजबूत रोडमैप तैयार करने में सफल रहा है।

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