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दिल्ली-एनसीआर में ‘जहरीली हवा’ का संकट: प्रदूषण से फेफड़ों को राहत और सुरक्षा देने के लिए विस्तृत उपाय 😷

दिवाली के त्योहार के बाद दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और उत्तर भारत के कई प्रमुख शहर एक बार फिर ‘जहरीली हवा’ के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। पटाखों, वाहनों के धुएं और पराली जलाने (Stubble Burning) से उत्पन्न हुए धुएं के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। हवा में मौजूद महीन कण (PM 2.5 और PM 10) और विषैली गैसें नागरिकों के फेफड़ों को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं, जिसके चलते खांसी, गले में जलन, आंखों में पानी आना, और सांस लेने में दिक्कत जैसी स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ गई हैं।

यह स्थिति हर साल सर्दियों की शुरुआत में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का रूप ले लेती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार लोगों को इस दमघोंटू हवा से खुद को और अपने परिवार को बचाने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की सलाह दे रहे हैं।


 

1. प्रदूषण के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव

 

वायु प्रदूषण केवल सांस की समस्या नहीं है, यह शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित करता है:

  • श्वसन तंत्र (Respiratory System): महीन कण (PM 2.5) फेफड़ों की गहराई तक पहुँचकर अस्थमा (Asthma), ब्रोंकाइटिस और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) के मामलों को बढ़ाते हैं। लंबे समय तक संपर्क में रहने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
  • हृदय स्वास्थ्य (Cardiovascular Health): प्रदूषक तत्व रक्त प्रवाह में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे रक्त वाहिकाओं में सूजन आती है। इससे रक्तचाप (Blood Pressure) बढ़ता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
  • आँखों और त्वचा: आँखों में जलन, लालिमा और एलर्जी होना आम है। त्वचा पर भी चकत्ते और खुजली हो सकती है।
  • कमजोर इम्यूनिटी: जहरीली हवा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को कमजोर करती है, जिससे फ्लू और अन्य संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है।

 

2. खुद को बचाने के लिए तत्काल सुरक्षा उपाय (Immediate Safety Measures)

 

चिकित्सा विशेषज्ञों ने नागरिकों को वायु प्रदूषण के उच्च स्तर के दौरान इन आवश्यक कदमों को अपनाने की सलाह दी है:

 

A. बाहर निकलने से बचें और सही मास्क का उपयोग करें

 

  • सीमित आवाजाही: सुबह और देर शाम, जब प्रदूषण का स्तर अपने चरम पर होता है, तब घर से बाहर निकलने से बचें। बच्चों और बुजुर्गों को खासकर घर के अंदर ही रहना चाहिए।
  • N95/N99 मास्क: सामान्य कपड़े के मास्क या सर्जिकल मास्क हानिकारक PM 2.5 कणों को नहीं रोक सकते। बाहर निकलते समय केवल N95 या N99 रेस्पिरेटर मास्क का ही उपयोग करें, जो 95% से 99% महीन कणों को फिल्टर कर सकते हैं।
  • शारीरिक गतिविधि पर रोक: खुले में जॉगिंग, साइकलिंग या भारी-भरकम व्यायाम बिल्कुल न करें। व्यायाम करते समय सांस लेने की दर बढ़ जाती है, जिससे फेफड़ों में अधिक प्रदूषक प्रवेश करते हैं।

 

B. घर को प्रदूषण-मुक्त बनाएं (Indoor Air Management)

 

  • एयर प्यूरीफायर (Air Purifier): घर के मुख्य कमरों में HEPA फिल्टर वाले उच्च गुणवत्ता वाले एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें। यह हवा से महीन PM 2.5 कणों को प्रभावी ढंग से हटाते हैं।
  • खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें: अपने घर के दरवाजे और खिड़कियां कसकर बंद रखें, विशेष रूप से सुबह और शाम के समय।
  • इंडोर प्लांट्स: ऐसे पौधे लगाएं जो हवा को शुद्ध करने में मदद करते हैं, जैसे स्नेक प्लांट (Snake Plant), पीस लिली (Peace Lily), और एलोवेरा (Aloe Vera)
  • गीला पोछा लगाएं: घर की सतहों पर जमी धूल और प्रदूषक कणों को हटाने के लिए गीले कपड़े या पोछे का उपयोग करें, वैक्यूम क्लीनर का नहीं, क्योंकि यह महीन धूल को हवा में फैला सकता है।

 

3. फेफड़ों को डिटॉक्स करने के लिए घरेलू नुस्खे और आहार

 

प्रदूषण से लड़ने के लिए अंदरूनी मजबूती (Immunity and Detoxification) बहुत आवश्यक है। आयुर्वेद और आधुनिक पोषण विज्ञान दोनों ने कुछ प्राकृतिक उपायों की सलाह दी है:

 

A. फेफड़ों के लिए प्राकृतिक डिटॉक्स

 

प्राकृतिक सामग्री लाभ उपयोग का तरीका
तुलसी (Holy Basil) एंटी-इंफ्लेमेटरी, श्वसन संक्रमण से बचाती है। रोज़ाना 5-6 पत्तियाँ चबाएं या इसकी चाय पिएं।
हल्दी (Turmeric) करक्यूमिन (Curcumin) के कारण शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी है। फेफड़ों की सूजन कम करती है। एक गिलास गर्म दूध में हल्दी और काली मिर्च मिलाकर पिएं।
अदरक (Ginger) फेफड़ों से बलगम और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है। अदरक की चाय, शहद के साथ अदरक का रस या भोजन में उपयोग करें।
गुड़ (Jaggery) यह प्राकृतिक रूप से प्रदूषक तत्वों को श्वसन नली से बाहर निकालने में मदद करता है। भोजन के बाद एक छोटा टुकड़ा खाएं।

 

B. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले आहार

 

  • विटामिन C: नींबू, संतरा, आंवला, और शिमला मिर्च जैसे खाद्य पदार्थ इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं और शरीर पर प्रदूषण के ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करते हैं।
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड: अखरोट, अलसी और मछली में पाए जाने वाले ओमेगा-3 फैटी एसिड शरीर में सूजन (Inflammation) को कम करने में सहायक होते हैं।
  • खूब पानी पिएं: शरीर को हाइड्रेटेड रखने से म्यूकस मेंब्रेन नम रहती है, जिससे टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं। गर्म पानी पीने से गले की जलन में राहत मिलती है।

 

4. लंबी अवधि के लिए स्वस्थ आदतें

 

यह संकट केवल एक मौसम तक सीमित नहीं है। दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए निम्नलिखित आदतें अपनाना महत्वपूर्ण है:

  • योग और प्राणायाम: घर के अंदर रहकर कपालभाति और अनुलोम-विलोम जैसे प्राणायाम करें। ये फेफड़ों की क्षमता (Lung Capacity) को बढ़ाते हैं और श्वसन तंत्र को मजबूत करते हैं।
  • धूम्रपान छोड़ें: यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो फेफड़ों पर प्रदूषण के दोहरे हमले को रोकने के लिए इसे तुरंत छोड़ना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
  • नियमित जाँच: विशेष रूप से सांस की समस्याओं वाले लोगों को नियमित रूप से पल्मोनोलॉजिस्ट (Pulmonologist) से परामर्श लेना चाहिए।

प्रदूषण का मुकाबला एक व्यक्तिगत और सामूहिक जिम्मेदारी है। इन सुरक्षा उपायों और जीवनशैली में बदलाव को अपनाकर ही दिल्ली-एनसीआर के नागरिक इस ‘जहरीली हवा’ के संकट से अपने फेफड़ों की रक्षा कर सकते हैं।

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