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डिजिटल स्वास्थ्य की नई पहल: राष्ट्रीय टेली-मेंटल हेल्थ प्रोग्राम का विस्तार और बजट 2026 की घोषणाएं

नई दिल्ली। आधुनिक जीवन की भागदौड़, काम का तनाव और सामाजिक अलगाव के कारण भारत में मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। इस गंभीर मुद्दे को संज्ञान में लेते हुए, भारत सरकार ने बजट 2026 में ‘राष्ट्रीय टेली-मेंटल हेल्थ प्रोग्राम’ (Tele-MANAS) के दायरे को बढ़ाने की एक ऐतिहासिक घोषणा की है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि मानसिक स्वास्थ्य अब केवल बड़े शहरों तक सीमित मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के सुदूर क्षेत्रों में भी इसके लिए प्रभावी और सुलभ संसाधनों की आवश्यकता है।


क्या है राष्ट्रीय टेली-मेंटल हेल्थ प्रोग्राम (Tele-MANAS)?

सरकार द्वारा शुरू किया गया यह कार्यक्रम एक ‘डिजिटल प्लेटफॉर्म’ है जो 24×7 मुफ्त मानसिक स्वास्थ्य परामर्श प्रदान करता है। इसका उद्देश्य उन लोगों तक पहुँचना है जो सामाजिक संकोच या संसाधनों की कमी के कारण किसी मनोचिकित्सक के पास नहीं जा पाते।

बजट 2026: उत्तर भारत पर विशेष ध्यान

बजट के नए प्रावधानों के तहत, उत्तर और पूर्वी भारत के राज्यों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए तीन नए विशेष उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) स्थापित किए जाएंगे:

  1. सती (SATI): क्षेत्रीय स्तर पर मानसिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए।

  2. तेजपुर (असम): पूर्वोत्तर भारत की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए।

  3. रांची (झारखंड): केंद्रीय भारत के जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करने के लिए।

इन केंद्रों को NIMHANS (बेंगलुरु) के साथ डिजिटल रूप से जोड़ा जाएगा, जो इस पूरे नेटवर्क के लिए नोडल केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

विस्तार के प्रमुख उद्देश्य

इस कार्यक्रम के विस्तार के पीछे सरकार के तीन मुख्य लक्ष्य हैं:

  • पहुँच और सुलभता: डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से एक मोबाइल फोन रखने वाला व्यक्ति भी घर बैठे विशेषज्ञ की सलाह ले सकेगा।

  • कलंक (Stigma) को खत्म करना: मानसिक रोगों के बारे में समाज में व्याप्त शर्म और संकोच को दूर करने के लिए गोपनीयता (Privacy) के साथ परामर्श देना।

  • मुफ्त सेवा: निजी अस्पतालों में महंगी काउंसलिंग के मुकाबले, सरकार यह सेवा पूरी तरह निःशुल्क प्रदान कर रही है।

कैसे काम करेगा यह सिस्टम?

इस कार्यक्रम के तहत एक केंद्रीकृत हेल्पलाइन नंबर संचालित किया जाता है। जब कोई व्यक्ति फोन करता है, तो उसे पहले स्तर पर प्रशिक्षित परामर्शदाता (Counselors) से बात कराई जाती है। यदि स्थिति गंभीर लगती है, तो कॉल को विशेषज्ञ मनोचिकित्सक या क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट को ट्रांसफर कर दिया जाता है। नए केंद्रों की स्थापना से स्थानीय भाषाओं में परामर्श देना और भी आसान हो जाएगा।

बढ़ती चुनौतियां और भविष्य की राह

आंकड़ों के अनुसार, भारत की लगभग 15% आबादी किसी न किसी रूप में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विकारों से गुजर रही है। बजट 2026 में इसके लिए विशेष फंड का आवंटन यह दर्शाता है कि सरकार अब ‘वेलनेस’ (Wellness) को केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सती, तेजपुर और रांची में केंद्रों के खुलने से न केवल टेली-परामर्श बेहतर होगा, बल्कि मानसिक रोगों पर डेटा एकत्र करने और अनुसंधान करने में भी मदद मिलेगी।


प्रमुख जानकारी: टेली-मानस हेल्पलाइन

यदि आप या आपका कोई परिचित तनाव, चिंता या अवसाद महसूस कर रहा है, तो आप सरकार द्वारा जारी टोल-फ्री नंबर 14416 पर संपर्क कर सकते हैं। यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध है और आपकी पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती है।

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