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डायबिटीज प्रबंधन में नई क्रांति: क्या ‘स्टैटिन’ अब हर टाइप-2 डायबिटीज मरीज के लिए अनिवार्य है?

नई दिल्ली/लंदन। चिकित्सा जगत से आज एक ऐसी खबर आई है जो दुनिया भर के करोड़ों डायबिटीज रोगियों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकती है। एक नए और व्यापक अंतरराष्ट्रीय शोध (International Study) के परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ‘स्टैटिन’ (Statins) दवाएं केवल हाई-कोलेस्ट्रॉल के मरीजों के लिए ही नहीं, बल्कि टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित लगभग हर वयस्क के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती हैं।

यह शोध उन पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को चुनौती देता है जहाँ स्टैटिन केवल उन्हीं डायबिटीज मरीजों को दी जाती थी जिनमें हृदय रोग (Cardiovascular Diseases) का जोखिम बहुत अधिक देखा जाता था।


शोध के मुख्य निष्कर्ष: क्यों है यह एक ‘वरदान’?

आज प्रकाशित इस शोध में 40 से 75 वर्ष की आयु के हजारों टाइप-2 डायबिटीज मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया गया। शोध के सबसे चौंकाने वाले और महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं:

  1. जोखिम की परवाह किए बिना लाभ: शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन डायबिटीज मरीजों में हृदय रोग का ‘बेसलाइन रिस्क’ (शुरुआती जोखिम) कम था, उन्हें भी स्टैटिन के सेवन से उतना ही लाभ हुआ जितना कि उच्च जोखिम वाले मरीजों को।

  2. मृत्यु दर में भारी कमी: नियमित स्टैटिन सेवन से डायबिटीज मरीजों में अकाल मृत्यु (Premature Death) की संभावना में 22% से 30% तक की कमी देखी गई।

  3. हार्ट अटैक और स्ट्रोक से बचाव: यह दवा धमनियों में प्लाक (जमाव) को बनने से रोकती है, जिससे भविष्य में होने वाले साइलेंट हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी हद तक टल जाता है।


डायबिटीज और हृदय रोग का गहरा संबंध

टाइप-2 डायबिटीज केवल ब्लड शुगर का बढ़ना नहीं है; यह शरीर की रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को भी नुकसान पहुँचाता है। हाई ब्लड शुगर के कारण धमनियों की दीवारें सख्त होने लगती हैं और उनमें कोलेस्ट्रॉल आसानी से जमा हो जाता है।

“डायबिटीज के मरीजों में हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा सामान्य व्यक्ति की तुलना में दो से तीन गुना अधिक होता है। स्टैटिन न केवल कोलेस्ट्रॉल कम करती है, बल्कि यह धमनियों की सूजन (Inflammation) को भी कम करती है।” – प्रमुख शोधकर्ता के अनुसार


पुरानी धारणाओं का अंत

अब तक चिकित्सा जगत में यह माना जाता था कि यदि किसी 40 वर्षीय डायबिटीज मरीज का कोलेस्ट्रॉल स्तर सामान्य है और उसे ब्लड प्रेशर जैसी अन्य समस्या नहीं है, तो उसे स्टैटिन की आवश्यकता नहीं है। लेकिन इस नए शोध ने साबित किया है कि डायबिटीज अपने आप में स्टैटिन शुरू करने के लिए एक पर्याप्त संकेत है। स्टैटिन का शुरुआती सेवन भविष्य की महंगी सर्जरी और गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों को रोक सकता है।


सावधानियां और विशेषज्ञ की राय

हालांकि यह शोध स्टैटिन को एक ‘वंडर ड्रग’ के रूप में पेश करता है, लेकिन विशेषज्ञों ने कुछ महत्वपूर्ण चेतावनियां भी दी हैं:

  • स्व-उपचार (Self-Medication) न करें: स्टैटिन के कुछ दुष्प्रभाव जैसे मांसपेशियों में दर्द (Myalgia) या लिवर एंजाइम में बदलाव हो सकते हैं। इसलिए इसे केवल डॉक्टर की सलाह पर ही शुरू करना चाहिए।

  • जीवनशैली का विकल्प नहीं: स्टैटिन एक सहायक दवा है। यह स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और ब्लड शुगर नियंत्रण का विकल्प नहीं हो सकती।

  • नियमित जांच: जो मरीज स्टैटिन शुरू करते हैं, उन्हें समय-समय पर अपने ‘लिपिड प्रोफाइल’ और लिवर फंक्शन की जांच करवानी चाहिए।

निष्कर्ष

यह अंतरराष्ट्रीय शोध टाइप-2 डायबिटीज के उपचार के प्रोटोकॉल को पूरी तरह बदल सकता है। अब डॉक्टर केवल शुगर लेवल को कम करने पर ही ध्यान नहीं देंगे, बल्कि बीमारी के पहले दिन से ही मरीज के हृदय की सुरक्षा के लिए स्टैटिन को उपचार का हिस्सा बना सकते हैं।

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