🢀
जंक फूड की जानलेवा लत: अमरोहा में 11वीं की छात्रा की मौत ने सबको चौंकाया

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से एक अत्यंत दुखद और आंखें खोल देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ लगातार जंक फूड और फास्ट फूड के सेवन के कारण 11वीं कक्षा की एक मेधावी छात्रा की जान चली गई। डॉक्टरों के अनुसार, छात्रा की मृत्यु का कारण उसकी आंतों का आपस में चिपक जाना और पाचन तंत्र का पूरी तरह से ठप हो जाना था। यह घटना उन करोड़ों माता-पिता और युवाओं के लिए एक चेतावनी है जो आधुनिक खान-पान की लत के शिकार हैं।


क्या है पूरा मामला?

बताया जा रहा है कि छात्रा लंबे समय से घर के खाने के बजाय बाहर के फास्ट फूड जैसे मोमोज, चाउमीन, पिज्जा और अत्यधिक मसालेदार जंक फूड की शौकीन थी। धीरे-धीरे उसे भूख कम लगने लगी और पेट में दर्द की शिकायत रहने लगी। शुरुआती दौर में इसे साधारण कब्ज या गैस समझकर नजरअंदाज किया गया, लेकिन जब दर्द असहनीय हो गया, तो उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

मेडिकल जांच और सर्जरी के दौरान डॉक्टर यह देखकर हैरान रह गए कि अत्यधिक मैदे और रसायनों (प्रिजर्वेटिव्स) के जमाव के कारण उसकी छोटी और बड़ी आंतों की दीवारें आपस में बुरी तरह चिपक चुकी थीं। संक्रमण इतना फैल चुका था कि सर्जरी के बावजूद उसका जीवन नहीं बचाया जा सका।

आंतें क्यों और कैसे चिपकती हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, फास्ट फूड में मुख्य रूप से ‘मैदा’ होता है। मैदा पूरी तरह से फाइबर रहित होता है। जब कोई व्यक्ति लगातार मैदा और अत्यधिक तेल का सेवन करता है, तो:

  1. गट माइक्रोबायोम का बिगड़ना: हमारी आंतों में अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का संतुलन होता है। जंक फूड अच्छे बैक्टीरिया को खत्म कर देता है।

  2. सूजन (Inflammation): मैदे के बारीक कण आंतों की आंतरिक परत पर जमा होने लगते हैं, जिससे वहां गंभीर सूजन आ जाती है।

  3. रुकावट (Intestinal Obstruction): सूजन और फाइबर की कमी के कारण मल का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है और आंतें आपस में उलझने या चिपकने लगती हैं। इसे डॉक्टरी भाषा में ‘इंटससेप्शन’ या गंभीर ‘एडहेसन’ कहा जाता है।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों की गंभीर चेतावनी

अमरोहा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और अन्य डॉक्टरों ने इस घटना के बाद कुछ महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चेतावनियाँ जारी की हैं:

  • मैदा एक ‘स्लो पॉइजन’: मैदा आंतों में गोंद की तरह चिपकता है। यदि इसके साथ पर्याप्त पानी और फाइबर न लिया जाए, तो यह पेट के अंदर ही सड़ने लगता है।

  • खतरनाक रसायनों का प्रभाव: फास्ट फूड में इस्तेमाल होने वाला अजीनोमोटो (MSG) और कृत्रिम रंग लीवर और आंतों की झिल्ली को नष्ट कर देते हैं।

  • पाचन तंत्र का डैमेज होना: आज की युवा पीढ़ी में ‘इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम’ (IBS) और पुरानी कब्ज की समस्या इसी खान-पान की देन है।

बचाव के उपाय

विशेषज्ञों का कहना है कि हफ्ते में एक बार जंक फूड खाना उतना घातक नहीं है, जितना इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बना लेना। बच्चों को बचपन से ही फलों, हरी सब्जियों और साबुत अनाज के प्रति प्रेरित करना आवश्यक है। यदि पेट में लगातार भारीपन या दर्द बना रहे, तो इसे मामूली समझकर घरेलू इलाज करने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

यह घटना समाज के लिए एक कड़ा संदेश है कि जीभ का स्वाद कभी-कभी जीवन की सबसे बड़ी कीमत मांग लेता है।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️