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गुजरात सरकार की अनूठी पहल: स्थानीय सांपों के जहर से बनेगा ‘राज्य-विशिष्ट एंटी-वेनम’; सर्पदंश से मौतों पर लगेगी लगाम

भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए अपनी तरह की पहली ‘राज्य-विशिष्ट एंटी-वेनम’ (State-Specific Anti-venom) परियोजना शुरू करने की घोषणा की है। 23 फरवरी, 2026 को राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, गुजरात सरकार अब स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों में पाए जाने वाले सांपों के जहर के आधार पर एक विशेष एंटी-वेनम विकसित करेगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश (Snakebite) से होने वाली अकाल मौतों को शून्य के स्तर पर लाना है।


वर्तमान चुनौती: क्यों जरूरी है राज्य-विशिष्ट एंटी-वेनम?

वर्तमान में भारत में उपयोग किया जाने वाला अधिकांश ‘पॉलीवेलेंट एंटी-वेनम’ मुख्य रूप से तमिलनाडु (विशेषकर इरुला सहकारी समिति) से एकत्रित किए गए जहर से बनाया जाता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमेशा हर राज्य में प्रभावी नहीं होता।

  • जहर की विविधता: एक ही प्रजाति के सांप (जैसे कोबरा या रसेल वाइपर) के जहर की शक्ति और संरचना स्थान बदलने के साथ बदल जाती है। गुजरात के कच्छ या सौराष्ट्र के सांपों के जहर का प्रभाव दक्षिण भारत के सांपों से अलग हो सकता है।

  • प्रभावशीलता में कमी: कभी-कभी मानक एंटी-वेनम स्थानीय सांप के जहर को पूरी तरह बेअसर नहीं कर पाता, जिससे मरीज को बचाने के लिए बहुत अधिक डोज देनी पड़ती है, जो शरीर के लिए हानिकारक हो सकती है।


परियोजना के मुख्य आकर्षण

गुजरात सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत कई चरणों में काम किया जाएगा:

  1. स्थानीय जहर का संग्रह: राज्य के विभिन्न हिस्सों (जंगल, तटीय क्षेत्र और रेगिस्तानी इलाके) से मुख्य विषैले सांपों—नाग (Cobra), करैत (Krait), रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर—का जहर एकत्र किया जाएगा।

  2. अनुसंधान और विकास: गुजरात लाइफ साइंसेज और प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के सहयोग से इस जहर का विश्लेषण किया जाएगा और एक ऐसा एंटी-वेनम तैयार किया जाएगा जो विशेष रूप से गुजरात की सांप प्रजातियों के प्रति अत्यधिक प्रभावी हो।

  3. वितरण प्रणाली: यह विशिष्ट एंटी-वेनम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा।


विशेषज्ञों की राय और लाभ

चिकित्सा विशेषज्ञों और जीवविज्ञानियों ने इस कदम की सराहना की है। उनका मानना है कि स्थानीय प्रजातियों के जहर से तैयार एंटी-वेनम निम्नलिखित लाभ प्रदान करेगा:

  • शीघ्र उपचार: जहर का असर कम समय में खत्म होगा, जिससे मरीज के अंगों (जैसे किडनी या नर्वस सिस्टम) को होने वाली क्षति कम होगी।

  • मृत्यु दर में कमी: सटीक एंटी-वेनम मिलने से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में मृत्यु दर में भारी गिरावट आने की संभावना है।

  • कम साइड इफेक्ट्स: चूंकि एंटी-वेनम अधिक सटीक होगा, इसलिए मरीज को कम इंजेक्शन की जरूरत पड़ेगी, जिससे दवा के प्रति होने वाले एलर्जिक रिएक्शन का खतरा कम हो जाएगा।


सर्पदंश जागरूकता अभियान

एंटी-वेनम लॉन्च करने के साथ-साथ, गुजरात सरकार ‘सर्पदंश प्रबंधन’ पर डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित कर रही है। साथ ही, ग्रामीणों को ओझा-गुणी के पास जाने के बजाय सीधे अस्पताल पहुँचने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

निष्कर्ष

गुजरात सरकार की यह पहल ‘रीजनल मेडिसिन’ (क्षेत्रीय चिकित्सा) के क्षेत्र में एक बड़ा उदाहरण पेश करती है। यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। स्थानीय समस्याओं का स्थानीय समाधान ढूंढकर, गुजरात ने यह सिद्ध किया है कि तकनीक और अनुसंधान के माध्यम से सबसे कठिन स्वास्थ्य चुनौतियों को भी मात दी जा सकती है।

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