
कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज न केवल शारीरिक रूप से कष्टदायक है, बल्कि आर्थिक और मानसिक रूप से भी परिवारों को तोड़ देता है। भारत जैसे विशाल देश में, कैंसर के उन्नत इलाज के लिए मरीजों को अक्सर अपने गांव या छोटे शहर से निकलकर मुंबई, दिल्ली या बेंगलुरु जैसे महानगरों की ओर भागना पड़ता था। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए भारत सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में ‘डेकेयर कैंसर सेंटर’ की स्थापना का एक क्रांतिकारी लक्ष्य रखा है।
डेकेयर कैंसर सेंटर क्या हैं?
डेकेयर सेंटर का अर्थ है एक ऐसी चिकित्सा सुविधा जहाँ मरीज को इलाज (जैसे कीमोथेरेपी) के लिए रात भर अस्पताल में रुकने की आवश्यकता नहीं होती। मरीज सुबह केंद्र पर आता है, अपनी निर्धारित चिकित्सा प्रक्रिया पूरी करता है और शाम तक अपने घर लौट जाता है।
इस योजना के प्रमुख बिंदु:
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हर जिले में पहुँच: सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026 तक भारत के सभी 700 से अधिक जिलों में कम से कम एक डेकेयर कैंसर सेंटर संचालित करना है।
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स्थानीय कीमोथेरेपी सुविधा: वर्तमान में, मरीजों को कीमोथेरेपी के हर सत्र के लिए सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है। इन केंद्रों के खुलने से उन्हें अपने घर के पास ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में कीमोथेरेपी मिल सकेगी।
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लागत में कमी: यात्रा और बड़े शहरों में रहने का खर्च कम होने से कैंसर के इलाज की कुल लागत में 30% से 40% तक की कमी आने की उम्मीद है।
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200 नए केंद्र तैयार: योजना का पहला चरण तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश भर में 200 नए केंद्र निर्माण के अंतिम चरण में हैं, जो जल्द ही जनता के लिए खोल दिए जाएंगे।
स्वास्थ्य प्रणाली पर प्रभाव
इन केंद्रों की स्थापना से न केवल मरीजों को राहत मिलेगी, बल्कि टाटा मेमोरियल अस्पताल और AIIMS जैसे बड़े संस्थानों पर भी मरीजों का दबाव कम होगा। इससे बड़े अस्पतालों के डॉक्टर जटिल सर्जरी और शोध (Research) पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
आयुष्मान भारत के साथ एकीकरण
इन डेकेयर केंद्रों को आयुष्मान भारत (PM-JAY) योजना से पूरी तरह जोड़ा गया है। इसका मतलब है कि पात्र मरीजों को इन स्थानीय केंद्रों पर भी पूरी तरह मुफ्त और कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। साथ ही, इन केंद्रों पर कैंसर की शुरुआती जांच (Screening) की सुविधा भी होगी, जिससे बीमारी का पता पहले चरण में ही लगाया जा सकेगा।
निष्कर्ष
“इलाज घर के पास” (Care near home) के विजन के साथ शुरू की गई यह योजना भारत की स्वास्थ्य प्रणाली में एक मील का पत्थर साबित होगी। कैंसर के खिलाफ जंग में यह कदम उन लाखों परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण है जो संसाधनों के अभाव में अपना इलाज बीच में ही छोड़ देते थे।