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कैंसर चिकित्सा में नया सवेरा: ‘पर्सनलाइज्ड mRNA वैक्सीन’ ने जगाई बड़ी उम्मीद

चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में साल 2026 को एक ऐसे वर्ष के रूप में याद किया जाएगा जब मानवता ने अपनी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक—कैंसर—के विरुद्ध एक निर्णायक बढ़त हासिल की। वैज्ञानिकों ने mRNA (मैसेंजर आरएनए) तकनीक का उपयोग करते हुए ‘पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन’ के दूसरे चरण के परीक्षणों में ऐसी सफलता प्राप्त की है, जिसने पूरी दुनिया के डॉक्टरों और मरीजों के बीच खुशी की लहर दौड़ा दी है।

क्या है ‘पर्सनलाइज्ड’ कैंसर वैक्सीन?

पारंपरिक टीकों के विपरीत, जो किसी बीमारी को होने से रोकने के लिए दिए जाते हैं, कैंसर वैक्सीन अक्सर ‘उपचारात्मक’ (Therapeutic) होती हैं। ‘पर्सनलाइज्ड’ या व्यक्तिगत होने का अर्थ है कि यह वैक्सीन किसी एक सामान्य बीमारी के लिए नहीं, बल्कि हर मरीज के विशिष्ट ट्यूमर के आधार पर तैयार की जाती है।

चूंकि हर व्यक्ति का कैंसर जेनेटिक स्तर पर अलग होता है, इसलिए वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो मरीज के ट्यूमर के डीएनए का बारीकी से विश्लेषण करती है। इसके बाद, एक कस्टम-मेड mRNA वैक्सीन तैयार की जाती है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को यह सिखाती है कि केवल उन विशिष्ट कैंसर कोशिकाओं को कैसे पहचानना और नष्ट करना है, बिना स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाए।

mRNA तकनीक: कोविड से कैंसर तक का सफर

वही mRNA तकनीक, जिसने कोविड-19 महामारी के दौरान करोड़ों लोगों की जान बचाई, अब कैंसर के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बन गई है। यह तकनीक शरीर की कोशिकाओं को ‘निर्देश’ (Instructions) देती है कि वे कैंसर जैसी दिखने वाली प्रोटीन की नकल तैयार करें। जब शरीर का इम्यून सिस्टम इन प्रोटीनों को देखता है, तो वह सक्रिय हो जाता है और वास्तविक कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने के लिए ‘टी-कोशिकाओं’ (T-cells) की एक सेना तैयार कर देता है।

कीमोथेरेपी से बेहतर और सुरक्षित

कैंसर के पारंपरिक इलाज जैसे कीमोथेरेपी और रेडिएशन अक्सर शरीर पर बहुत भारी पड़ते हैं। कीमोथेरेपी कैंसर कोशिकाओं के साथ-साथ स्वस्थ कोशिकाओं को भी मार देती है, जिससे बाल झड़ना, कमजोरी और संक्रमण जैसे गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं। इसके विपरीत, पर्सनलाइज्ड वैक्सीन के दुष्प्रभाव अत्यंत कम हैं। चूंकि यह केवल लक्षित कैंसर कोशिकाओं पर वार करती है, इसलिए मरीज का शरीर अन्य उपचारों की तुलना में बहुत तेजी से रिकवर होता है।

परीक्षणों के उत्साहजनक परिणाम

2026 में संपन्न हुए दूसरे चरण (Phase 2) के परीक्षणों में देखा गया कि मेलानोमा (त्वचा का कैंसर), फेफड़ों के कैंसर और अग्नाशय (Pancreatic) के कैंसर के मरीजों में इस वैक्सीन ने बीमारी के दोबारा लौटने के जोखिम को 40% से 50% तक कम कर दिया है। यह डेटा दर्शाता है कि हम भविष्य में कैंसर को एक ‘लालाज’ बीमारी के बजाय एक ‘प्रबंधनीय’ (Manageable) बीमारी के रूप में देख पाएंगे।

भविष्य की राह और चुनौतियां

हालांकि यह सफलता बहुत बड़ी है, लेकिन अभी भी कुछ चुनौतियां बाकी हैं। इस वैक्सीन को तैयार करने की प्रक्रिया वर्तमान में काफी महंगी और समय लेने वाली है। वैज्ञानिकों का अगला लक्ष्य इस प्रक्रिया को सस्ता और तेज बनाना है ताकि दुनिया के हर कोने में सामान्य मरीज भी इसका लाभ उठा सकें।

निष्कर्ष 2026 की यह उपलब्धि विज्ञान की जीत है। यदि तीसरे चरण के परीक्षण भी इसी तरह सफल रहे, तो अगले कुछ वर्षों में कैंसर का इलाज पूरी तरह बदल जाएगा। यह न केवल जीवन को बचाने के बारे में है, बल्कि कैंसर के बाद जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) को बेहतर बनाने के बारे में भी है।

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