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कैंसर के विरुद्ध नई जंग: ‘इम्यूनोथेरेपी’ की क्रांतिकारी सफलता और 80% रिकवरी रेट

नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) के इतिहास में एक ऐसा मोड़ आया है जिसने कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के खिलाफ मानवता की उम्मीदों को नई उड़ान दी है। हाल ही में संपन्न हुए एक व्यापक क्लिनिकल ट्रायल के परिणामों ने दुनिया भर के ऑन्कोलॉजिस्ट्स (कैंसर विशेषज्ञों) को अचंभित कर दिया है। इस परीक्षण में ‘इम्यूनोथेरेपी’ (Immunotherapy) के माध्यम से ब्लड कैंसर (Leukemia) के अंतिम चरण के मरीजों में 80% तक की रिकवरी दर्ज की गई है।

क्या है इम्यूनोथेरेपी? (एक सरल परिचय)

पारंपरिक कैंसर उपचार जैसे कीमोथेरेपी या रेडिएशन सीधे तौर पर कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने का प्रयास करते हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी भारी नुकसान पहुँचता है। इसके विपरीत, इम्यूनोथेरेपी एक “स्मार्ट उपचार” है। यह तकनीक शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को इस तरह प्रशिक्षित या सक्रिय करती है कि वह कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर सके और उन्हें प्राकृतिक रूप से नष्ट कर सके।

क्लिनिकल ट्रायल के चौंकाने वाले नतीजे

हालिया परीक्षण मुख्य रूप से CAR T-cell थेरेपी पर केंद्रित था, जो इम्यूनोथेरेपी का एक उन्नत रूप है।

  • सफलता की दर: उन मरीजों में भी 80% सुधार देखा गया जिन पर कीमोथेरेपी बेअसर हो चुकी थी।

  • दीर्घकालिक प्रभाव: ट्रायल में शामिल कई मरीज अब पूरी तरह से “कैंसर मुक्त” (Remission) घोषित किए जा चुके हैं।

  • लक्षित हमला: यह थेरेपी केवल कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाती है, जिससे शरीर के अन्य अंगों पर दुष्प्रभाव (Side Effects) नगण्य होते हैं।

कीमोथेरेपी बनाम इम्यूनोथेरेपी: क्यों है यह बेहतर?

विशेषज्ञों का मानना है कि इम्यूनोथेरेपी आने वाले समय में कीमोथेरेपी का प्रमुख विकल्प बन सकती है:

  1. कम दर्दनाक: कीमोथेरेपी के कारण होने वाले बाल झड़ने, अत्यधिक कमजोरी और गंभीर संक्रमण का खतरा इसमें बहुत कम होता है।

  2. प्रतिरक्षा स्मृति (Immune Memory): इम्यूनोथेरेपी शरीर के इम्यून सिस्टम को “याद रखना” सिखाती है। यदि भविष्य में कैंसर कोशिकाएं फिर से उभरती हैं, तो शरीर का सुरक्षा तंत्र उन्हें तुरंत पहचान कर खत्म कर सकता है।

  3. बेहतर जीवन गुणवत्ता: उपचार के दौरान और बाद में मरीज का जीवन स्तर कीमोथेरेपी की तुलना में काफी बेहतर रहता है।

चुनौतियाँ और भविष्य की राह

इतनी बड़ी सफलता के बावजूद, कुछ चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं:

  • लागत (Cost): वर्तमान में इम्यूनोथेरेपी और CAR T-cell जैसे उपचार अत्यधिक महंगे हैं, जो आम आदमी की पहुँच से बाहर हैं।

  • उपलब्धता: यह तकनीक अभी केवल चुनिंदा बड़े कैंसर संस्थानों में ही उपलब्ध है।

  • ठोस ट्यूमर (Solid Tumors): ब्लड कैंसर में मिली यह सफलता अब स्तन, फेफड़े और प्रोस्टेट कैंसर जैसे ठोस ट्यूमर के लिए भी जांची जा रही है।

निष्कर्ष

यह उपलब्धि केवल एक वैज्ञानिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि उन लाखों परिवारों के लिए जीवन का नया संदेश है जो कैंसर के खिलाफ हार मान चुके थे। भारत में भी टाटा मेमोरियल जैसे संस्थान स्वदेशी इम्यूनोथेरेपी विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जिससे भविष्य में यह इलाज सस्ता और सुलभ हो सकेगा। चिकित्सा जगत अब उस दिन के करीब है जब “कैंसर” शब्द का अर्थ मृत्यु नहीं, बल्कि एक उपचार योग्य स्थिति होगा।

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