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कैंसर के इलाज में बड़ी राहत: 17 जीवन रक्षक दवाएं हुईं सस्ती, सीमा शुल्क में कटौती आज से प्रभावी

नई दिल्ली, 1 मार्च 2026: भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए बड़े सुधारों के तहत आज से कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 प्रमुख दवाओं की कीमतों में भारी कमी आने जा रही है। बजट 2026 में घोषित बुनियादी सीमा शुल्क (Basic Customs Duty – BCD) को पूरी तरह खत्म करने का निर्णय आज से देश भर में लागू हो गया है। इस कदम का सीधा लाभ उन मरीजों को मिलेगा जो अब तक दवाओं के भारी खर्च के कारण इलाज कराने में असमर्थ थे या कर्ज के बोझ तले दब रहे थे।


1. कौन सी दवाएं हुईं सस्ती और क्यों?

कैंसर की कई आधुनिक दवाएं भारत में निर्मित नहीं होतीं और उन्हें विदेशों (मुख्यतः अमेरिका और यूरोप) से आयात करना पड़ता है। इन पर पहले 10% से 12.5% तक सीमा शुल्क लगता था, जिससे इनकी एमआरपी (MRP) बहुत अधिक हो जाती थी।

  • प्रमुख दवाएं: इस सूची में रिबोसिक्लिब (Ribociclib), जो स्तन कैंसर के इलाज में क्रांतिकारी मानी जाती है, और ब्रिगाटिनिब (Brigatinib), जो फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) के लिए प्रभावी है, शामिल हैं। इसके अलावा ट्रास्टुजुमैब (Trastuzumab) जैसी इम्यूनोथेरेपी दवाओं पर भी शुल्क हटाया गया है।

  • दुर्लभ बीमारियाँ: कैंसर के साथ-साथ सरकार ने दुर्लभ बीमारियों (Rare Diseases) के इलाज में उपयोग होने वाली दवाओं और विशेष चिकित्सा खाद्य पदार्थों पर भी आयात शुल्क में पूरी छूट दी है।

2. मरीजों की जेब पर कितना पड़ेगा असर?

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, सीमा शुल्क हटने और उसके बाद लगने वाले जीएसटी (GST) के इनपुट क्रेडिट एडजस्टमेंट से दवाओं की कीमतों में 15% से 25% तक की कमी आ सकती है।

  • उदाहरण के तौर पर: यदि किसी कैंसर दवा के एक महीने के कोर्स की कीमत पहले ₹1,00,000 थी, तो अब वह घटकर ₹75,000 से ₹80,000 के बीच आ सकती है। सालाना आधार पर यह बचत लाखों रुपये में होगी।

3. ‘दुर्लभ बीमारियों’ के लिए नई उम्मीद

कैंसर के अलावा, ‘जेनेटिक’ और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों के लिए भी यह फैसला जीवनदान साबित होगा। इन बीमारियों की दवाएं अक्सर करोड़ों रुपये की होती हैं। सीमा शुल्क में छूट से इन दवाओं को भारत लाना न केवल सस्ता होगा, बल्कि इनकी उपलब्धता भी बढ़ेगी।

4. स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय

देश के प्रमुख ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि भारत में कैंसर के 40% मरीज केवल इसलिए इलाज बीच में छोड़ देते हैं क्योंकि वे दवाओं का खर्च नहीं उठा पाते।

“दवाओं का सस्ता होना ‘यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज’ की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब हम अधिक मरीजों को बेहतर और आधुनिक इलाज (Targeted Therapy) दे पाएंगे।” — वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ, AIIMS

5. भविष्य की रणनीति: आत्मनिर्भर भारत

सीमा शुल्क हटाना एक तात्कालिक राहत है, लेकिन सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य इन दवाओं का निर्माण भारत में ही शुरू करना है।

  • PLI स्कीम: सरकार ‘प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव’ (PLI) योजना के तहत भारतीय दवा कंपनियों को इन जटिल सॉल्ट्स (Salts) को देश में ही बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

  • जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा: जन औषधि केंद्रों के माध्यम से भी कैंसर की जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।


निष्कर्ष

1 मार्च 2026 से लागू यह नीतिगत बदलाव न केवल मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा, बल्कि यह कैंसर के खिलाफ भारत की जंग को और मजबूत बनाएगा। दवाओं के सस्ते होने से अब ‘इलाज का अधिकार’ केवल अमीरों तक सीमित नहीं रहेगा।

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