
केरल के दक्षिण-पश्चिमी इलाकों में बर्ड फ्लू (Bird Flu) के दोबारा उभरने से राज्य में हड़कंप मच गया है। विशेष रूप से अलाप्पुझा और कोट्टायम जिले इस प्रकोप के केंद्र बने हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग ने इस खतरे को गंभीरता से लेते हुए बड़े पैमाने पर बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं। क्रिसमस और नए साल के त्यौहारों के ठीक पहले आए इस संकट ने न केवल आम जनता को डरा दिया है, बल्कि मुर्गी पालन उद्योग की कमर भी तोड़ दी है।
H5N1 वायरस की पुष्टि: भोपाल से आई रिपोर्ट
कुछ दिनों पहले इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बत्तखों और मुर्गियों की अचानक मौत की खबरें सामने आई थीं। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत मृत पक्षियों के नमूने जांच के लिए भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान (NIHSAD) भेजे थे। जांच रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि इन पक्षियों की मौत H5N1 (एवियन इन्फ्लुएंजा) नामक अत्यधिक संक्रामक वायरस के कारण हुई है। यह वायरस न केवल पक्षियों के लिए जानलेवा है, बल्कि दुर्लभ मामलों में यह इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है।
कलिंग (Culling) का आदेश: संक्रमण रोकने की चुनौती
संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए केरल सरकार ने सख्त प्रोटोकॉल लागू कर दिया है।
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1 किलोमीटर का दायरा: जिन स्थानों पर बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है, वहां से 1 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी घरेलू पक्षियों (मुर्गियों, बत्तखों और टर्की) को मारने यानी ‘कलिंग’ के आदेश दिए गए हैं।
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वैज्ञानिक निस्तारण: मारे गए पक्षियों को सुरक्षित तरीके से गहरा गड्ढा खोदकर दबाया जा रहा है या जलाया जा रहा है, ताकि वायरस वातावरण में न फैले।
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आवाजाही पर रोक: प्रभावित क्षेत्रों से अंडे, मांस और खाद के परिवहन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन ने पड़ोसी जिलों को भी हाई अलर्ट पर रहने को कहा है।
त्यौहारों के सीजन में आर्थिक झटका
केरल में दिसंबर का महीना उत्सवों का होता है। क्रिसमस और नए साल पर मांस और अंडों की मांग चरम पर होती है। ऐसे समय में बर्ड फ्लू के प्रकोप ने:
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किसानों की मुश्किलें बढ़ाईं: सैकड़ों छोटे किसानों की आजीविका केवल मुर्गी और बत्तख पालन पर टिकी है। पक्षियों के मारे जाने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि, सरकार ने मुआवजे का आश्वासन दिया है, लेकिन किसानों का मानना है कि यह नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है।
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मांस बाजार में मंदी: डर के कारण लोगों ने चिकन और अंडों से दूरी बना ली है, जिससे बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग की चेतावनी: क्या रखें सावधानी?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जनता को सलाह दी है कि वे बीमार या मृत पक्षियों के सीधे संपर्क में आने से बचें।
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पूरी तरह पका हुआ मांस: यदि आप पोल्ट्री उत्पादों का सेवन कर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वे 70°C से ऊपर के तापमान पर अच्छी तरह पकाए गए हों।
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निजी स्वच्छता: पक्षियों के संपर्क में आने वाले लोग अपने हाथों को साबुन और सैनिटाइजर से बार-बार साफ करें।
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लक्षणों पर नजर: यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार, खांसी या गले में खराश महसूस होती है, तो उसे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करना चाहिए।