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‘एडवांटेज हेल्थ केयर – इंडिया 2026’: भारत बनेगा दुनिया का ‘हेल्थकेयर हब’; केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा का संबोधन

भारत की राजधानी नई दिल्ली में आज 23 फरवरी, 2026 को स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित आयोजनों में से एक, ‘एडवांटेज हेल्थ केयर – इंडिया 2026’ के 8वें संस्करण का भव्य शुभारंभ हुआ। इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने किया। इस कार्यक्रम में विश्व भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और चिकित्सा जगत के दिग्गजों ने हिस्सा लिया।


भारत: मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (MVT) का वैश्विक केंद्र

सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अब केवल एक देश नहीं, बल्कि दुनिया के लिए एक ‘ग्लोबल वेलनेस डेस्टिनेशन’ बन चुका है।

  • लागत और गुणवत्ता: भारत में चिकित्सा उपचार की लागत पश्चिमी देशों की तुलना में मात्र 10% से 20% है, जबकि तकनीक और विशेषज्ञता अंतरराष्ट्रीय मानकों के समकक्ष है।

  • ‘हील इन इंडिया’ अभियान: सरकार ‘हील इन इंडिया’ (Heal In India) पहल के माध्यम से विदेशी मरीजों के लिए वीजा प्रक्रिया को सरल बना रही है और अस्पतालों में अंतरराष्ट्रीय सुविधा केंद्रों का विस्तार कर रही है।

  • भरोसा: दुनिया भर के मरीज जटिल सर्जरी, जैसे कार्डियक प्रोसीजर, कैंसर उपचार और अंग प्रत्यारोपण के लिए भारत को प्राथमिकता दे रहे हैं।


डिजिटल स्वास्थ्य और आयुष (AYUSH) का संगम

इस वर्ष के सम्मेलन का एक मुख्य स्तंभ डिजिटल नवाचार और पारंपरिक चिकित्सा का एकीकरण रहा है।

  1. डिजिटल हेल्थ मिशन: मंत्री नड्डा ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के माध्यम से मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित और डिजिटल बनाया जा रहा है, जिससे विदेशी मरीजों को भी अपने देश से परामर्श (Tele-consultation) लेने में आसानी होगी।

  2. समग्र चिकित्सा (Holistic Health): भारत अब आधुनिक एलोपैथी को प्राचीन आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के साथ एकीकृत कर रहा है। ‘एडवांटेज हेल्थ केयर’ के मंच से यह संदेश दिया गया कि भारत केवल ‘बीमारी के इलाज’ (Cure) पर नहीं, बल्कि ‘पूर्ण स्वास्थ्य’ (Wellness) पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।


वैश्विक सहयोग और भविष्य की चुनौतियां

सम्मेलन में लगभग 70 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान कई द्विपक्षीय समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसका उद्देश्य चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य जनशक्ति (Doctors & Nurses) के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।

सरकार का विजन: जे.पी. नड्डा ने स्पष्ट किया कि 2026 तक भारत का लक्ष्य अपनी स्वास्थ्य सेवा अर्थव्यवस्था को 15 बिलियन डॉलर तक पहुँचाना है। उन्होंने निजी क्षेत्र के अस्पतालों से अपील की कि वे अपनी सेवाओं में पारदर्शिता लाएं और अंतरराष्ट्रीय मरीजों के लिए सेवाओं को और अधिक सुलभ बनाएं।


निष्कर्ष

‘एडवांटेज हेल्थ केयर – इंडिया 2026’ यह दर्शाता है कि भारत स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक नई शक्ति के रूप में उभर रहा है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ, भारत न केवल अपने नागरिकों को बल्कि पूरी दुनिया को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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