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एंटीबायोटिक प्रतिरोध (Antibiotic Resistance) बढ़ा: 5 गलतियाँ जो दवा को बेअसर कर रही हैं और एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट 💊

भारत एक ऐसे गंभीर स्वास्थ्य संकट की दहलीज पर खड़ा है, जो भविष्य में सामान्य से सामान्य संक्रमणों का इलाज भी मुश्किल बना सकता है। यह संकट है एंटीबायोटिक प्रतिरोध (Antibiotic Resistance) का तेजी से बढ़ता खतरा। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि लोगों द्वारा की जा रही कुछ आम गलतियों के कारण एंटीबायोटिक दवाएँ, जो कभी जीवनरक्षक मानी जाती थीं, अब बेअसर होती जा रही हैं। यह स्थिति ‘सुपरबग्स’ (Superbugs) के जन्म को बढ़ावा दे रही है, जो मौजूदा दवाओं से ठीक नहीं होते।

एंटीबायोटिक प्रतिरोध तब होता है जब बैक्टीरिया अपनी संरचना बदल लेते हैं और एंटीबायोटिक दवाओं के प्रभाव को बेअसर कर देते हैं। इससे संक्रमण का इलाज करना बेहद कठिन या असंभव हो जाता है।


 

एंटीबायोटिक प्रतिरोध बढ़ाने वाली 5 प्रमुख गलतियाँ:

 

चिकित्सा समुदाय ने उन पांच प्रमुख गलतियों की पहचान की है जो भारत में एंटीबायोटिक प्रतिरोध को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं:

 

1. बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना (Self-Medication without Prescription)

 

  • सबसे बड़ी गलती: भारत में लोग अक्सर सर्दी-खांसी या बुखार जैसे मामूली लक्षणों पर केमिस्ट से सीधे एंटीबायोटिक खरीद लेते हैं या पुराने प्रिस्क्रिप्शन का उपयोग करते हैं। यह सबसे खतरनाक गलती है।
  • परिणाम: डॉक्टर यह जाने बिना एंटीबायोटिक नहीं देते कि संक्रमण बैक्टीरिया से है या वायरस से। वायरस से होने वाले संक्रमण (जैसे सामान्य सर्दी-जुकाम) में एंटीबायोटिक बिल्कुल बेअसर होती है और सिर्फ अनावश्यक रूप से शरीर के अंदर मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को मारती है, जिससे प्रतिरोध बढ़ जाता है।

 

2. दवा का पूरा कोर्स न करना (Not Completing the Full Course of Antibiotics)

 

  • गंभीर चूक: जब मरीज एंटीबायोटिक लेना शुरू करते हैं, तो अक्सर लक्षणों में सुधार होते ही वे दवा बंद कर देते हैं।
  • परिणाम: दवा बंद करने से संक्रमण फैलाने वाले कुछ मजबूत बैक्टीरिया शरीर में जीवित रह जाते हैं। ये बचे हुए बैक्टीरिया फिर एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बन जाते हैं और भविष्य में उस दवा से ठीक नहीं होते।

 

3. गलत खुराक या गलत दवा लेना (Incorrect Dosage or Wrong Antibiotic)

 

  • अनजाने में गलती: कई बार लोग सही खुराक नहीं लेते (जरूरत से कम या ज्यादा), या गलत एंटीबायोटिक का उपयोग कर लेते हैं जो उनके विशिष्ट संक्रमण के लिए प्रभावी नहीं होती।
  • परिणाम: गलत खुराक या गलत दवा भी बैक्टीरिया को प्रतिरोध विकसित करने का मौका देती है। जरूरत से कम खुराक बैक्टीरिया को पूरी तरह खत्म नहीं करती, बल्कि उन्हें दवा के प्रति मजबूत बना देती है।

 

4. अनावश्यक रूप से एंटीबायोटिक का उपयोग (Unnecessary Use of Antibiotics)

 

  • वायरल संक्रमण: डॉक्टर भी कभी-कभी वायरल संक्रमणों में एंटीबायोटिक लिख देते हैं, या मरीज उन पर एंटीबायोटिक लिखने का दबाव डालते हैं।
  • परिणाम: जैसा कि ऊपर बताया गया है, वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक का कोई काम नहीं होता, और यह सिर्फ एंटीबायोटिक प्रतिरोध को बढ़ावा देता है।

 

5. कृषि और पशुधन में एंटीबायोटिक का दुरुपयोग (Misuse in Agriculture and Livestock)

 

  • अप्रत्यक्ष खतरा: केवल मानव ही नहीं, बल्कि कृषि और पशुपालन में भी जानवरों के विकास को बढ़ावा देने या संक्रमणों को रोकने के लिए एंटीबायोटिक का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।
  • परिणाम: ये प्रतिरोधी बैक्टीरिया फिर खाद्य श्रृंखला के माध्यम से या पर्यावरण से मनुष्यों तक पहुँच सकते हैं, जिससे समस्या और बढ़ जाती है।

 

एंटीबायोटिक प्रतिरोध का गंभीर खतरा:

 

  • इलाज मुश्किल: निमोनिया, मूत्र पथ के संक्रमण (UTI), टीबी और रक्त प्रवाह के संक्रमण जैसे सामान्य जीवाणु संक्रमण का इलाज करना कठिन हो जाएगा।
  • उच्च मृत्यु दर: कुछ संक्रमणों के लिए कोई प्रभावी एंटीबायोटिक उपलब्ध न होने के कारण मृत्यु दर में वृद्धि होगी।
  • लंबा इलाज: इलाज लंबा और अधिक महंगा हो जाएगा, जिसमें अधिक शक्तिशाली और महंगे एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता होगी।

 

आवश्यक सलाह:

 

लोगों को यह समझना होगा कि एंटीबायोटिक कोई सामान्य दवा नहीं है। यह एक शक्तिशाली हथियार है जिसे तभी इस्तेमाल किया जाना चाहिए जब वास्तव में इसकी आवश्यकता हो।

  • हमेशा डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही एंटीबायोटिक लें।
  • डॉक्टर द्वारा बताई गई खुराक और अवधि का सख्ती से पालन करें, भले ही आप बेहतर महसूस करने लगें।
  • कभी भी दूसरों के साथ एंटीबायोटिक शेयर न करें या खुद से निदान न करें।
  • संक्रमण को रोकने के लिए अच्छी स्वच्छता अपनाएं (हाथ धोना, टीके लगवाना)।

एंटीबायोटिक प्रतिरोध एक वैश्विक खतरा है जिसके खिलाफ एकजुट प्रयास की आवश्यकता है। प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह इन दवाओं का समझदारी से उपयोग करे ताकि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रभावी बनी रहें।

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