
उत्तर भारत के विशाल हिस्से इस समय कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की चपेट में हैं। पारा लगातार गिरने के साथ ही जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों ने एक व्यापक पब्लिक हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। विशेष रूप से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में ‘हाइपोथर्मिया’ के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते इसे एक ‘मेडिकल इमरजेंसी’ के रूप में देखा जा रहा है।
हाइपोथर्मिया: एक गंभीर चिकित्सा आपातकाल
हाइपोथर्मिया तब होता है जब मानव शरीर गर्मी पैदा करने की तुलना में तेजी से गर्मी खोने लगता है, जिससे शरीर का तापमान खतरनाक रूप से गिरकर 95°F (35°C) से नीचे चला जाता है।
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लक्षण: अत्यधिक कंपन, बोलने में लड़खड़ाहट, धीमी सांस, कमजोर नाड़ी और मानसिक भ्रम इसके प्राथमिक लक्षण हैं।
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जोखिम: यदि समय पर उपचार न मिले, तो यह अंगों की विफलता और मृत्यु का कारण बन सकता है। एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया है कि ठंडी हवाओं के सीधे संपर्क में आने से यह स्थिति मिनटों में पैदा हो सकती है।
हृदय और श्वसन तंत्र पर प्रभाव
ठंड का प्रभाव केवल शरीर के तापमान तक सीमित नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, तापमान में अचानक गिरावट रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देती है (Vasoconstriction), जिससे रक्तचाप (Blood Pressure) अचानक बढ़ जाता है।
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हृदय रोग: रक्तचाप बढ़ने और रक्त के गाढ़ा होने से दिल के दौरे (Heart Attack) का खतरा काफी बढ़ जाता है।
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सांस की बीमारियाँ: घना कोहरा और ठंडी हवा दमा (Asthma) और ब्रोंकाइटिस के रोगियों के लिए घातक साबित हो रही है। कोहरे में मौजूद प्रदूषक तत्व फेफड़ों के संक्रमण को और गंभीर बना देते हैं।
संवेदनशील समूहों के लिए विशेष दिशा-निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने तीन प्रमुख समूहों को ‘हाई रिस्क’ श्रेणी में रखा है:
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बुजुर्ग: उम्र के साथ शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कम हो जाती है।
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बच्चे: बच्चों का शरीर जल्दी गर्मी खो देता है, इसलिए उन्हें परतों में कपड़े पहनाना आवश्यक है।
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क्रोनिक रोगी: हृदय, मधुमेह और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को घर के भीतर रहने की सलाह दी गई है।
बचाव के उपाय और सावधानी
सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी में कुछ अनिवार्य कदमों का उल्लेख किया गया है:
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परतों में कपड़े पहनें: एक भारी कपड़े के बजाय कई परतों (Layers) में ऊनी कपड़े पहनें, क्योंकि कपड़ों के बीच की हवा गर्मी को रोककर रखती है। सिर और कानों को ढंकना सबसे जरूरी है।
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खान-पान: पर्याप्त मात्रा में गर्म तरल पदार्थों (सूप, हर्बल टी, गुनगुना पानी) का सेवन करें। यह शरीर के आंतरिक तापमान को बनाए रखने में मदद करता है।
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शराब से परहेज: यह एक मिथक है कि शराब शरीर को गर्म रखती है; वास्तव में, यह शरीर की गर्मी को तेजी से बाहर निकालती है और हाइपोथर्मिया के जोखिम को बढ़ाती है।
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शारीरिक गतिविधि: घर के अंदर हल्की कसरत करें ताकि रक्त संचार सुचारू रहे।
निष्कर्ष
शीतलहर की यह स्थिति केवल मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बिना किसी अनिवार्य कार्य के रात और सुबह के समय बाहर न निकलें। सतर्कता और सही जानकारी ही इस कड़ाके की ठंड में जानलेवा बीमारियों से बचने का एकमात्र प्रभावी रास्ता है।