
सर्दियों की शुरुआत और साल के अंत की छुट्टियों के बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक नई स्वास्थ्य चुनौती को लेकर वैश्विक समुदाय को आगाह किया है। इन्फ्लुएंजा A(H3N2) वायरस का एक नया म्यूटेटेड स्वरूप, जिसे ‘सबक्लोड-K’ (Subclade K) नाम दिया गया है, दुनिया भर में तेजी से पैर पसार रहा है। 20 दिसंबर 2025 तक की रिपोर्ट के अनुसार, यह वेरिएंट अब तक 30 से अधिक देशों में दर्ज किया जा चुका है, जिसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
क्या है ‘सबक्लोड-K’ और यह कितना अलग है?
इन्फ्लुएंजा A(H3N2) आमतौर पर मौसमी फ्लू का कारण बनता है, लेकिन ‘सबक्लोड-K’ इसके आनुवंशिक कोड में हुए कुछ महत्वपूर्ण बदलावों (म्यूटेशन) का परिणाम है।
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तेजी से प्रसार: WHO के अनुसार, इस वेरिएंट की संक्रमण दर पिछले स्ट्रेन की तुलना में 20% अधिक देखी गई है। यह बंद कमरों और भीड़भाड़ वाले स्थानों में बहुत जल्दी फैलता है।
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टीकों की प्रभावशीलता पर असर: सबसे बड़ी चिंता इसके ‘एंटीजेनिक ड्रिफ्ट’ (Antigenic Drift) को लेकर है। प्रारंभिक प्रयोगशाला अध्ययनों से संकेत मिले हैं कि इस म्यूटेशन के कारण मौजूदा फ्लू शॉट (Flu Vaccine) की प्रभावशीलता कुछ कम हो सकती है। हालांकि, टीके अभी भी गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को कम करने में सक्षम हैं।
क्या यह वेरिएंट अधिक घातक है?
राहत की बात यह है कि शुरुआती डेटा के अनुसार, ‘सबक्लोड-K’ से संक्रमित मरीजों में बीमारी की गंभीरता (Severity) में कोई नाटकीय वृद्धि नहीं देखी गई है। इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही हैं:
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तेज बुखार और ठंड लगना।
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लगातार खांसी और गले में खराश।
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मांसपेशियों में गंभीर दर्द और थकान।
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कुछ मामलों में नाक बहना और सिरदर्द।
हालांकि, उच्च जोखिम वाले समूह (65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, बच्चे और अस्थमा या हृदय रोग से पीड़ित व्यक्ति) के लिए यह अभी भी जानलेवा साबित हो सकता है।
सर्दियों और छुट्टियों का मौसम: एक बड़ी चुनौती
दिसंबर का महीना छुट्टियों और यात्राओं का होता है। WHO के महानिदेशक ने चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय यात्राओं और इनडोर कार्यक्रमों के कारण ‘सबक्लोड-K’ का ग्राफ जनवरी के अंत तक अपने चरम (Peak) पर पहुँच सकता है। शुष्क और ठंडी हवा वायरस को लंबे समय तक जीवित रहने में मदद करती है, जिससे संक्रमण का खतरा दोगुना हो जाता है।
विशेषज्ञों की सलाह और बचाव के उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस नए वेरिएंट से निपटने के लिए “सतर्कता, डर नहीं” (Caution, not Panic) का मंत्र दिया है:
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टीकाकरण: भले ही प्रभावशीलता थोड़ी कम हुई हो, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन्फ्लुएंजा वैक्सीन लगवाना सुरक्षा की पहली दीवार है।
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मास्क का उपयोग: सार्वजनिक परिवहन, हवाई अड्डों और भीड़भाड़ वाले बाजारों में मास्क पहनना फिर से अनिवार्य जैसा हो गया है।
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हाथों की स्वच्छता: नियमित रूप से साबुन से हाथ धोना या सैनिटाइजर का उपयोग करना वायरस के प्रसार को रोकता है।
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लक्षण दिखने पर आइसोलेशन: यदि आपको फ्लू जैसे लक्षण महसूस हों, तो खुद को दूसरों से अलग करें और तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। एंटी-वायरल दवाएं शुरुआती 48 घंटों में सबसे प्रभावी होती हैं।
निष्कर्ष
‘सबक्लोड-K’ का उदय हमें याद दिलाता है कि श्वसन संबंधी वायरस लगातार विकसित हो रहे हैं। वैश्विक स्वास्थ्य निगरानी प्रणालियां अब इस पर बारीकी से नजर रख रही हैं ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर टीकों के फॉर्मूले में बदलाव किया जा सके। फिलहाल, व्यक्तिगत सावधानी ही इस नए वेरिएंट को फैलने से रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।