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इंडियन फार्माकोपिया (IP) 2026: भारतीय दवाओं की गुणवत्ता का नया अध्याय

1. क्या है ‘इंडियन फार्माकोपिया’ (IP)?

इंडियन फार्माकोपिया (IP) एक आधिकारिक और कानूनी रूप से बाध्यकारी पुस्तक है, जिसमें दवाओं की पहचान, शुद्धता और शक्ति के मानक निर्धारित किए जाते हैं। भारत में निर्मित या आयात की जाने वाली कोई भी दवा तब तक वैध नहीं मानी जाती जब तक वह IP द्वारा निर्धारित मानकों पर खरी न उतरे। ‘IP 2026’ इस श्रृंखला का नवीनतम और सबसे आधुनिक संस्करण है।

2. ‘IP 2026’ की मुख्य विशेषताएं और नवाचार

इस नए संस्करण को वैश्विक मानकों (जैसे USP और BP) के साथ तालमेल बिठाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:

  • कैंसर और दुर्लभ बीमारियों पर ध्यान: पहली बार, कैंसर (Oncology) के इलाज में उपयोग होने वाली आधुनिक दवाओं और दुर्लभ बीमारियों (Rare Diseases) के लिए विशेष ‘मोनोग्राफ’ (मानक विवरण) शामिल किए गए हैं।

  • बायोलॉजिक्स और वैक्सीन: कोरोना महामारी के अनुभवों को देखते हुए, नई पीढ़ी के टीकों (Vaccines) और बायोलॉजिकल दवाओं के परीक्षण के लिए सख्त प्रोटोकॉल बनाए गए हैं।

  • अशुद्धता प्रोफाइलिंग (Impurity Profiling): दवाओं में सूक्ष्म अशुद्धियों का पता लगाने के लिए उन्नत रासायनिक और विश्लेषणात्मक पद्धतियों को अनिवार्य किया गया है।

3. ‘मेक इन इंडिया’ और वैश्विक निर्यात को बढ़ावा

सरकार का लक्ष्य भारत को केवल जेनेरिक दवाओं तक सीमित न रखकर ‘इनोवेशन हब’ बनाना है।

  • भरोसेमंद निर्यात: IP 2026 के मानकों के लागू होने से विदेशों में भारतीय दवाओं की स्वीकार्यता और बढ़ेगी। इससे उन देशों में निर्यात आसान होगा जो उच्च गुणवत्ता मानकों की मांग करते हैं।

  • लागत में कमी: मानकीकरण से दवाओं के निर्माण की प्रक्रिया सुव्यवस्थित होती है, जिससे लंबे समय में दवाओं की लागत कम होने की संभावना रहती है।

4. मरीजों की सुरक्षा और सुलभता

मरीजों के लिए इसका सीधा अर्थ है—अधिक सुरक्षा और बेहतर प्रभावशीलता

  • जब दवाओं के मानक उच्च होते हैं, तो उनके दुष्प्रभाव (Side-effects) की संभावना कम हो जाती है।

  • कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं अब अधिक भरोसेमंद होंगी, जिससे मरीजों को इलाज के दौरान बेहतर परिणाम मिलेंगे।


IP 2026: एक तुलनात्मक दृष्टि

विशेषता पुराने मानक (IP 2022) नए मानक (IP 2026)
मोनोग्राफ की संख्या सीमित 100+ नए जीवनरक्षक दवाओं के मोनोग्राफ
तकनीक पारंपरिक विश्लेषण डिजिटल और हाई-टेक स्पेक्ट्रोस्कोपी
क्षेत्र मुख्य रूप से जेनेरिक बायोटेक, कैंसर और दुर्लभ रोग शामिल
वैश्विक स्थिति विकासशील देशों में मान्य वैश्विक फार्मा मानकों (WHO) के समकक्ष

5. फार्मास्युटिकल इकोसिस्टम का सुदृढ़ीकरण

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि ‘IP 2026’ केवल एक पुस्तक नहीं है, बल्कि यह “जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट” की हमारी प्रतिबद्धता है। सरकार अब डिजिटल फार्माकोपिया की ओर भी बढ़ रही है, जिससे निर्माता और रेगुलेटरी बॉडीज रीयल-टाइम में मानकों को एक्सेस कर सकेंगी।

निष्कर्ष: ‘इंडियन फार्माकोपिया 2026’ का लॉन्च होना भारतीय फार्मा उद्योग के लिए एक ‘प्रौद्योगिकी छलांग’ (Technological Leap) है। यह न केवल भारतीय नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करेगा, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भारत की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाएगा।

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