
भारत ने वैश्विक स्वास्थ्य मानचित्र पर अपनी स्थिति को और सुदृढ़ करते हुए ‘इंडियन फार्माकोपिया 2026’ (IP 2026) का 10वां संस्करण जारी कर दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा अनावरण किया गया यह दस्तावेज भारतीय फार्मास्युटिकल क्षेत्र में पारदर्शिता, सुरक्षा और नवाचार के एक नए युग की शुरुआत करता है।
IP 2026 की मुख्य विशेषताएं और विस्तार
इस नए संस्करण में व्यापक शोध के बाद 121 नए मोनोग्राफ (Monographs) जोड़े गए हैं। ये मानक मुख्य रूप से उन बीमारियों पर केंद्रित हैं जो भारत और वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं:
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कैंसर, डायबिटीज और टीबी: इन बीमारियों की दवाओं के लिए सख्त मानक तय किए गए हैं ताकि मरीजों को सबसे प्रभावी और सुरक्षित उपचार मिल सके।
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ब्लड कंपोनेंट मानक: पहली बार, आईपी में रक्त के घटकों (Blood Components) के मानकों को शामिल किया गया है। यह जटिल सर्जरी और इमरजेंसी मेडिसिन में उपयोग होने वाले रक्त उत्पादों की शुद्धता सुनिश्चित करेगा।
वैश्विक स्वीकार्यता और आर्थिक प्रभाव
वर्तमान में, भारत दुनिया के उन शीर्ष देशों में शामिल है जो सबसे अधिक जेनेरिक दवाओं का निर्यात करते हैं। IP 2026 के आने से निम्नलिखित महत्वपूर्ण बदलाव होंगे:
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19+ देशों में मान्यता: भारतीय फार्माकोपिया मानकों को अब दुनिया के 19 से अधिक देश सीधे स्वीकार करते हैं। इसका मतलब है कि भारत में बनी दवाएं बिना किसी अतिरिक्त परीक्षण के इन देशों के बाजारों में प्रवेश कर सकेंगी।
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गुणवत्ता का भरोसा: ‘दुनिया की फार्मेसी’ के रूप में भारत पर भरोसा और बढ़ेगा, जिससे दवा निर्यात में भारी वृद्धि की संभावना है।
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लागत और प्रतिस्पर्धा: उच्च मानकों के साथ उत्पादन करने से भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूरोपीय और अमेरिकी मानकों का मुकाबला और भी प्रभावी ढंग से कर सकेंगी।
तकनीक और नवाचार का समावेश
2026 के इस संस्करण में आधुनिक परीक्षण विधियों जैसे Impurity Profiling और Dissolution Testing के नए मानदंडों को अपनाया गया है। यह सुनिश्चित करता है कि दवा न केवल प्रयोगशाला में शुद्ध है, बल्कि मानव शरीर में जाने के बाद भी उसी तरह काम करती है जैसा कि अपेक्षित है।
निष्कर्ष
‘इंडियन फार्माकोपिया 2026’ केवल मानकों की पुस्तक नहीं है, बल्कि यह 1.4 बिलियन भारतीयों और दुनिया भर के करोड़ों मरीजों के स्वास्थ्य की गारंटी है। यह कदम भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘हीलिंग बाय इंडिया’ (Healing by India) के संकल्प को मजबूती प्रदान करता है। दवाओं की गुणवत्ता में यह सुधार भविष्य में स्वास्थ्य देखभाल की लागत को कम करने और जीवन प्रत्याशा को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।