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🤯 AI ‘महाभारत’ पर ऐतिहासिक ब्लंडर: हस्तिनापुर के महल में मॉडर्न सोफा-बेड, मेकर्स की जमकर खिल्ली

हाल ही में लॉन्च हुई एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा निर्मित नई पौराणिक सीरीज़ ‘महाभारत: एक धर्मयुद्ध’ ने अपनी भव्यता के बजाय एक गंभीर और हास्यास्पद ऐतिहासिक चूक के कारण विवादों का केंद्र बन गई है। यह सीरीज़ भारतीय महाकाव्य ‘महाभारत’ को एक नए और आधुनिक तरीके से प्रस्तुत करने का वादा कर रही थी, लेकिन एआई जनरेशन में हुई एक भारी गलती ने मेकर्स को सोशल मीडिया पर कड़ी ट्रोलिंग का शिकार बना दिया है।

 

विवाद का केंद्र: मॉडर्न फर्नीचर

 

विवाद की जड़ एक विशेष दृश्य है जिसमें पौराणिक पात्र देवी गंगा और उनके पुत्र भीष्म को हस्तिनापुर के महल के एक कक्ष में बातचीत करते हुए दिखाया गया है। यह सीन उस कालखंड (प्राचीन भारत) का प्रतिनिधित्व करता है जहाँ जीवनशैली, वास्तुकला और फर्नीचर पूरी तरह से पारंपरिक और हस्तनिर्मित हुआ करते थे।

लेकिन, एआई द्वारा जनरेट किए गए इस दृश्य में हस्तिनापुर के महल के अंदरूनी हिस्सों में जो कुछ दिखाई दिया, उसने दर्शकों को भौंचक्का कर दिया:

  1. मॉडर्न सोफा सेट: दृश्यों में प्राचीन काल के पलंग या आसन के बजाय, आधुनिक डिज़ाइन के आरामदायक सोफा सेट दिखाई दिए।
  2. समकालीन बेडरूम: सबसे बड़ी चूक तब सामने आई जब पृष्ठभूमि में एक बेडरूम में समकालीन डिज़ाइन के बिस्तर और साइड टेबल दिखाई दिए, जो 21वीं सदी के लक्ज़री अपार्टमेंट से उठाए गए लग रहे थे।
  3. अनफिट लाइटिंग: कई जगहों पर प्राचीन लैंप या मशालों के बजाय मॉडर्न एलईडी लाइटिंग का आभास भी हुआ।

इस तकनीकी और ऐतिहासिक विसंगति ने ‘महाभारत’ के गंभीर संदर्भ को हास्यास्पद बना दिया।

 

सोशल मीडिया पर मीम्स और टिप्पणियों की बाढ़

 

इस ‘महाभारत ब्लंडर’ के स्क्रीनशॉट और छोटे क्लिप्स देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। यूज़र्स ने तुरंत ही इसे पकड़ लिया और मेकर्स की जमकर खिल्ली उड़ाई। ट्विटर (X), इंस्टाग्राम और फेसबुक पर मीम्स और व्यंग्यात्मक टिप्पणियों की बाढ़ आ गई है।

  • यूज़र्स का व्यंग्य: एक यूज़र ने मज़ाक उड़ाते हुए लिखा, “शायद भीष्म ने देवी गंगा के साथ अमेज़न प्राइम डे सेल से नया सोफा ऑर्डर किया था।”
  • दूसरे यूज़र ने टिप्पणी की, “एआई को पता नहीं था कि हस्तिनापुर में ‘होम सेंटर’ नाम की कोई दुकान नहीं थी।”
  • कई लोगों ने एआई की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्राचीन कथाओं को बनाने के लिए अभी भी मानवीय पर्यवेक्षण कितना ज़रूरी है।

ट्रोलिंग का मुख्य निशाना सीरीज़ के मेकर्स हैं, जिन्होंने फाइनल कट जारी करने से पहले इन गंभीर विसंगतियों को नज़रअंदाज़ किया।

 

एआई की सीमाओं पर बहस

 

यह विवाद सिर्फ एक तकनीकी चूक नहीं है, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा कंटेंट क्रिएशन की सीमाओं को भी उजागर करता है। एआई शक्तिशाली है, लेकिन ऐतिहासिक सटीकता, सांस्कृतिक बारीकियों और संदर्भों को समझने में अभी भी कमजोर है। एआई को जब ‘प्राचीन महल’ की कमांड दी गई, तो उसने डेटाबेस में मौजूद सबसे ‘भव्य’ और ‘लक्ज़री’ बेडरूम की तस्वीरों का उपयोग किया, जो अनजाने में आधुनिक फर्नीचर का कारण बन गया।

यह घटना उन सभी कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एक सबक है जो पूरी तरह से एआई पर निर्भर हो रहे हैं। जटिल और संवेदनशील विषयों, खासकर पौराणिक गाथाओं के लिए, मानवीय विशेषज्ञता और एक सक्षम कला निर्देशक का हस्तक्षेप अपरिहार्य है।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️