
हैदराबाद, तेलंगाना। (28 अक्टूबर, 2025)
भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और साउथ के मेगास्टार चिरंजीवी हाल ही में एक गंभीर साइबर क्राइम का शिकार हो गए हैं। अत्याधुनिक डीपफेक तकनीक (Deepfake Technology) का उपयोग करके उनके चेहरे से छेड़छाड़ किए गए अश्लील वीडियो क्लिप्स को कुछ अवैध ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और वेबसाइटों पर अपलोड किया गया है। इस सनसनीखेज खुलासे ने न केवल उनके फैंस को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि मनोरंजन जगत और समाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग पर एक बड़ी चिंता पैदा कर दी है।
डीपफेक: दुरुपयोग की भयावहता
मेगास्टार चिरंजीवी के ध्यान में जैसे ही यह आपत्तिजनक सामग्री आई, उन्होंने इस गंभीर साइबर अपराध के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की। उनके लीगल और डिजिटल टीम ने तत्काल प्रभाव से हैदराबाद पुलिस के साइबर क्राइम विभाग में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत में बताया गया है कि दुर्भावनापूर्ण इरादे से अपराधियों ने डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल किया है। यह तकनीक किसी व्यक्ति के चेहरे को उच्च सटीकता के साथ किसी अन्य व्यक्ति के शरीर पर मॉर्फ (Morphed) कर देती है, जिससे नकली वीडियो को असली जैसा दिखाना संभव हो जाता है। चिरंजीवी के मामले में, अपराधियों ने उनके चेहरे का इस्तेमाल करके अश्लील और अपमानजनक सामग्री बनाई, जिसे इंटरनेट पर प्रसारित किया गया।
पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई
साइबर क्राइम विभाग ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तुरंत मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस की टीम उन अवैध वेबसाइटों और सोशल मीडिया हैंडल्स की पहचान करने में जुटी है, जिन्होंने सबसे पहले इन क्लिप्स को अपलोड या प्रसारित किया था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह जांच एक जटिल प्रक्रिया है क्योंकि अपराधी अक्सर वीपीएन (VPN) और अन्य टूल का उपयोग करके अपनी पहचान छिपाते हैं। हालांकि, पुलिस इस डीपफेक कंटेंट के मूल स्रोत तक पहुंचने और इसमें शामिल व्यक्तियों को गिरफ्तार करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ले रही है। अपराधियों पर आईटी अधिनियम (IT Act) और मानहानि से संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
AI दुरुपयोग पर गंभीर चिंता
चिरंजीवी जैसे सार्वजनिक शख्सियत का डीपफेक का शिकार होना, इस बात का प्रमाण है कि यह तकनीक अब कितनी खतरनाक हो चुकी है। यह घटना सिर्फ मनोरंजन उद्योग के लिए ही नहीं, बल्कि आम जनता के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है।
विशेषज्ञों की राय: डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि डीपफेक का उपयोग अब न केवल वित्तीय धोखाधड़ी या फेक न्यूज़ फैलाने के लिए, बल्कि व्यक्तियों को बदनाम करने और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए भी किया जा रहा है। सरकार और तकनीकी कंपनियों को जल्द से जल्द डीपफेक पहचान (Detection) और रोकथाम (Prevention) के लिए कड़े नियम और उन्नत उपकरण विकसित करने की आवश्यकता है।
मेगास्टार चिरंजीवी ने इस घटना के माध्यम से लोगों से अपील की है कि वे इंटरनेट पर प्रसारित होने वाली किसी भी सामग्री की सत्यता की जांच करें और इस तरह के आपत्तिजनक कंटेंट को बढ़ावा न दें।