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📽️ बॉक्स ऑफिस पर ‘बाहुबली: द एपिक’ का ऐतिहासिक पुनरागमन: री-रिलीज़ में कमाई का तूफान, नई फिल्मों को पछाड़ा

महान फिल्म निर्माता एसएस राजामौली की एपिक मास्टरपीस ‘बाहुबली’ फ्रेंचाइजी ने एक बार फिर भारतीय सिनेमाई इतिहास में अपना दबदबा साबित किया है। फिल्म के एक नए, संवर्द्धित (एनरिच्ड) वर्जन, जिसका नाम ‘बाहुबली: द एपिक’ है, को हाल ही में सिनेमाघरों में री-रिलीज़ किया गया, और इसने बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद से कहीं अधिक जबरदस्त धमाल मचाया है।

 

10 साल बाद भी वही जुनून

 

‘बाहुबली’ फिल्म को रिलीज़ हुए लगभग 10 साल हो चुके हैं, लेकिन इसके प्रति दर्शकों का जुनून कम नहीं हुआ है। फिल्म को नए ग्राफिक्स, बेहतर साउंड मिक्सिंग और कुछ अतिरिक्त फुटेज के साथ एक नए अनुभव के रूप में ‘बाहुबली: द एपिक’ के नाम से पेश किया गया।

दर्शकों ने इस मौके को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। री-रिलीज़ के पहले वीकेंड में ही फिल्म ने अविश्वसनीय कमाई की है। सिनेमाघरों में दर्शकों की भीड़ देखकर ऐसा लगा ही नहीं कि यह फिल्म एक दशक पुरानी है। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि राजामौली की फिल्में सिर्फ हिट नहीं होतीं, बल्कि एक सांस्कृतिक घटना बन जाती हैं।

 

नई फिल्मों पर भारी पड़ी पुरानी गाथा

 

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ‘बाहुबली: द एपिक’ ने बॉक्स ऑफिस पर कई हालिया रिलीज़ हुई नई फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है। इस वीकेंड पर रिलीज़ हुई आयुष्मान खुराना अभिनीत ‘थामा’ और रोमांटिक ड्रामा ‘एक दीवाने की दीवानियत’ जैसी फिल्मों को दर्शकों का उतना प्यार नहीं मिला, जितना इस री-रिलीज़ हुई एपिक फिल्म को मिला।

इन फिल्मों के मुकाबले ‘बाहुबली: द एपिक’ के टिकटों की बिक्री, खासकर मल्टीप्लेक्स में, काफी अधिक रही। यह घटना बॉलीवुड के फिल्म निर्माताओं और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एक कड़ा संदेश है कि आज भी दर्शकों को भव्य सिनेमाई अनुभव और मजबूत कहानी ही आकर्षित करती है, भले ही फिल्म कितनी भी पुरानी क्यों न हो।

 

राजामौली की विरासत का प्रमाण

 

इस बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन ने एक बार फिर एसएस राजामौली की दूरदर्शिता और उनकी रचनात्मकता की शक्ति को साबित कर दिया है। उनकी फिल्में, जैसे ‘आरआरआर’ और ‘बाहुबली’, केवल मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि अपने किरदारों, ग्राफिक्स और इमोशन के माध्यम से दर्शकों के साथ एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करती हैं।

फिल्म विश्लेषकों का मानना है कि ‘बाहुबली’ का री-रिलीज़ इतना सफल इसलिए रहा क्योंकि यह एक सामूहिक नॉस्टेल्जिया (Nostalgia) और एक पीढ़ी को उस सवाल का रोमांच फिर से जीने का मौका देता है, जिसने पूरे देश को बाँध रखा था – ‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?’

इस अप्रत्याशित सफलता के बाद, उम्मीद है कि अन्य निर्माता भी अपनी लोकप्रिय क्लासिक फिल्मों को बेहतर क्वालिटी में री-रिलीज़ करने पर विचार कर सकते हैं, जिससे सिनेमाघरों को भी एक नया राजस्व स्रोत मिलेगा।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️