
साउथ फिल्म इंडस्ट्री और विशेष रूप से मलयालम सिनेमा (Mollywood) से एक बेहद स्तब्ध और दुखी करने वाली खबर सामने आई है। अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग, बेमिसाल अभिनय और जीवंत किरदारों से दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले दिग्गज अभिनेता सलीम कुमार का 56 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता इस महान कलाकार ने अस्पताल में अपनी आखिरी सांस ली। उनके अचानक चले जाने से न केवल मलयालम सिनेमा, बल्कि पूरी भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। फैंस और सिनेमा जगत से जुड़ी बड़ी हस्तियां इस अपूरणीय क्षति पर गहरा दुख व्यक्त कर रही हैं।
दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल में थे भर्ती
पारिवारिक सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनेता सलीम कुमार को अचानक दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ा था, जिसके बाद उन्हें तुरंत बेहद गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनकी बिगड़ती स्थिति को देखते हुए उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम (वेंटिलेटर) पर रखा था। डॉक्टरों की एक विशेष टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए थी और उन्हें बचाने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे थे। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और आखिरकार इस बहुमुखी प्रतिभा के धनी कलाकार ने दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।
मिमिक्री आर्टिस्ट से ‘नेशनल अवार्ड विनर’ बनने का शानदार सफर
सलीम कुमार का फिल्मी सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक मिमिक्री आर्टिस्ट (Mimicry Artist) के रूप में की थी। कोचीन कलाभवन (Cochin Kalabhavan) से जुड़े रहने के दौरान उन्होंने अपनी अनूठी आवाज और कॉमेडी के हुनर से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद उन्होंने टेलीविजन शोज और स्टेज नाटकों के जरिए अभिनय की दुनिया में कदम रखा।
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कॉमेडी के किंग: 1990 और 2000 के दशक में सलीम कुमार मलयालम सिनेमा के सबसे लोकप्रिय कॉमेडियन बनकर उभरे। उनके बिना उस दौर की कॉमेडी फिल्में अधूरी मानी जाती थीं। उनके बोले गए कई डायलॉग्स आज भी सोशल मीडिया पर मीम्स (Memes) के रूप में बेहद लोकप्रिय हैं।
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सीरियस एक्टिंग में मनवाया लोहा: सलीम कुमार केवल हंसाने तक सीमित नहीं रहे। साल 2010 में आई फिल्म ‘आदामिनते मकन अबू’ (Adaminte Makan Abu) उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म में उन्होंने एक गरीब और ईमानदार मुस्लिम वृद्ध का किरदार निभाया था, जो हज यात्रा पर जाने की इच्छा रखता है। इस फिल्म में उनके बेहद संजीदा और भावुक कर देने वाले अभिनय ने हर किसी की आंखें नम कर दी थीं।
राष्ट्रीय पुरस्कार और अन्य सम्मान
फिल्म ‘आदामिनते मकन अबू’ में उनके इसी शानदार और बेमिसाल अभिनय के लिए उन्हें साल 2010 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Award for Best Actor) से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें अपने करियर में कई बार केरल राज्य फिल्म पुरस्कार (Kerala State Film Awards) और अन्य प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। उन्होंने अभिनय के साथ-साथ कुछ फिल्मों का निर्देशन (Direction) और लेखन भी किया, जहां उन्होंने अपनी रचनात्मकता का परिचय दिया।
फिल्म इंडस्ट्री और फैंस में शोक की लहर
सलीम कुमार के निधन की खबर मिलते ही सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया है। मलयालम सिनेमा के सुपरस्टार्स मम्मूटी, मोहनलाल, पृथ्वीराज सुकुमारन से लेकर फिल्म इंडस्ट्री के निर्देशकों और तकनीशियनों ने उनके जाने पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
“सलीम कुमार केवल एक सह-कलाकार नहीं थे, बल्कि वे सिनेमा की एक संस्था थे। उन्होंने हमें जितना हंसाया, अपनी गंभीर भूमिकाओं से उतना ही हमारे दिलों को झकझोरा भी। उनका जाना मेरे लिए एक व्यक्तिगत क्षति है।” — साउथ सिनेमा के एक दिग्गज कलाकार
सिनेमा प्रेमियों का कहना है कि सलीम कुमार जैसा नेचुरल एक्टर सदियों में एक बार पैदा होता है। पर्दे पर उनकी मौजूदगी ही दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए काफी होती थी।
निष्कर्ष
सलीम कुमार का 56 वर्ष की असमय आयु में चले जाना फिल्म जगत के लिए एक ऐसा खालीपन छोड़ गया है, जिसे कभी नहीं भरा जा सकेगा। उन्होंने एक मिमिक्री मंच से शुरू करके देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय पुरस्कार तक का जो सफर तय किया, वह आने वाली पीढ़ियों के कलाकारों के लिए हमेशा एक मार्गदर्शक का काम करेगा। भले ही आज सलीम कुमार हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन अपनी फिल्मों, अमर किरदारों और करोड़ों चेहरों पर बिखेरी गई मुस्कान के जरिए वे हमेशा अपने फैंस के दिलों में जिंदा रहेंगे। मनोरंजन जगत इस महान आत्मा की शांति की कामना करता है।