
राजस्थान के प्रमुख कृषि प्रधान जिलों में शुमार श्रीगंगानगर की अनाज मंडियों में इन दिनों फसलों की आवक और दामों के उतार-चढ़ाव को लेकर भारी हलचल देखी जा रही है। जिला मुख्यालय स्थित मुख्य अनाज मंडी सहित गजसिंहपुर, रायसिंहनगर, सूरतगढ़, अनूपगढ़ और केसरीसिंहपुर की मंडियों में रोजाना बड़ी मात्रा में कृषि जिंसों की पहुंच हो रही है। कृषि विपणन और बाजार के जानकारों के अनुसार, मानसूनी स्थितियों और बाजार में मांग-आपूर्ति के समीकरणों के कारण जिंसों की कीमतों में लगातार अस्थिरता बनी हुई है।
मंडियों में जिंसों की आवक और दामों की स्थिति
जिले की मंडियों में मूंग, ग्वार, नरमा (कपास), तिलहन (सरसों व तिल) के साथ-साथ चीनी और गुड़ के व्यापार में भी दैनिक स्तर पर काफी बदलाव देखने को मिल रहा है।
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तिलहन एवं दलहन: सरसों और तिल की आवक मंडियों में बनी हुई है। वैश्विक बाजार में खाद्य तेलों की दरों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर स्थानीय तिलहन के दामों पर पड़ा है। व्यापारियों का कहना है कि मांग में उतार-चढ़ाव के कारण सरसों और मूंग के भाव में पिछले कुछ दिनों में प्रति क्विंटल 150 से 300 रुपये तक की तेजी-मंदी दर्ज की गई है।
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चीनी और गुड़ के दाम: त्योहारी सीजन और मांग के रुख को देखते हुए चीनी और गुड़ के थोक व खुदरा भावों में भी उतार-चढ़ाव जारी है। आवक में थोड़ी कमी आने पर गुड़ के दामों में मामूली उछाल देखा जा रहा है, वहीं चीनी के दाम सीमित दायरे में स्थिर बने हुए हैं।
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नरमा और ग्वार: श्रीगंगानगर क्षेत्र में नरमा और ग्वार की खेती बड़े पैमाने पर होती है। मंडियों में इनकी शुरुआती आवक के साथ ही किसानों को बेहतर समर्थन मूल्य और पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया की उम्मीद है, ताकि उन्हें अपनी उपज का उचित लाभ मिल सके।
रबी फसल की बुआई: सिंचाई पानी की निर्बाध आपूर्ति की मांग
श्रीगंगानगर का पूरा कृषि चक्र नहरी सिंचाई प्रणाली पर टिका हुआ है। वर्तमान समय में किसान रबी की प्रमुख फसलों—जैसे गेहूं, चना और सरसों की अगेती बुआई की तैयारियों में जुटे हैं। बुआई के इस महत्वपूर्ण चरण में किसानों ने राज्य सरकार और नहरी विभाग से पानी की निर्बाध आपूर्ति की पुरजोर मांग की है।
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गंगनहर और इंदिरा गांधी नहर परियोजना: किसानों का कहना है कि बुआई के समय यदि नहरी पानी में कटौती या बंदी की जाती है, तो इससे फसलों के अंकुरण और पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
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समान वितरण की मांग: किसान संगठनों ने मांग की है कि नहरों के टेल (अंतिम छोर) तक पानी की निर्बाध और पूरी मात्रा में आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि दूर-दराज के खेतों में भी समय पर बिजाई हो सके।
डीएपी (DAP) खाद की उपलब्धता को लेकर चिंताएं
रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही जिले में डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) खाद की मांग में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। बुआई के दौरान पौधों के शुरुआती विकास के लिए डीएपी एक अति-आवश्यक उर्वरक है।
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सोसाइटियों और दुकानों पर कतारें: किसानों का कहना है कि उन्हें सहकारी समितियों और निजी कृषि सेवा केंद्रों से जरूरत के मुताबिक डीएपी नहीं मिल पा रहा है। खाद की किल्लत की आशंका से किसानों में चिंता का माहौल है।
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कालाबाजारी पर रोक की मांग: किसान प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि खाद के स्टॉक की पारदर्शी निगरानी की जाए, ताकि इसकी कालाबाजारी न हो और किसानों को निर्धारित एमआरपी (MRP) पर आसानी से उर्वरक मिल सके।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशासन समय रहते सिंचाई पानी का शेड्यूल सही बनाए रखता है और उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करता है, तो श्रीगंगानगर जिले में रबी सीजन का उत्पादन काफी बेहतर रहेगा। वहीं, मंडियों में पारदर्शी व्यापार से किसानों को उनकी कड़ी मेहनत का सही मूल्य मिलने की उम्मीद है।