
श्रीगंगानगर जिला राजस्थान का प्रमुख अन्न भंडार (Grain Bowl) माना जाता है। खरीफ सीजन के दौरान यहाँ की मंडियों में धान (Paddy/चावल) की आवक अत्यधिक बढ़ जाती है। 1 नवंबर को श्रीगंगानगर की मुख्य कृषि उपज मंडी (Grain Market) में धान की लगातार हो रही बंपर आवक, मंडी परिसर में ट्रैफिक प्रबंधन, बारदाने की उपलब्धता और खरीद व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन, मंडी समिति और मंडी व्यापार मंडल की एक महत्त्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि दूर-दराज के गांवों से अपनी मेहनत की फसल लेकर आ रहे किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और उन्हें उनकी उपज का त्वरित व उचित मूल्य मिल सके।
1. मंडी में बंपर आवक और स्थान प्रबंधन (Space Management)
नवंबर का महीना धान की कटाई और बिक्री का चरम (Peak Season) होता है। श्रीगंगानगर मंडी में प्रतिदिन हजारों क्विंटल बासमती, 1509, 1121 और अन्य किस्मों के धान की आवक दर्ज की जा रही है।
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शेड्स और यार्ड का आवंटन: बैठक में मंडी समिति के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि मंडी प्रांगण के सभी शेड्स को साफ और खाली रखा जाए ताकि किसान अपनी फसल को खुले आसमान के नीचे उतरने को मजबूर न हों।
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यायात नियंत्रण: मंडी परिसर के भीतर ट्रकों, ट्रैक्टर-ट्रॉली और कंबाइन मशीनों के कारण लगने वाले जाम से निपटने के लिए ट्रैफिक पुलिस और मंडी गार्ड्स की विशेष टीमें तैनात करने का निर्णय लिया गया।
2. किसानों को उचित और पारदर्शी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)
जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मंडी व्यापार मंडल और आढ़तियों (Commission Agents) को सख्त हिदायत दी कि किसी भी परिस्थिति में किसानों का आर्थिक शोषण न हो:
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पारदर्शी बोली (E-Auction/खुली बोली): धान की नीलामी पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए। सरकार द्वारा तय मानकों और गुणवत्ता के आधार पर किसानों को प्रतिस्पर्धात्मक और उचित दाम मिले।
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नमी मापक यंत्र (Moisture Meters): धान में नमी की मात्रा को लेकर किसानों और व्यापारियों के बीच अक्सर विवाद की स्थिति बनती है। इसके समाधान के लिए मंडी में प्रमाणित नमी मापक यंत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि सटीक जांच के बाद ही भाव तय हों।
3. सुचारू उठाव (Liftment) और बारदाने की व्यवस्था
मंडी में धान की आवक के मुकाबले यदि उठाव धीमा हो, तो मंडी प्रांगण में जाम की स्थिति बन जाती है।
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उठाव में तेजी: व्यापार मंडल और खरीद एजेंसियों को निर्देश दिए गए कि जैसे ही धान की तुलाई (Weighment) पूरी हो, उसे तुरंत ट्रकों में लोड कर गोदामों या राइस मिलों (Rice Mills) तक पहुंचाया जाए।
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पेमेंट और तुलाई की गति: किसानों को उनकी फसल की तुलाई के बाद समय पर भुगतान (Digital Payment) सुनिश्चित करने और तुलाई कांटों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया ताकि किसानों को मंडी में रात न बितानी पड़े।
4. किसानों के लिए मूलभूत सुविधाओं का जायजा
1 नवंबर को आयोजित इस समीक्षा बैठक में मंडी परिसर में आने वाले किसानों की सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया:
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पेयजल और स्वच्छता: मंडी प्रांगण में स्वच्छ पेयजल और शौचालय सुविधाओं को चालू हालत में रखने के निर्देश दिए गए।
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किसान भवन/कैंटीन: दूर-दराज से आने वाले किसानों के लिए सस्ते भोजन और रात्रि विश्राम की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए मंडी सचिव को पाबंद किया गया।
निष्कर्ष और प्रशासनिक सख्त संदेश
बैठक के समापन पर जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मंडी में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या आढ़तियों/व्यापारियों द्वारा गुटबाजी (Cartelization) की शिकायत मिलने पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन, मंडी व्यापार मंडल और किसानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करके ही इस खरीफ सीजन में धान की खरीद और उठाव प्रक्रिया को रिकॉर्ड समय में सुचारू रूप से पूरा किया जा सकता है।