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श्रीगंगानगर: ₹10 हजार महीने के किराए पर बैंक खाते लेकर ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश

श्रीगंगानगर।

राजस्थान की श्रीगंगानगर कोतवाली पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन म्यूल हंटर’ (Operation Mule Hunter) के तहत एक संगठित और शातिर साइबर ठगी गिरोह की कार्यप्रणाली का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह गरीब और जरूरतमंद लोगों के बैंक खातों को ₹10,000 प्रति माह के किराए पर लेकर देश भर में साइबर ठगी की रकम को खपाने और निकालने का काम कर रहा था। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर कार्रवाई तेज कर दी है।

ऑपरेशन म्यूल हंटर के तहत ऐसे हुआ खुलासा

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP/समन्वय पोर्टल) पर तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के पीड़ितों की शिकायतें दर्ज हुई थीं। इन शिकायतों में ठगी की राशि के लेनदेन का कनेक्शन श्रीगंगानगर के एसएसबी रोड स्थित एक बैंक खाते से जुड़ा हुआ पाया गया।

जांच के दौरान पुलिस जब संबंधित खाताधारक (आकाशदीप) तक पहुंची, तो एक चौंकाने वाला सच सामने आया। खाताधारक ने खुलासा किया कि उसने अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक और ऑनलाइन बैंकिंग एक्सेस एक मुख्य सरगना को ₹10,000 महीने के तय किराए पर सौंप रखा था।

गिरोह का ‘मोडस ऑपरेंडी’ (काम करने का तरीका)

पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड महालक्ष्मी नगर निवासी शुभम सेतिया है। आरोपी ने अपने साथ 10 से 12 युवकों की एक टीम जोड़ रखी थी। इस टीम का मुख्य काम ऐसे सीधे-सादे या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को खोजना था, जिन्हें तत्काल पैसों की सख्त जरूरत होती थी।

  1. बैंक खातों का अधिग्रहण: जरूरतमंद लोगों को हर महीने 10 हजार रुपये देने का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते या पुराने खाते हासिल किए जाते थे।

  2. अधिकार और एक्सेस जमा करना: खाताधारक से केवल आधार/पैन देकर दस्तखत करवाए जाते थे, जबकि एटीएम, सिम कार्ड और पासबुक आरोपी खुद अपने पास रखते थे।

  3. ठगी की रकम की निकासी: देशभर में ऑनलाइन निवेश, फर्जी ज्योतिष या शेयर बाजार के नाम पर साइबर ठगी के शिकार लोगों से पैसे इन किराए के ‘म्यूल अकाउंट्स’ (Mule Accounts) में ट्रांसफर करवाए जाते थे। इसके बाद तुरंत अलग-अलग एटीएम से कैश निकाल लिया जाता था।

करोड़ों की अचल संपत्ति और पॉश कॉलोनियों में निवेश

साइबर अपराध से अर्जित इस अवैध काली कमाई का इस्तेमाल आरोपी लग्जरी जीवनशैली जीने और प्रॉपर्टी खरीदने में कर रहे थे। जांच में सामने आया है कि मास्टरमाइंड ने ठगी के पैसों से श्रीगंगानगर की रिद्धि-सिद्धि कॉलोनी सहित अन्य पॉश इलाकों में महंगे भूखंड (प्लाॉट) और अचल संपत्तियां खरीदीं।

पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच

कोतवाली थाना पुलिस की टीमों ने मुख्य आरोपी के आवास और संभावित ठिकानों पर दबिश दी है। फिलहाल आरोपी घर से फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश में पुलिस की विशेष टीमें जुटी हुई हैं।

पुलिस प्रशासन के अनुसार, आरोपियों द्वारा अवैध रूप से अर्जित की गई चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा जुटाकर उन्हें एनडीपीएस और संबंधित कानूनों के तहत सीज (Seize) करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह ने अब तक कुल कितने खातों का इस्तेमाल किया और इसमें अंतरराज्यीय नेटवर्क के कौन-कौन से बड़े सरगना शामिल हैं।

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