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श्रीकरणपुर में दर्दनाक हादसा: ईंट भट्टे की पानी की डिग्गी में डूबने से दो प्रवासी मजदूरों की मौत; साथी को बचाने के प्रयास में गई दोनों की जान

श्रीकरणपुर (श्रीगंगानगर)। सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर के श्रीकरणपुर थाना क्षेत्र में सोमवार देर शाम एक बेहद दुखद और दर्दनाक हादसा सामने आया। 56 एफ गांव के समीप स्थित एक निजी ईंट भट्टे पर काम करने वाले दो प्रवासी मजदूरों की खेत में बनी पानी की डिग्गी में डूबने से अकाल मौत हो गई। यह दर्दनाक घटना उस वक्त हुई जब दोनों मजदूर दिनभर की कड़ी मशक्कत के बाद डिग्गी के किनारे हाथ-मुंह धोने गए थे। पुलिस जांच के मुताबिक, एक मजदूर का अचानक पैर फिसल जाने के कारण वह गहरे पानी में जा गिरा, जिसे बचाने के फेर में दूसरा मजदूर भी डिग्गी में कूद पड़ा और देखते ही देखते दोनों ही गहरे पानी में समा गए।

काम खत्म कर लौटते वक्त हुआ हादसा

श्रीकरणपुर पुलिस से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, 56 एफ गांव के पास स्थित ईंट भट्टे पर उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले कई प्रवासी मजदूर लंबे समय से काम कर रहे थे। सोमवार शाम को भी रोजाना की तरह सभी मजदूर अपना काम खत्म कर चुके थे। इसी दौरान 24 वर्षीय रामप्रवेश और 26 वर्षीय सोनू (नाम काल्पनिक/पहचान प्रक्रियाधीन) ईंट भट्टे के पास ही कृषि सिंचाई के लिए बनी गहरी पानी की डिग्गी पर मुंह-हाथ धोने और ताजा होने के लिए गए।

डिग्गी की ढलान और किनारों पर पानी व कीचड़ होने की वजह से फिसलन काफी ज्यादा थी। जैसे ही रामप्रवेश डिग्गी के किनारे झुका, उसका संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे गहरे पानी में जा गिरा। उसे तैरना नहीं आता था, जिसके कारण वह पानी में हाथ-पैर मारने लगा और मदद के लिए चिल्लाया।

दोस्ती और इंसानियत पड़ी जान पर भारी

अपने साथी को पानी में तड़पते और डूबते देख किनारे पर खड़ा दूसरा मजदूर सोनू एक पल के लिए भी नहीं झिझका। उसने बिना अपनी जान की परवाह किए रामप्रवेश को बचाने के लिए डिग्गी के गहरे पानी में छलांग लगा दी। हालांकि, डिग्गी की गहराई बहुत अधिक होने और नीचे अत्यधिक गाद (कीचड़) जमा होने के कारण सोनू भी खुद को संभाल नहीं पाया। डूब रहे रामप्रवेश ने घबराहट में सोनू को कसकर पकड़ लिया, जिसके चलते दोनों ही संतुलन खो बैठे और कुछ ही मिनटों में डिग्गी के गहरे पानी में ओझल हो गए।

दूर से यह मंजर देख रहे अन्य भट्टा मजदूरों ने तुरंत शोर मचाया और घटनास्थल की ओर दौड़े, लेकिन तब तक दोनों मजदूर पानी की गहराई में समा चुके थे।

प्रशासनिक मशक्कत और शवों की बरामदगी

घटना की सूचना मिलते ही श्रीकरणपुर थाना प्रभारी पुलिस टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। डिग्गी की गहराई अत्यधिक होने के कारण स्थानीय स्तर पर बचाव कार्य में काफी जटिलता आ रही थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत नागरिक सुरक्षा (Civil Defence) और आपदा राहत दल (SDRF/NDRF) की विशेष टीमों को सूचित कर मौके पर बुलाया गया।

आपदा राहत दल के गोताखोरों ने डिग्गी के ठंडे और गहरे पानी में उतरकर तलाशी अभियान शुरू किया। लगभग दो से तीन घंटे की कड़ी मशक्कत और सर्च ऑपरेशन के बाद गोताखोरों ने दोनों मजदूरों के शवों को डिग्गी की तलहटी से बाहर निकाला। शवों के बाहर आते ही मौके पर मौजूद अन्य साथी मजदूरों और ग्रामीणों में शोक की लहर दौड़ गई।

शवगृह में रखवाए गए शव, परिजनों को दी गई सूचना

पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर तुरंत श्रीकरणपुर के राजकीय उप जिला अस्पताल की मोर्चरी (शवगृह) में रखवा दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों मृतक मजदूरों के गृह राज्यों में स्थित उनके परिजनों को हादसे की सूचना दे दी गई है। परिजनों के श्रीकरणपुर पहुंचने के बाद ही शवों का पोस्टमार्टम करवाया जाएगा और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव परिजनों के सुपुर्द किए जाएंगे।

सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल

इस दर्दनाक हादसे के बाद क्षेत्र के ईंट भट्टों और कृषि फार्मों पर बनी पानी की डिग्गियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकांश ईंट भट्टा मालिक और खेत स्वामी डिग्गियों के चारों ओर सुरक्षा जाली (फेंसिंग) या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाते हैं, जिससे अक्सर इस तरह के हादसे होते रहते हैं। फिलहाल, श्रीकरणपुर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे के हर पहलू की जांच शुरू कर दी है।

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