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श्रीगंगानगर में ‘ऑपरेशन साइबर शील्ड’ की बड़ी सफलता: जवाहरनगर से अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह के 8 शातिर गिरफ्तार, करोड़ों की धोखाधड़ी का खुलासा

श्रीगंगानगर। सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर की जवाहरनगर थाना पुलिस और साइबर सेल ने संयुक्त रूप से एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन साइबर शील्ड’ के तहत एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने जवाहरनगर के सेक्टर-17 इलाके में एक लग्जरी गाड़ी को घेरकर उसमें बैठकर ठगी का नेटवर्क चला रहे 8 शातिर साइबर अपराधियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह गिरोह अब तक फर्जी वेबसाइटों और क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) में भारी मुनाफे का लालच देकर देशभर के लगभग 5,000 से अधिक लोगों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी कर चुका है।

गाड़ी को बनाया था ‘मूविंग साइबर क्राइम कंट्रोल रूम’

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, गिरोह के सदस्य पुलिस को चकमा देने के लिए किसी एक जगह पर रुककर काम नहीं करते थे। उन्होंने अपनी लग्जरी गाड़ी को ही एक ‘चलते-फिरते (मूविंग) साइबर क्राइम कंट्रोल रूम’ में बदल रखा था। आरोपी गाड़ी में हाई-स्पीड इंटरनेट, लैपटॉप, और दर्जनों मोबाइल फोन रखकर शहर के अलग-अलग सुनसान या आवासीय इलाकों में घूम-घूमकर ठगी का जाल बिछाते थे। जवाहरनगर थाना पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सेक्टर-17 में एक संदिग्ध गाड़ी खड़ी है, जिसमें सवार कुछ युवक लैपटॉप और मोबाइल के जरिए संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।

ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत अचानक घेराबंदी

सूचना मिलते ही जिला पुलिस अधीक्षक के निर्देशों पर स्पेशल साइबर टीम और जवाहरनगर पुलिस ने इलाके की नाकाबंदी कर गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया। पुलिस को देखकर आरोपियों ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद जवानों ने सभी 8 आरोपियों को मौके पर ही दबोच लिया। तलाशी लेने पर गाड़ी के भीतर से उच्च गुणवत्ता वाले लैपटॉप, कई नामी कंपनियों के दर्जनों स्मार्टफोन, फर्जी सिम कार्ड, एटीएम कार्ड और विभिन्न बैंकों की पासबुकें बरामद हुईं।

क्रिप्टोकरेंसी और फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट से ठगी का खेल

पुलिस की प्राथमिक पूछताछ में जो खुलासा हुआ, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे टेलीग्राम, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के जरिए लोगों से संपर्क साधता था। आरोपी पीड़ितों को शेयर बाजार, विदेशी मुद्रा (Forex) और विशेष रूप से क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने पर रोजाना 200% से 500% तक का रिटर्न देने का झांसा देते थे।

ठगी को असली जैसा दिखाने के लिए आरोपियों ने कुछ फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट्स बना रखी थीं। जब कोई पीड़ित पैसे निवेश करता, तो उसे फर्जी वेबसाइट के डैशबोर्ड पर अपना मुनाफा बढ़ता हुआ दिखाई देता था। लेकिन जब पीड़ित अपने पैसे या मुनाफे को बैंक खाते में निकालने (Withdraw) की कोशिश करता, तो आरोपी टैक्स या प्रोसेसिंग फीस के नाम पर और पैसों की मांग करते थे। अंत में, पैसे न मिलने पर आरोपी पीड़ित का नंबर ब्लॉक कर गायब हो जाते थे।

5,000 लोगों से ठगे करोड़ों रुपये, अंतरराष्ट्रीय तार खंगाल रही पुलिस

साइबर सेल की शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात समेत देश के विभिन्न राज्यों के लगभग 5,000 लोगों को अपना शिकार बनाया है। आरोपियों के बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट्स के प्राथमिक विश्लेषण से करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है।

पुलिस को अंदेशा है कि इस गिरोह के तार विदेशों में बैठे मुख्य आकाओं से भी जुड़े हो सकते हैं, जो इन्हें फर्जी सॉफ्टवेयर और टेलीग्राम बोट्स मुहैया कराते थे। गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि इनके पूरे नेटवर्क, बैंक खातों को फ्रीज करने और लूंटी गई रकम की बरामदगी की जा सके। इस बड़ी कामयाबी से क्षेत्र में सक्रिय अन्य साइबर अपराधियों में हड़कंप मच गया है।

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