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प्रशासन का कड़ा एक्शन: श्रीगंगानगर में दरिंदगी के अड्डों पर चला पीला पंजा, जमींदोज हुए 3 आलीशान होटल

भूमिका (त्वरित और सख्त न्याय की मांग) राजस्थान के श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय मासूम नाबालिग लड़की के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) मामले ने न सिर्फ पूरे शहर बल्कि समूचे देश को झकझोर कर रख दिया है। मासूम से हुई इस हैवानियत के बाद से ही स्थानीय जनता, व्यापारिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त था। हर तरफ से एक ही मांग उठ रही थी कि दोषियों को ऐसी सजा दी जाए जो आने वाले समय के लिए एक मिसाल बने। जनता के इसी भारी दबाव, जनाक्रोश और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस महकमे ने बेहद सख्त और कड़ा रुख अपनाया। अपराधियों के हौसले पस्त करने और अपराध के अड्डों कोस्त-नाबूद करने के लिए इस सप्ताह प्रशासन ने ऐतिहासिक रूप से ‘बुलडोजर कार्रवाई’ को अंजाम दिया।

अलसुबह की कार्रवाई: छावनी में बदला इलाका कार्रवाई को बेहद गोपनीय और रणनीतिक तरीके से अंजाम दिया गया ताकि किसी भी प्रकार के कानून-व्यवस्था के बिगड़ने या विरोध की स्थिति से निपटा जा सके। इस सप्ताह एक दिन तड़के सुबह (अलसुबह), जब पूरा शहर सो रहा था, भारी पुलिस बल, आरएसी (RAC) के जवानों और प्रशासनिक अधिकारियों का एक बड़ा काफिला शहर के चिन्हित इलाकों की तरफ बढ़ा। जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) के सीधे निर्देशों पर यूआईटी (UIT) और नगर परिषद की टीम भारी-भरकम जेसीबी (JCB), पोकलेन और हाइड्रोलिक मशीनों के साथ मौके पर पहुंची। देखते ही देखते उन होटलों के आस-पास के रास्तों को सील कर दिया गया और पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।

कौन से 3 होटल हुए जमींदोज? प्रशासन का पीला पंजा (बुलडोजर) उन तीन प्रमुख होटलों पर चला, जो इस घिनौने और जघन्य अपराध के मुख्य केंद्र बिंदु बने हुए थे। इन होटलों पर अवैध निर्माण, नियमों के उल्लंघन और सबसे बढ़कर अनैतिक व आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप थे:

  1. होटल जॉय इन (सुखाड़िया नगर रोड): इस होटल में मासूम को बंधक बनाकर रखने और बाहरी ग्राहकों को बुलाकर दुष्कर्म कराने के पुख्ता सबूत मिले थे। मशीनों ने चंद घंटों में इसके अवैध और व्यावसायिक ढांचे को ढहा दिया।

  2. होटल सफायर: इस होटल के मैनेजर और मालिकों ने चंद पैसों के लालच में आकर मानवता को शर्मसार किया था। प्रशासन की पोकलेन मशीनों ने इसकी दीवारों और कमरों को पूरी तरह से मलबे में तब्दील कर दिया।

  3. होटल खुंगर (ड्रीम होटल – बीरबल चौक): चहल चौक और बीरबल चौक के पास स्थित इस होटल पर भी सामूहिक दुष्कर्म को शह देने और मासूम की जिंदगी बर्बाद करने का आरोप था। इसे भी पूरी तरह से ध्वस्त (demolish) कर दिया गया।

चंद पैसों का लालच और दरिंदगी को पनाह पुलिस और एसआईटी (SIT) की जांच में यह बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक सच सामने आया था कि इन होटलों के संचालकों और मैनेजरों ने महज चंद रुपयों की कमाई और अनैतिक मुनाफे के लिए एक 13 साल की अबोध बच्ची को बंधक बनाकर रखा था। होटलों के कमरों को बकायदा एक सोची-समझी साजिश के तहत ‘क्राइम सीन’ में बदल दिया गया था, जहां ग्राहकों से मोटी रकम लेकर मासूम को उनके हवाले किया जाता था। होटलों के इस काले कारोबार और उसमें संलिप्त अपराधियों को आर्थिक रूप से चोट पहुंचाने और समाज में कड़ा संदेश देने के लिए ही इस ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

जनता में संतोष और अपराधियों में खौफ प्रशासन की इस त्वरित और ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद जहां पीड़ित परिवार और आक्रोशित स्थानीय जनता ने राहत की सांस ली है, वहीं शहर के अन्य अनैतिक गतिविधियों में लिप्त अपराधियों और होटल संचालकों में खौफ का माहौल है। आम जनता का कहना है कि ऐसे नरपिशाचों और उनका साथ देने वाले संपत्ति मालिकों के खिलाफ ऐसी ही कठोर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि कोई दोबारा किसी मासूम की जिंदगी से खेलने की जुर्रत न कर सके।

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि श्रीगंगानगर की पावन धरती पर किसी भी प्रकार के माफिया, देह व्यापार के रैकेट या महिला अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि भविष्य में भी किसी होटल या व्यावसायिक प्रतिष्ठान में ऐसी कोई संदिग्ध या अवैध गतिविधि पाई गई, तो उसका अंजाम भी इन 3 होटलों जैसा ही होगा।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️