
श्रीगंगानगर। जिले में हाल के दिनों में बढ़ी आपराधिक गतिविधियों, बढ़ते साइबर फ्रॉड (ऑनलाइन ठगी) और बाहरी राज्यों से आकर छिपे संदिग्ध लोगों की मौजूदगी को देखते हुए श्रीगंगानगर जिला पुलिस बेहद सतर्क हो गई है। शहर की शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए इस सप्ताह पुलिस प्रशासन ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। श्रीगंगानगर पुलिस ने आम नागरिकों, मकान मालिकों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए एक विशेष सुरक्षा गाइडलाइन जारी करते हुए जिले में किराएदार और घरेलू नौकरों का अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन (चरित्र सत्यापन) अभियान शुरू कर दिया है।
अभियान की आवश्यकता: साइबर क्राइम और बाहरी संदिग्धों का बढ़ता नेटवर्क
श्रीगंगानगर जिला भौगोलिक दृष्टि से पंजाब और हरियाणा राज्यों की सीमाओं के बेहद करीब है, साथ ही इसकी अंतरराष्ट्रीय सीमा पाकिस्तान से भी मिलती है। इस संवेदनशीलता के कारण अक्सर बाहरी राज्यों के अपराधी, साइबर ठग और मादक पदार्थों के तस्कर यहां आकर अपनी पहचान छुपाकर रहने की कोशिश करते हैं।
पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि कई मकान मालिक बिना किसी वैध पहचान पत्र (आईडी प्रूफ) या पृष्ठभूमि (बैकग्राउंड) की जांच किए, केवल अधिक किराए के लालच में बाहरी लोगों को अपने घरों या फ्लैटों में रख लेते हैं। ऐसे में ये किराए के मकान अपराधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह और ‘कंट्रोल रूम’ बन जाते हैं, जहां बैठकर वे देश के किसी भी कोने में साइबर ठगी, फिरौती या नशीले पदार्थों की डीलिंग जैसी अवैध गतिविधियों को अंजाम देते हैं। वारदात को अंजाम देने के बाद ये अपराधी रातों-रात कमरा खाली कर फरार हो जाते हैं, जिससे पुलिस के पास उनका कोई सुराग नहीं बचता।
मकान मालिकों को सख्त निर्देश: लापरवाही पर दर्ज होगी एफआईआर (FIR)
इस गंभीर सुरक्षा चूक को रोकने के लिए श्रीगंगानगर पुलिस अधीक्षक ने जिले के सभी थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सघन चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि कोई भी मकान मालिक, लॉज संचालक या प्रॉपर्टी डीलर बिना पुलिस वेरिफिकेशन के किसी भी व्यक्ति को किराए पर कमरा, दुकान या मकान नहीं देगा।
यदि कोई मकान मालिक इस गाइडलाइन का उल्लंघन करता पाया गया या उसके घर में बिना सत्यापन के कोई संदिग्ध व्यक्ति रहता हुआ मिला, तो पुलिस उस मकान मालिक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं (पूर्व में आईपीसी की धारा 188) के तहत लोक सेवक के आदेश की अवहेलना करने का कानूनी मुकदमा (एफआईआर) दर्ज करेगी। यह नियम घरों में काम करने वाले घरेलू नौकरों, ड्राइवरों, फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों और दुकानों के कर्मचारियों पर भी समान रूप से लागू होगा।
प्रक्रिया हुई बेहद आसान: राजस्थान पुलिस पोर्टल पर ऑनलाइन सुविधा
आम नागरिकों को पुलिस थानों के चक्कर न काटने पड़ें और समय की बचत हो, इसके लिए प्रशासन ने तकनीकी रूप से इस प्रक्रिया को बेहद सरल और सुलभ बना दिया है। मकान मालिक अब अपने मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए राजस्थान पुलिस के आधिकारिक वेब पोर्टल या ‘राजकॉम्प’ (RajCop) मोबाइल ऐप पर जाकर घर बैठे ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं।
इस ऑनलाइन फॉर्म में किराएदार या नौकर का नाम, उसका स्थायी पता, आधार कार्ड या अन्य सरकारी आईडी, फोटो और उसके मूल निवास के नजदीकी पुलिस स्टेशन की जानकारी भरनी होती है। फॉर्म सबमिट होते ही संबंधित पुलिस थाना उस व्यक्ति के गृह जिले या राज्य की पुलिस से संपर्क कर उसके आपराधिक रिकॉर्ड का सत्यापन कर लेता है। इस डिजिटल व्यवस्था से न केवल आम जनता को सहूलियत मिली है, बल्कि पुलिस के पास भी शहर में रहने वाले हर बाहरी व्यक्ति का एक पुख्ता और लाइव डेटाबेस तैयार हो रहा है।
अनहोनी को समय रहते रोकना ही मुख्य उद्देश्य
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसी भी संभावित अनहोनी, चोरी, डकैती या आतंकवादी गतिविधियों को समय रहते रोकना और छिपे हुए अपराधियों को बेनकाब करना है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे सुरक्षा को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझें और अपने आस-पास किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधि दिखने पर तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करें।
यदि आप इस क्षेत्र की किसी विशेष घटना, पुलिस जांच की वर्तमान स्थिति या ऑनलाइन वेरिफिकेशन की पूरी प्रक्रिया के बारे में अधिक विस्तार से जानना चाहते हैं, तो कृपया बताएं।