
श्रीगंगानगर। राजस्थान का सीमावर्ती जिला श्रीगंगानगर भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से बिल्कुल सटा होने के कारण लंबे समय से राष्ट्रविरोधी तत्वों और ड्रग माफियाओं के निशाने पर रहा है। हाल के दिनों में सीमा पार से ड्रोन के जरिए और स्थानीय स्तर पर अंतरराज्यीय नेटवर्क के माध्यम से नशीले पदार्थों की तस्करी के मामलों में तेजी देखी गई है। इस गंभीर चुनौती से निपटने और युवा पीढ़ी को नशे के दलदल से बचाने के लिए इस सप्ताह स्थानीय पुलिस, सीमा सुरक्षा बल (BSF) और अन्य खुफिया एजेंसियों ने मिलकर सीमावर्ती इलाकों में मादक पदार्थों (ड्रग्स) के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त धरपकड़ अभियान शुरू किया है।
भौगोलिक संवेदनशीलता और तस्करी का नया ट्रेंड
श्रीगंगानगर जिले की लंबी सीमा रेखा पाकिस्तान से मिलती है। इस भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर सीमा पार बैठे हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थों के बड़े स्मगलर रात के अंधेरे में हाईटेक ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर भारतीय सीमा में नशे की खेप गिराते हैं। इसके अलावा, पंजाब और हरियाणा की सीमाओं से जुड़े होने के कारण यहां सड़क मार्ग से भी प्रतिबंधित गोलियों और अफीम की भारी सप्लाई की जाती है।
इस सप्ताह सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिले थे कि कुछ स्थानीय तस्कर सीमावर्ती गांवों में सक्रिय होकर पंजाब और राजस्थान के अन्य हिस्सों में नशे की बड़ी खेप पहुंचाने की फिराक में हैं। इसी सूचना के आधार पर पुलिस और सुरक्षा बलों ने अपनी रणनीति बदलते हुए ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत काम करना शुरू किया।
बीट क्षेत्रों और सीमावर्ती गांवों में बढ़ी गश्त, ताबड़तोड़ छापेमारी
सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए जिला पुलिस और बीएसएफ ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों, ढाणियों और संवेदनशील बीट क्षेत्रों में अपनी गश्त को दोगुना कर दिया है। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आधुनिक उपकरणों और डॉग स्क्वायड की मदद ली जा रही है।
इस विशेष अभियान के तहत पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टीम और स्थानीय थानों की पुलिस ने संयुक्त रूप से तस्करों के संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में नशीली अफीम, डोडा पोस्त और मेडिकल स्टोर की आड़ में बेची जाने वाली प्रतिबंधित नशीली गोलियां व कैप्सूल (नारकोटिक्स ड्रग्स) बरामद करने में सफलता हासिल की है। इन प्रतिबंधित दवाओं का इस्तेमाल युवा वर्ग को नशे की लत लगाने के लिए धड़ल्ले से किया जा रहा था।
संदिग्ध हिरासत में, बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज खंगालने में जुटी पुलिस
इस व्यापक धरपकड़ अभियान के दौरान पुलिस ने सीमावर्ती क्षेत्रों से कई नामी और संदिग्ध तस्करों को हिरासत में लिया है। पुलिस केवल इन तस्करों की गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के लिए उनके ‘बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज’ (नशा कहां से आया और किसे बेचा जाना था) की गहनता से जांच कर रही है।
पकड़े गए संदिग्धों के मोबाइल कॉल डिटेल्स, वित्तीय लेन-देन (बैंक खातों के ट्रांजैक्शन) और सोशल मीडिया संपर्कों को खंगाला जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस रैकेट के तार पंजाब के बड़े ड्रग लॉर्ड्स या सीमा पार बैठे पाकिस्तानी आकाओं से तो नहीं जुड़े हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशे के इस काले कारोबार में शामिल किसी भी सफेदपोश या मददगार को बख्शा नहीं जाएगा।
आमजन से सहयोग की अपील और पुलिस का सख्त संदेश
इस बड़े क्रैकडाउन के बीच श्रीगंगानगर पुलिस ने सीमावर्ती गांवों के नागरिकों और युवाओं से इस अभियान में भागीदार बनने की अपील की है। पुलिस ने विभिन्न गांवों में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित कर ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि नशा बेचने वालों या संदिग्ध ड्रोन मूवमेंट की सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम और पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जो भी व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन ड्रग तस्करों को शरण देगा या उनकी मदद करेगा, उसकी संपत्ति को सीज करने और उसके खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की सबसे सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा एजेंसियों की इस मुस्तैदी से सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय ड्रग माफिया बैकफुट पर आ गए हैं और उनके पूरे सप्लाई चेन को इस सप्ताह भारी नुकसान पहुंचा है।