🢀
नहरों में पानी की स्थिति और सिंचाई को लेकर किसानों की बैठक: भीषण गर्मी में फसलों को बचाने की बड़ी जद्दोजहद

श्रीगंगानगर। राजस्थान के सबसे प्रमुख कृषि प्रधान जिले श्रीगंगानगर में इन दिनों खरीफ के सीजन की मुख्य फसलों—विशेषकर नरमा, कपास और ग्वार—की बुवाई का काम लगभग पूरा हो चुका है। बुवाई खत्म होने के बाद अब पौधों को जीवित रखने और उनके बेहतर विकास के लिए सबसे ज्यादा जरूरत सिंचाई के पानी की है। लेकिन इसी बीच, इलाके में पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी और लू (Heatwave) ने किसानों की चिंता को कई गुना बढ़ा दिया है। 17 और 18 जून 2026 (बुधवार और गुरुवार) को श्रीगंगानगर के विभिन्न उपखंडों और जल उपभोक्ता संगम कार्यालयों में किसानों, किसान नेताओं और सिंचाई विभाग (Irrigation Department) के आला अधिकारियों के बीच अहम समीक्षा बैठकें आयोजित की गईं।

इन बैठकों का मुख्य एजेंडा नहरों में पानी की वर्तमान स्थिति, पानी की बारी (बारीबंदी) का कड़ाई से पालन और सिंचाई रेगुलेशन के अनुसार जिले की सभी मुख्य नहरों और माइनरों में पूरा पानी चलाना रहा। इस अत्यधिक ऊंचे तापमान में यदि फसलों को समय पर पानी नहीं मिला, तो खेतों में खड़ी नई पौध के झुलसने का सीधा खतरा मंडरा रहा है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

‘टेल’ तक पानी पहुंचाने की सबसे बड़ी चुनौती

बैठकों के दौरान किसान नेताओं और भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधियों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों के सामने सबसे प्रमुख मुद्दा ‘टेल’ (नहर के अंतिम छोर पर स्थित खेत) तक पानी न पहुंचने का उठाया। किसानों का आरोप है कि नहरों के ऊपरी हिस्सों (Head) में पानी की चोरी और अवैध मोघों (आउटलेट्स) के कारण अंतिम छोर पर बैठे किसानों को उनके हक का पूरा पानी नहीं मिल पाता है।

भीषण गर्मी के इस दौर में स्थिति और भी विकट हो जाती है क्योंकि तेज धूप के कारण वाष्पीकरण (Evaporation) दर बढ़ जाती है, जिससे पानी का बहाव वैसे ही कम हो जाता है। किसान नेताओं ने दो टूक शब्दों में मांग की है कि सिंचाई विभाग की टीमें पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर नहरों पर विशेष गश्त लगाएं ताकि पानी की चोरी रोकी जा सके और रेगुलेशन के मुताबिक निर्धारित पूरा पानी अंतिम छोर के प्रत्येक किसान के खेत तक सुनिश्चित किया जा सके।

रेगुलेशन और बारीबंदी को लेकर बनी सहमति

सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer) और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने किसानों को आश्वस्त किया कि वे पंजाब के मुख्य फीडर और हरिके बैराज से आने वाले पानी की आवक पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। बैठकों में निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर सहमति बनाने का प्रयास किया गया:

  • बारीबंदी का सख्त पालन: पानी के वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए ‘बारीबंदी’ (पानी लगाने का साप्ताहिक समय चक्र) को पूरी कड़ाई से लागू किया जाएगा। किसी भी रसूखदार या अन्य व्यक्ति को दूसरे किसान के हिस्से का पानी लेने की अनुमति नहीं होगी।

  • नहरों की मरम्मत और सफाई: जिन नहरों में सिल्ट (मिट्टी) जमा होने के कारण पानी की गति धीमी है, वहां तुरंत पोकलेन और जेसीबी मशीनों के जरिए सफाई करवाने की बात कही गई ताकि पानी का सुचारू प्रवाह बना रहे।

  • इमरजेंसी कंट्रोल रूम: सिंचाई विभाग ने जिला मुख्यालय पर एक विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया है, जहां किसान पानी की कमी या चोरी से जुड़ी शिकायतें दर्ज करवा सकते हैं।

कृषि विशेषज्ञों की किसानों को सलाह

बैठक में मौजूद कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने भी इस भीषण गर्मी में पानी के सही प्रबंधन को लेकर किसानों को महत्वपूर्ण सुझाव दिए। विशेषज्ञों के अनुसार, दोपहर के समय (जब तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार होता है) सिंचाई करने से बचना चाहिए, क्योंकि उस समय पानी तुरंत भाप बन जाता है और पौधों की जड़ें भी गर्म पानी के कारण खराब हो सकती हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि वे केवल अलसुबह (सुबह 4 से 7 बजे) या देर शाम और रात के समय ही खेतों में पानी लगाएं। इससे पानी की बचत होगी और पौधों को पूरी नमी मिल सकेगी।

श्रीगंगानगर की पूरी अर्थव्यवस्था नहरों के पानी और खेती पर ही टिकी हुई है। ऐसे में सिंचाई विभाग और किसानों के बीच हुई ये बैठकें आने वाले हफ्तों में फसलों के भविष्य को तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगी। यदि प्रशासन वादे के मुताबिक पानी की आपूर्ति बनाए रखता है, तो इस बार भी जिले में नरमा और कपास की बंपर पैदावार की उम्मीद की जा सकती है।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️