
श्रीगंगानगर। राजस्थान का सीमावर्ती जिला श्रीगंगानगर इन दिनों भीषण गर्मी, उमस और चिलचिलाती धूप की दोहरी मार झेल रहा है। जून का महीना आधा बीत जाने के बाद भी सूर्य देव के तेवर लगातार तीखे बने हुए हैं। 17 और 18 जून 2026 को पूरे जिले सहित आस-पास के ग्रामीण इलाकों में तपिश का कहर अपने चरम पर देखा गया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, पिछले 24 से 48 घंटों में इस पूरे क्षेत्र में दिन का अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया है, जिसने लोगों को घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया है।
केवल दिन ही नहीं, बल्कि अब रातें भी बेहद गर्म और बेचैन करने वाली साबित हो रही हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि थार मरुस्थल की ओर से आ रही शुष्क और बेहद गर्म हवाओं (लू) के कारण वातावरण में गर्मी का यह चक्र बना हुआ है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौसम विभाग ने आने वाले कुछ दिनों के लिए श्रीगंगानगर और आसपास के जिलों के लिए ‘यलो’ और ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी रखा है, जिसका सीधा मतलब है कि फिलहाल इस जानलेवा गर्मी से राहत मिलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
दोपहर में थम सी जा रही है शहर की रफ्तार
गर्मी और हीटवेव का सबसे बड़ा असर श्रीगंगानगर के स्थानीय बाजारों और सड़कों पर देखने को मिल रहा है। सुबह 10 बजते ही सूरज की किरणें आग उगलने लगती हैं, और दोपहर होते-होते स्थिति यह हो जाती है कि मुख्य बाजारों—जैसे गोल बाजार, सुखाड़िया सर्कल और कलेक्ट्रेट रोड—पर सन्नाटा पसर जाता है। दुपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वाले राहगीरों के लिए सड़क पर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है।
लोग अपने चेहरों को सूती कपड़ों, स्कार्फ और चश्मों से ढककर ही बाहर निकल रहे हैं। दोपहर 12 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक बाजारों में आवाजाही लगभग न के बराबर हो जाती है, जिससे स्थानीय व्यापारियों के व्यापार पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। शाम को सूरज ढलने के काफी देर बाद ही लोग जरूरी सामान की खरीदारी के लिए घरों से बाहर आ रहे हैं।
बिजली-पानी की मांग में भारी उछाल और प्रशासनिक चुनौतियां
तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार जाने से पूरे जिले में बिजली और पीने के पानी की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। घरों और दफ्तरों में एयर कंडीशनर (AC) और कूलर लगातार चल रहे हैं, जिससे पावर ग्रिड पर लोड अत्यधिक बढ़ गया है। कई इलाकों से अघोषित बिजली कटौती और ट्रिपिंग की शिकायतें भी सामने आ रही हैं, जो इस गर्मी में आम जनता की परेशानी को दोगुना कर रही हैं।
इसके साथ ही, पीने के पानी की किल्लत भी गहराने लगी है। जिला प्रशासन और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के सामने इस भीषण गर्मी में हर घर तक सुचारू रूप से पानी पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। ग्रामीण अंचलों में पशुधन के लिए भी पानी के पुख्ता इंतजाम करने की मांग उठ रही है, क्योंकि तपते तापमान का असर बेजुबान जानवरों और पक्षियों पर भी सबसे ज्यादा पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी: ‘हीट स्ट्रोक’ से बचें
भीषण गर्मी को देखते हुए श्रीगंगानगर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने आमजन के लिए स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है। जिला अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रखा गया है, और लू (Heat Stroke) के मरीजों के लिए विशेष वार्ड और ओआरएस (ORS) कॉर्नर तैयार किए गए हैं।
चिकित्सकों ने आम जनता को निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
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तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाएं: दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी, छाछ, नींबू पानी, आम का पन्ना और नारियल पानी पिएं।
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खाली पेट बाहर न निकलें: तेज धूप में बाहर जाने से पहले कुछ खाकर और पानी पीकर ही निकलें।
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ढीले और सूती कपड़े पहनें: हल्के रंग के सूती कपड़े शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं।
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बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें: इस मौसम में बच्चों और बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) की समस्या बहुत जल्दी होती है, इसलिए उन्हें दोपहर के समय घर के अंदर ही रखें।
कृषि क्षेत्र पर मौसम का प्रभाव
श्रीगंगानगर को राजस्थान का ‘अन्न का कटोरा’ कहा जाता है, और यहाँ इस समय खरीफ की फसलों, विशेषकर नरमा, कपास और ग्वार की बुवाई का काम पूरा हो चुका है या अंतिम चरणों में है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान इसी तरह 44-45 डिग्री के आसपास बना रहा और नहरों में पानी का रेगुलेशन सही नहीं रहा, तो छोटे पौधों के झुलसने का खतरा बढ़ जाएगा। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फसलों में नमी बनाए रखने के लिए शाम के समय या अलसुबह ही सिंचाई करें।
आने वाले दिनों में यदि प्री-मानसून की गतिविधियां शुरू नहीं होती हैं, तो यह हीटवेव आम जनजीवन के साथ-साथ कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चिंता का विषय बन सकती है।