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नशे के सौदागरों पर श्रीगंगानगर पुलिस का अब तक का सबसे बड़ा प्रहार: 4.68 लाख नशीली गोलियों की भारी खेप बरामद, मुख्य तस्कर गिरफ्तार

श्रीगंगानगर। सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और इसके अवैध कारोबार के खिलाफ स्थानीय पुलिस ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। 15 और 16 जून के दरमियान श्रीगंगानगर पुलिस की स्पेशल टीम (DST) और सब-इंस्पेक्टर हंसराज की अगुवाई वाली टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए नशे के एक बहुत बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए न केवल एक मुख्य अंतरराज्यीय तस्कर को रंगे हाथों दबोचा है, बल्कि उसके कब्जे से अलग-अलग नामी ब्रांड्स की भारी मात्रा में 4,68,256 नशीली गोलियां (प्रतिबंधित नशीली दवाएं) बरामद की हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार और काले बाजार में इस खेप की कीमत लाखों-करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। इस कार्रवाई ने इलाके में सक्रिय ड्रग माफिया की कमर तोड़ कर रख दी है।

गुप्त सूचना पर बिछाया गया जाल

पुलिस महानिरीक्षक और जिला पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में श्रीगंगानगर पुलिस पिछले काफी समय से नशे के खिलाफ विशेष अभियान चला रही है। इसी कड़ी में 15 जून की शाम को सब-इंस्पेक्टर हंसराज और स्पेशल टीम को एक पुख्ता और बेहद गोपनीय सूचना मिली। मुखबिर ने बताया कि पंजाब और अन्य राज्यों की सीमा से सटे श्रीगंगानगर के एक खास इलाके में प्रतिबंधित नशीली दवाओं की एक बहुत बड़ी डिलीवरी होने वाली है। यह खेप युवाओं को गर्त में धकेलने के लिए स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे तस्करों को सप्लाई की जानी थी।

सूचना की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने बिना समय गंवाए एक विशेष रणनीतिक टीम का गठन किया। चिन्हित किए गए रूट और संभावित डिलीवरी पॉइंट के आसपास पुलिस ने सघन नाकेबंदी (चैकिंग) शुरू कर दी। सादे कपड़ों में भी पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया ताकि तस्करों को भनक न लग सके।

नाकेबंदी के दौरान रंगे हाथों पकड़ा गया मुख्य आरोपी

नाकेबंदी के दौरान पुलिस की टीम आने-जाने वाले हर संदिग्ध वाहन और व्यक्ति पर पैनी नजर रखे हुए थी। इसी दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति पुलिस को देखकर अपनी चाल बदलने लगा और वहां से भागने की फिराक में था। पुलिस की स्पेशल टीम और सब-इंस्पेक्टर हंसराज ने फुर्ती दिखाते हुए घेराबंदी की और उस शख्स को धर दबोचा।

पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम गोपीचंद बताया। जब पुलिस ने उसके पास मौजूद बैग और बोरियों की तलाशी ली, तो वहां मौजूद अधिकारी और जवान भी सन्न रह गए। बोरियां कोई सामान्य सामान नहीं, बल्कि प्रतिबंधित नशीली गोलियों से खचाखच भरी हुई थीं। गिनती करने पर अलग-अलग ब्रांड्स की कुल 4 लाख 68 हजार 256 नशीली गोलियां बरामद की गईं, जिनके पास रखने या परिवहन करने का कोई भी वैध लाइसेंस या डॉक्टर का पर्चा आरोपी के पास नहीं था।

नंदू और अश्विनी की तलाश में छापेमारी

मुख्य आरोपी गोपीचंद को एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) की गंभीर धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रारंभिक पूछताछ में गोपीचंद ने उगल दिया है कि वह इस काले कारोबार में अकेला नहीं है। उसने अपने दो अन्य साथियों नंदू और अश्विनी के नामों का खुलासा किया है, जो इस बड़ी खेप को ठिकाने लगाने और इसके फाइनेंसिंग नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।

पुलिस ने दोनों फरार आरोपियों (नंदू और अश्विनी) के संभावित ठिकानों पर दबिश देना शुरू कर दिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद यह साफ हो सकेगा कि इतनी बड़ी मात्रा में नशीली दवाइयां किस दवा फैक्ट्री या होलसेल सप्लायर से अवैध रूप से बाहर निकाली गईं और इसे किन-किन इलाकों में खपाया जाना था।

युवाओं को बचाने की दिशा में बड़ा कदम

श्रीगंगानगर और आसपास के सीमावर्ती जिलों में सिंथेटिक ड्रग्स और नशीली गोलियों का चलन तेजी से बढ़ा है, जो यहां की युवा पीढ़ी को खोखला कर रहा है। पुलिस की इस मुस्तैद कार्रवाई से लाखों युवाओं की जिंदगी बर्बाद होने से बच गई है।

पुलिस प्रशासन का संदेश: “नशे के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति है। यह कार्रवाई सिर्फ एक बानगी है। गोपीचंद से पूछताछ के आधार पर हम इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचेंगे और जो भी इस अवैध धंधे में शामिल है, उसे बख्शा नहीं जाएगा।”

फिलहाल, पुलिस आरोपी गोपीचंद को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है, ताकि इसके बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज (यानी नशा कहां से आया और कहां जा रहा था) का पूरी तरह से पर्दाफाश किया जा सके।

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