
श्रीगंगानगर/बीकानेर। राजस्थान के कृषि क्षेत्र और किसानों के हक पर डाका डालने वाले ‘नकली मूंगफली बीज घोटाले’ में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। राजस्थान राज्य बीज निगम (RSSC) से जुड़े इस बेहद संवेदनशील मामले में शुक्रवार (12 जून) को एक बड़ा अपडेट सामने आया। पांच दिनों की कड़ाई से की गई पूछताछ के बाद, एसीबी की टीम ने मामले के छह मुख्य आरोपियों को बीकानेर की विशेष भ्रष्टाचार निवारण अदालत में पेश किया। मामले की गंभीरता और नए सुरागों को खंगालने के लिए अदालत ने सभी आरोपियों की हिरासत (रिमांड) अवधि को 2 दिन के लिए और बढ़ा दिया है। अब एसीबी इन आरोपियों से 14 जून तक और गहन पूछताछ कर सकेगी।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ खुलासा?
यह पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब राजस्थान राज्य बीज निगम के गोदामों और प्रमाणित केंद्रों पर घटिया व नकली मूंगफली के बीजों की खेप पकड़ी गई थी। नियमानुसार, इन नकली बीजों को तुरंत जब्त कर संबंधित सप्लायरों और अधिकारियों पर कड़ी कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जानी चाहिए थी। लेकिन, बीज निगम के आला अधिकारियों और बिचौलियों ने मिलकर इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश की।
एसीबी को खुफिया सूचना मिली थी कि नकली और अमानक (Substandard) मूंगफली के बीजों को बिना किसी जांच या कार्रवाई के बाजार और सरकारी केंद्रों के जरिए किसानों को बेचने के लिए हरी झंडी दी जा रही है। इसके एवज में अधिकारियों और बिचौलियों के बीच लाखों रुपये की रिश्वत का लेन-देन हुआ। सूचना की पुष्टि होने पर एसीबी ने जाल बिछाया और कार्रवाई करते हुए इस रैकेट का भंडाफोड़ किया।
केवल रिश्वत का मामला नहीं, किसानों के खिलाफ बड़ी आर्थिक साजिश
शुरुआती दौर में यह मामला सिर्फ एक सामान्य रिश्वतखोरी का लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे एसीबी की जांच आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। एसीबी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह सिर्फ चंद लाख रुपयों की घूस का मामला नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर राजस्थान के हजारों सीधे-सादे किसानों को ठगने और उनकी पूरी फसल बर्बाद करने की एक बहुत बड़ी आर्थिक व आपराधिक साजिश है।
मूंगफली की खेती करने वाले किसान सरकारी और प्रमाणित बीजों पर भरोसा करके भारी निवेश करते हैं। यदि इन नकली और घटिया बीजों को खेतों में बो दिया जाता, तो:
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बीजों का अंकुरण (Germination) सही तरीके से नहीं होता।
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फसल में भयंकर बीमारियां लगने का खतरा बढ़ जाता।
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किसानों की मेहनत, खाद, पानी और ट्रैक्टर का खर्च पूरी तरह बर्बाद हो जाता।
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अंततः, उत्पादन ठप होने से करोड़ों रुपये का कृषि नुकसान होता, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को भी चोट पहुंचाता।
इस साजिश के तहत मुनाफाखोरों और भ्रष्ट अधिकारियों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए अन्नदाताओं के पूरे सीजन को दांव पर लगा दिया था।
रिमांड बढ़ने के बाद अब आगे क्या?
अदालत द्वारा रिमांड की अवधि 2 दिन और बढ़ाए जाने के बाद एसीबी की टीम अब इस घोटाले की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, अगले 48 घंटों में एसीबी निम्नलिखित बिंदुओं पर अपनी जांच केंद्रित करेगी:
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वित्तीय लेन-देन के सबूत: रिश्वत की राशि का फ्लो कहां से कहां हुआ? क्या इसके लिए हवाला नेटवर्क या बेनामी बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था?
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मुख्य मास्टरमाइंड की तलाश: पकड़े गए छह आरोपी इस खेल के मोहरे मात्र हो सकते हैं। असली मास्टरमाइंड और जयपुर मुख्यालय में बैठे कुछ अन्य बड़े अधिकारियों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।
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दस्तावेजों और कंप्यूटर डेटा की जांच: बीज निगम के कार्यालयों से जब्त किए गए कंप्यूटर, फाइलों और डिजिटल रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि अब तक इस तरह के कितने नकली बीज किसानों के बीच बांटे जा चुके हैं।
किसानों और किसान संगठनों में भारी आक्रोश
इस घोटाले के सामने आने के बाद श्रीगंगानगर, बीकानेर और हनुमानगढ़ बेल्ट के किसान संगठनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। किसान नेताओं ने मांग की है कि इस घोटाले में शामिल किसी भी रसूखदार को बख्शा न जाए और दोषियों की संपत्तियां कुर्क कर नुकसान की भरपाई की जाए।
एसीबी की इस तेज कार्रवाई से भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दो दिनों में इस नकली बीज घोटाले से जुड़े कुछ और बड़े चेहरों के नाम सामने आ सकते हैं, जिससे राजस्थान बीज निगम में चल रहे बड़े खेल का पूरी तरह पर्दाफाश हो जाएगा।