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श्रीगंगानगर में स्कूल पिकनिक के दौरान बड़ा हादसा: फूड प्वाइजनिंग से 48 बच्चे हुए बीमार, प्रशासन में मचा हड़कंप

घटना का विवरण: खुशी का माहौल अचानक चीख-पुकार में बदला

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में एक बेहद हैरान और परेशान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक स्थानीय निजी स्कूल द्वारा आयोजित की गई पिकनिक मासूम बच्चों के लिए आफत बन गई। रोजमर्रा की पढ़ाई के तनाव से दूर, बच्चे बेहद उत्साह और खुशी के साथ स्कूल प्रशासन द्वारा आयोजित एक दिवसीय पिकनिक पर पास ही के एक प्रसिद्ध वाटर पार्क में गए थे। सुबह से ही बच्चे वाटर पार्क के पूल्स और स्लाइड्स का आनंद ले रहे थे और चारों तरफ हंसी-खुशी का माहौल था।

दोपहर के समय स्कूल प्रबंधन और वाटर पार्क के कैटरिंग स्टाफ द्वारा बच्चों के लिए दोपहर के भोजन (लंच) की व्यवस्था की गई थी। खाना खाने के करीब एक से डेढ़ घंटे बाद, अचानक कुछ बच्चों ने पेट में तेज दर्द, मरोड़ और जी मिचलाने की शिकायत की। शुरुआत में स्कूल स्टाफ ने इसे सामान्य थकान या धूप का असर समझा, लेकिन देखते ही देखते एक-एक कर कई बच्चों को उल्टी और दस्त (डायरिया) शुरू हो गए। कुछ ही मिनटों में वाटर पार्क का परिसर बच्चों की चीख-पुकार और रोने की आवाजों से गूंज उठा। कुल 48 बच्चे इस अचानक फैली बीमारी की चपेट में आ गए, जिससे वहां मौजूद शिक्षकों और स्कूल स्टाफ के हाथ-पांव फूल गए।

अस्पताल में आपातकालीन स्थिति और त्वरित राहत कार्य

स्थिति की गंभीरता और बच्चों की बिगड़ती हालत को देखते हुए स्कूल प्रशासन ने बिना समय गंवाए तुरंत निजी वाहनों और एम्बुलेंस की मदद से सभी प्रभावित बच्चों को नजदीकी राजकीय और निजी अस्पतालों के आपातकालीन वार्ड में पहुंचाना शुरू किया। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बीमार बच्चों के अस्पताल पहुंचने से चिकित्सा महकमे में भी हड़कंप मच गया।

अस्पताल प्रशासन ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए अतिरिक्त डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी लगाई। शुरुआती जांच के बाद डॉक्टरों ने पुष्टि की कि यह पूरी तरह से फूड प्वाइजनिंग (खाद्य विषाक्तता) का मामला है, जो कि दूषित या खराब खाना खाने की वजह से हुआ है। बच्चों के शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) को रोकने के लिए तुरंत उन्हें ड्रिप (ग्लूकोज) चढ़ाई गई और आवश्यक एंटीबायोटिक्स व दवाइयां दी गईं। डॉक्टरों की त्वरित कार्रवाई और कड़ी मेहनत के बाद धीरे-धीरे स्थिति नियंत्रण में आई। चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, राहत की बात यह है कि फिलहाल सभी बच्चों की स्थिति पूरी तरह से खतरे से बाहर और स्थिर बताई जा रही है, हालांकि कुछ बच्चों को अभी भी डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।

परिजनों का फूटा गुस्सा और स्कूल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

जैसे ही इस हादसे की खबर बच्चों के माता-पिता और परिजनों तक पहुंची, अस्पताल परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई। अपने मासूम बच्चों को तड़पता देख परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और उनका गुस्सा स्कूल प्रबंधन पर फूट पड़ा।

परिजनों ने स्कूल प्रशासन पर घोर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और उनके खान-पान की गुणवत्ता की पूरी जिम्मेदारी स्कूल की थी, जिसे निभाने में वे पूरी तरह नाकाम रहे। माता-पिता का सवाल है कि भीषण गर्मी के इस मौसम में बच्चों को बासी या दूषित खाना क्यों परोसा गया और खाना परोसने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं की गई? अस्पताल के बाहर परिजनों ने जमकर हंगामा किया और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

प्रशासनिक जांच और खाद्य विभाग की कार्रवाई

इस संवेदनशील मामले की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें तुरंत सक्रिय हो गईं। उपखंड अधिकारी (SDM) और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने अस्पताल पहुंचकर बच्चों के स्वास्थ्य का जायजा लिया और उनके परिजनों को ढांढस बंधाया।

प्रशासन के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (Food Safety Officers) की एक विशेष टीम तुरंत उस वाटर पार्क के रिज़ॉर्ट और कैफे में पहुंची जहां बच्चों को खाना परोसा गया था। टीम ने रसोईघर की साफ-सफाई का निरीक्षण किया, जहां कई खामियां पाई गईं। अधिकारियों ने मौके पर बचे हुए भोजन, कच्चे माल, मसालों और पीने के पानी के सैंपल (नमूने) सील कर दिए हैं, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला (लैब) भेजा जा रहा है।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि लैब रिपोर्ट आने के बाद यदि भोजन में किसी भी प्रकार की मिलावट, बासीपन या गंदगी की पुष्टि होती है, तो वाटर पार्क के संचालक और स्कूल प्रबंधन दोनों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या के प्रयास और लापरवाही की धाराओं के तहत सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फिलहाल पुलिस ने भी इस संबंध में मरुधरा पुलिस थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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